वाराणसी: ललिता घाट पर शनिवार, 31 अक्टूबर 2026 को अंतरराष्ट्रीय चित्रकला और छायाचित्र कार्यशाला शुरू हुई। गंगा महासभा और उत्तर प्रदेश राज्य ललित कला अकादमी के इस आयोजन में देश और विदेश के करीब 50 कलाकार शामिल हैं। यहां तैयार कृतियों की प्रदर्शनी 3 से 5 नवंबर तक रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में लगाने का कार्यक्रम है। कला देखने की योजना बना रहे लोगों के लिए कार्यशाला और प्रदर्शनी की जगह तथा तारीख अलग-अलग हैं।
कार्यशाला श्रीकाशी विश्वनाथ धाम के गंगा द्वार की ओर ललिता घाट पर हो रही है। तीन दिन का शिविर 2 नवंबर तक चलेगा। इसके बाद कृतियां सिगरा स्थित रुद्राक्ष केंद्र की सिंजो आबे कला दीर्घा में दिखाई जाएंगी। यानी घाट पर कलाकारों के काम करने का चरण और दीर्घा में तैयार चित्रों की प्रदर्शनी, आयोजन के दो अलग हिस्से हैं।
दर्शक निकलने से पहले संबंधित दिन का प्रवेश समय और व्यवस्था पक्की कर लें। उपलब्ध कार्यक्रम विवरण में प्रदर्शनी के रोज खुलने और बंद होने का समय, टिकट या पंजीकरण की शर्त नहीं दी गई है। इसलिए केवल तारीख देखकर किसी भी समय प्रवेश मिलने का अनुमान लगाना ठीक नहीं होगा।
कौन शामिल है और क्या बन रहा है
भारत के अलग-अलग राज्यों के कलाकारों के साथ मॉरीशस, श्रीलंका और बांग्लादेश के प्रतिभागी भी शिविर में शामिल हैं। घोषित संख्या करीब 50 है। चित्रों के विषय में उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर, काशी का जीवन, परंपराएं और आध्यात्मिक स्थल रखे गए हैं। कलाकार इन्हें अपने अनुभव और चित्रकारी की शैली में प्रस्तुत कर रहे हैं।
कार्यशाला का विषय राम, कृष्ण और शिव से जुड़ी उत्तर प्रदेश की विरासत के संरक्षण और संवर्धन पर केंद्रित है। उद्घाटन के दिन कलाकारों ने गंगा और इन सांस्कृतिक प्रतीकों को रंगों में उतारा। ऐतिहासिक मंदिर, तीर्थ और स्थानीय परंपराएं भी उनकी चित्रकारी का हिस्सा हैं। काशी विश्वनाथ धाम और अयोध्या के राम मंदिर से जुड़े दृश्य विषयों में शामिल किए गए हैं।
उद्घाटन में अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती, गंगा महासभा के संगठन महामंत्री गोविंद शर्मा और राज्य ललित कला अकादमी के अध्यक्ष सुनील विश्वकर्मा शामिल हुए। आयोजन की खबरों के मुताबिक, तीनों ने दीप प्रज्वलन कर कार्यशाला की शुरुआत की। शिविर को संस्कृति संसद 2026 की सांस्कृतिक कार्यक्रम श्रृंखला से जोड़ा गया है।
पद्मश्री सम्मानित कलाकार दुलारी देवी, श्याम शर्मा और अद्वैत गणनायक भी उद्घाटन में मौजूद रहे। उन्होंने चित्र बनाकर अपनी बात और भाव को रंगों में ढालने के तरीके समझाए। इस दौरान कई विद्यालयों के विद्यार्थी भी उपस्थित थे। इस तरह उद्घाटन में तैयार चित्र देखने के साथ चित्रकारी की प्रक्रिया समझने का अवसर भी मिला।
दर्शक अपनी योजना कैसे बनाएं
- कार्यशाला: ललिता घाट, श्रीकाशी विश्वनाथ धाम के गंगा द्वार की ओर, 31 अक्टूबर से 2 नवंबर।
- प्रदर्शनी: रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर की सिंजो आबे कला दीर्घा, 3 से 5 नवंबर।
- विषय: उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत।
- दैनिक प्रवेश समय और टिकट की शर्त: उपलब्ध कार्यक्रम विवरण में स्पष्ट नहीं।
रुद्राक्ष केंद्र का आधिकारिक पता सिगरा चौराहा रोड, छित्तूपुर, सिगरा है। केंद्र की वेबसाइट पर संपर्क संबंधी जानकारी भी उपलब्ध है। प्रदर्शनी के लिए जाने वाले लोग आयोजन का नाम और सिंजो आबे कला दीर्घा का उल्लेख करके व्यवस्था की पुष्टि कर सकते हैं। केंद्र का पता अपने आप प्रदर्शनी की प्रवेश अनुमति या समय की पुष्टि नहीं करता।
परिवार या विद्यार्थियों के समूह के साथ जाने वालों के लिए खास बात यह है कि शिविर में तैयार कृतियां प्रदर्शनी का आधार होंगी। घाट पर चल रहे काम को देखने और बाद में दीर्घा जाने की योजना अलग बनाएं। उपलब्ध विवरण में किसी खुले प्रशिक्षण पाठ्यक्रम, नई कलाकार भर्ती या आम दर्शकों के लिए कार्यशाला पंजीकरण की घोषणा नहीं है।
आयोजक संस्था की भूमिका
राज्य ललित कला अकादमी उत्तर प्रदेश के संस्कृति विभाग के अंतर्गत स्वायत्त संस्था है। उसके आधिकारिक परिचय के अनुसार स्थापना 8 फरवरी 1962 को हुई थी। चित्रकला, मूर्तिकला और संबंधित कलाओं को प्रोत्साहन देना, कलाकारों और कला संस्थाओं के बीच सहयोग बढ़ाना तथा प्रदर्शनियां आयोजित करना उसके उद्देश्यों में शामिल है। मौजूदा शिविर में वरिष्ठ कलाकारों और विद्यार्थियों की मौजूदगी इसी कलात्मक संवाद से जुड़ी है।
शहर के अन्य कला कार्यक्रमों की जानकारी अलग रिपोर्टों में है। इशी गैलरी की सिटी लाइन्स प्रदर्शनी और न्यू असि घाट के संगीत और कथक कार्यक्रम इसके हिस्से नहीं हैं। बाहर निकलने से पहले पहले जारी मौसम चेतावनी की पृष्ठभूमि के साथ मौसम विभाग का नया पूर्वानुमान भी देख लें। पुरानी चेतावनी को नवंबर की यात्रा का ताजा मौसम विवरण न मानें।








