घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम, 2005 के तहत किसी घरेलू संबंध में रहने वाली या पहले रह चुकी महिला सुरक्षा, रहने की व्यवस्था, आर्थिक राहत और अन्य उपयुक्त आदेश मांग सकती है। कानून केवल मारपीट तक सीमित नहीं है। इसमें यौन, मौखिक, भावनात्मक और आर्थिक उत्पीड़न भी शामिल हैं। राहत के लिए मजिस्ट्रेट के समक्ष आवेदन का रास्ता है, जिसमें संरक्षण अधिकारी सहायता कर सकता है।
| सवाल | मुख्य जानकारी |
|---|---|
| कानून | घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम, 2005 |
| आवेदन | धारा 12 के तहत मजिस्ट्रेट के समक्ष |
| संभावित राहत | सुरक्षा, निवास, आर्थिक सहायता, अस्थायी अभिरक्षा और मुआवजा |
| सरकारी सहायता | महिला हेल्पलाइन 181, आपातकालीन सहायता 112, विधिक सहायता 15100 |
घरेलू हिंसा में कौन से व्यवहार आते हैं?
अधिनियम की धारा 3 में शारीरिक नुकसान के साथ महिला की मानसिक सेहत, सुरक्षा और सम्मान को नुकसान पहुंचाने वाले व्यवहार भी आते हैं। गैरकानूनी दहेज या संपत्ति की मांग पूरी कराने के लिए उत्पीड़न और संबंधित धमकियां भी इसके दायरे में हैं। इसलिए चोट का निशान नहीं होने से किसी शिकायत को अपने आप कानून से बाहर नहीं माना जा सकता।
आर्थिक उत्पीड़न का मतलब केवल कम खर्च मिलना नहीं है। कानूनी हक वाले आर्थिक संसाधनों से वंचित करना, जरूरी घरेलू खर्च या भरण पोषण रोकना, स्त्रीधन या संपत्ति से संबंधित अधिकारों को बाधित करना जैसे व्यवहार कानून के वर्णन में आते हैं। हर विवाद में संबंधित तथ्य और परिस्थितियां देखी जाती हैं। आवेदन में सामान्य आरोप के बजाय घटना और उसके असर को साफ लिखना उपयोगी है।
घरेलू संबंध की परिभाषा में विवाह के अलावा रक्त संबंध, दत्तक संबंध, विवाह जैसी प्रकृति का संबंध और साथ रहने वाले संयुक्त परिवार के संबंध भी शामिल हैं। किसी विशेष मामले में यह परिभाषा कैसे लागू होगी, इसका निर्णय तथ्य और लागू न्यायिक व्याख्या के अनुसार होगा। परिवार के हर मतभेद को एक ही तरह का मामला समझकर निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए।
सुरक्षा आदेश और साझा घर में रहने का अधिकार
धारा 17 साझा गृहस्थी में रहने के अधिकार से संबंधित है। महिला के नाम संपत्ति का स्वामित्व या कोई हित नहीं होने पर भी कानून में निवास के अधिकार का प्रावधान है। इसे संपत्ति में अपने आप मालिकाना हिस्सा मिलने की घोषणा न समझें। निवास संबंधी सुरक्षा और संपत्ति का मालिकाना हक अलग प्रश्न हैं, जिन पर संबंधित कानून और आदेश लागू होते हैं।
धारा 18 के तहत मजिस्ट्रेट परिस्थितियों के अनुसार सुरक्षा आदेश दे सकता है। धारा 19 निवास संबंधी आदेशों से जुड़ी है, जिसमें बेदखली रोकने या उपयुक्त वैकल्पिक आवास अथवा किराये की व्यवस्था जैसे उपाय शामिल हो सकते हैं। महिला को किस तरह की सुरक्षा चाहिए, यह आवेदन में स्पष्ट करें। केवल शिकायत दर्ज हो जाने से सभी प्रकार के आदेश अपने आप जारी नहीं होते।
धारा 20 आर्थिक राहत, धारा 21 बच्चों की अस्थायी अभिरक्षा और धारा 22 नुकसान के लिए मुआवजे से संबंधित हैं। आर्थिक राहत में हिंसा से हुए खर्च और नुकसान का प्रश्न उठ सकता है। किसी निश्चित सरकारी रकम का वादा इस कानून में नहीं है। मजिस्ट्रेट सबूत, आवश्यकताओं और संबंधित प्रावधानों के अनुसार उचित राहत निर्धारित करता है।
धारा 12 में शिकायत कैसे करें और क्या तैयार रखें?
पीड़ित महिला, संरक्षण अधिकारी या उसकी ओर से कोई अन्य व्यक्ति धारा 12 के तहत आवेदन प्रस्तुत कर सकता है। संरक्षण अधिकारी घरेलू घटना रिपोर्ट तैयार करने, सहायता सेवाओं से जोड़ने और कानूनी प्रक्रिया समझाने में भूमिका निभाता है। स्थानीय महिला एवं बाल विकास विभाग से संबंधित अधिकारी और उपलब्ध सेवा प्रदाता की जानकारी लें। ऑनलाइन शिकायत मंच और न्यायालय में राहत के आवेदन की प्रक्रिया को अलग पहचानें।
तैयारी के लिए घटनाओं की तारीखवार सूची, संबंधित पते, घरेलू संबंध का विवरण, पहले से जारी आदेश और मांगी गई राहत लिखें। उपलब्ध संदेश, चिकित्सा रिकॉर्ड, खर्च के कागज और अन्य संबंधित दस्तावेज संभालें। यह व्यावहारिक तैयारी की सूची है, हर मामले की अनिवार्य दस्तावेज सूची नहीं। संरक्षण अधिकारी या विधिक सहायता संस्था से स्थानीय फॉर्म और आवश्यक संलग्नकों की पुष्टि करें।
सुनवाई कितने दिन में और सहायता कहां मिलेगी?
धारा 12 में पहली सुनवाई सामान्यतः आवेदन प्राप्त होने के तीन दिन से आगे नहीं रखने और पहली सुनवाई से 60 दिन के भीतर निस्तारण का प्रयास करने की बात है। यह हर मुकदमे में तय दिन पर अंतिम फैसला मिलने की गारंटी नहीं है। धारा 23 अंतरिम तथा उपयुक्त मामलों में एकपक्षीय आदेश की व्यवस्था करती है। तत्काल राहत की जरूरत हो तो आवेदन में उसके कारण स्पष्ट करें।
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के 11 फरवरी 2026 के आधिकारिक विवरण में महिला हेल्पलाइन 181, आपातकालीन सेवा 112 और नालसा विधिक सहायता 15100 दिए गए हैं। राष्ट्रीय महिला आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर शिकायत और सहायता की जानकारी भी है। आयोग की शिकायत प्रक्रिया को मजिस्ट्रेट के आदेश का विकल्प न मानें।
कानून का सरकारी राजपत्र में प्रकाशित पाठ मूल प्रावधानों का स्रोत है और मंत्रालय की वेबसाइट पर अधिनियम व नियम की सूची उपलब्ध है। यह लेख किसी नए संशोधन या नई अंतिम तारीख की घोषणा नहीं करता। अपने मामले में वर्तमान नियम, न्यायिक निर्देश और उपलब्ध स्थानीय सहायता की पुष्टि करके आवेदन करें।
संबंधित जानकारी: मुफ्त कानूनी सहायता की पात्रता, उपभोक्ता शिकायत की प्रक्रिया और सरकारी शिकायत का स्टेटस और अपील।








