वाराणसी: काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के चिकित्सा विज्ञान संस्थान के जैव रसायन विभाग में सोमवार, 2 नवंबर 2026 को एलसी एमएस जांच सुविधा का उद्घाटन हुआ। कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने इसकी शुरुआत की। लंका स्थित सर सुंदरलाल अस्पताल में आने वाले मरीजों और संस्थान के अलग अलग विभागों के शोधकर्ताओं के लिए यह सुविधा तैयार की गई है।

इसका इस्तेमाल नवजात शिशुओं और बच्चों में जन्मजात चयापचय तथा आनुवंशिक विकारों की पहचान में किया जा सकेगा। विटामिन, हार्मोन और अमीनो एसिड का विश्लेषण तथा शरीर में दवाओं के स्तर की निगरानी भी इसके बताए गए उपयोगों में शामिल हैं। इससे जुड़ी जानकारी अस्पताल आने वाले उन परिवारों के लिए प्रासंगिक है, जिन्हें ऐसी विशेष जांच लिखी गई है।

मरीज जांच के लिए निकलने से पहले संबंधित विभाग से नमूना जमा करने की व्यवस्था, शुल्क और रिपोर्ट मिलने के समय की पुष्टि कर लें। उद्घाटन की उपलब्ध जानकारी में इनका अलग कार्यक्रम नहीं दिया गया है। इसलिए सुविधा शुरू होने की खबर को हर समय सीधे नमूना जमा करने की अनुमति समझकर अस्पताल पहुंचना ठीक नहीं होगा।

नई सुविधा में क्या जांचा जा सकेगा

एलसी एमएस का पूरा नाम लिक्विड क्रोमैटोग्राफी मास स्पेक्ट्रोमेट्री है। इसमें नमूने का विश्लेषण दो चरणों में होता है। पहले चरण में मिश्रण में मौजूद अलग अलग अणुओं को पृथक किया जाता है। दूसरे चरण में उनकी पहचान और मात्रा का पता लगाया जाता है। विभाग के अनुसार, बहुत कम मात्रा में मौजूद रासायनिक और जैविक पदार्थों के विश्लेषण में भी यह व्यवस्था उपयोगी है।

जैव रसायन विभागाध्यक्ष प्रो. कमलेश एम. पलांडुरकर ने कार्यक्रम में इसके उपयोग समझाए। चिकित्सा अनुसंधान में जैव रसायन, आणविक जीव विज्ञान और औषधि विज्ञान जैसे क्षेत्रों को इससे मदद मिलने की बात कही गई। मरीजों से जुड़े नमूनों के विश्लेषण और अनुसंधान के लिए इसकी भूमिका बताई गई है, किसी एक जांच से सभी बीमारियों का पता लगने का दावा नहीं किया गया।

विभाग के वरिष्ठ आचार्य प्रो. देबब्रत दास ने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था केवल जैव रसायन विभाग के लिए नहीं है। चिकित्सा विज्ञान संस्थान के दूसरे विभाग भी इसका लाभ ले सकेंगे। इससे विभिन्न विभागों के बीच साझा अनुसंधान के लिए उपलब्ध संसाधन बढ़ेंगे। सुविधा कहां स्थापित है और उसका उपयोग किन विभागों के लिए है, इन दोनों बातों का फर्क मरीजों और शोधार्थियों के लिए जरूरी है।

मरीज और परिजन क्या करें

जिला प्रशासन की अस्पताल निर्देशिका में सर सुंदरलाल अस्पताल का पता लंका, वाराणसी और संपर्क नंबर 0542-2368547 दिया गया है। यह अस्पताल की सामान्य संपर्क जानकारी है। इसे नई प्रयोगशाला का अलग बुकिंग नंबर या जांच के लिए तय समय की सूचना नहीं समझें।

बाह्य रोगी परामर्श के लिए अस्पताल के आधिकारिक ओपीडी पोर्टल पर आम मरीजों की अस्पताल यात्रा और कर्मचारियों तथा विद्यार्थियों की अस्पताल यात्रा के अलग विकल्प दिखते हैं। आम मरीज अपनी श्रेणी वाला विकल्प देखें। पोर्टल पर पहले से बनी अपॉइंटमेंट को दोबारा प्रिंट करने की सुविधा भी अलग से उपलब्ध है।

ओपीडी अपॉइंटमेंट और नई प्रयोगशाला की जांच एक जैसी प्रक्रिया नहीं बताई गई है। पोर्टल पर अस्पताल अथवा डॉक्टर से जुड़ी पूछताछ और बुकिंग से जुड़ी पूछताछ के संपर्क अलग दिए गए हैं। नई सुविधा के लिए कोई अलग ऑनलाइन समय सूची उपलब्ध जानकारी में नहीं मिली। परिजन पहले यह स्पष्ट कर लें कि उन्हें परामर्श के लिए आना है या निर्धारित जांच का नमूना जमा करना है।

उद्घाटन में मरीजों की देखभाल और शोध पर जोर

कुलपति ने कार्यक्रम में मरीजों की देखभाल और अनुसंधान को साथ आगे बढ़ाने पर जोर दिया। उपलब्ध सुविधाओं का अधिकतम उपयोग करने और संस्थान के विभागों में जरूरी संसाधन विकसित करने की बात रखी गई। संस्थान के निदेशक प्रो. एस. एन. शंखवार और चिकित्सा संकाय प्रमुख प्रो. संजय गुप्ता भी कार्यक्रम में शामिल थे।

दो स्थानीय रिपोर्टों में उद्घाटन की तारीख, स्थान, कुलपति की मौजूदगी और सुविधा के मुख्य उपयोगों का मिलान किया गया है। विश्वविद्यालय के अस्पताल पृष्ठ और आधिकारिक पोर्टल से अस्पताल तथा ओपीडी की जानकारी अलग जांची गई है। जांच की दर या रिपोर्ट मिलने की निश्चित अवधि का दावा इस खबर में नहीं किया जा रहा है।

अस्पताल से जुड़ी पिछली खबरों में विशेषज्ञ ओपीडी की समय सारणी, दंत चिकित्सा कार्यशाला और हृदय चिकित्सा केंद्र का प्रस्ताव शामिल हैं। ये अलग विषय हैं। नई प्रयोगशाला के बारे में अगली उपयोगी जानकारी नमूना लेने की व्यवस्था और मरीजों के लिए जारी होने वाला विभागीय निर्देश होगा।