वाराणसी: कलेक्ट्रेट में सोमवार, 2 नवंबर 2026 को आयोजित जनता दर्शन में जिलाधिकारी ने लोगों की समस्याएं सुनीं और संबंधित अधिकारियों को समय पर, गुणवत्तापूर्ण तथा पारदर्शी निस्तारण के निर्देश दिए। शिकायत लेकर पहुंचने वाले लोगों के लिए अगला जरूरी काम अपने प्रकरण पर हुई कार्रवाई की जानकारी रखना है। जिला प्रशासन का शिकायत सेवा पृष्ठ इसके लिए जनसुनवाई समाधान पोर्टल का रास्ता बताता है।

कलेक्ट्रेट की सुनवाई के बारे में जिलाधिकारी के आधिकारिक संदेश में कहा गया कि जनसमस्याओं के समाधान में किसी स्तर पर लापरवाही न हो। संदेश सोमवार दोपहर 1 बजकर 3 मिनट पर भारतीय समय के अनुसार प्रकाशित हुआ। उसमें सुनवाई में आए लोगों या निस्तारित शिकायतों की कोई कुल संख्या नहीं दी गई है।

जिन लोगों की शिकायत पोर्टल पर दर्ज है, वे उसकी संदर्भ संख्या संभालकर रखें। शिकायत की स्थिति देखने, तय समय में कार्रवाई न होने पर अनुस्मारक भेजने और निस्तारण की गुणवत्ता पर प्रतिक्रिया देने के अलग विकल्प उपलब्ध हैं। अपनी परेशानी दोबारा बताने से पहले पुराने प्रकरण पर दर्ज कार्रवाई पढ़ना उपयोगी रहेगा।

जनता दर्शन में क्या निर्देश दिए गए

जिलाधिकारी के आधिकारिक संदेश के अनुसार कलेक्ट्रेट में आमजन की समस्याओं और शिकायतों को सुना गया। अधिकारियों से हर प्रकरण के निस्तारण में समय, गुणवत्ता और पारदर्शिता का ध्यान रखने को कहा गया। यह निर्देश शिकायतों पर कार्रवाई करने वाले संबंधित अधिकारियों के लिए है।

सुनवाई का संदेश किसी एक विभाग की नई योजना या आवेदन की अंतिम तारीख की घोषणा नहीं करता। इसमें अगले जनता दर्शन की तारीख या आने का समय भी नहीं बताया गया है। इसलिए सोमवार के इस संदेश को किसी आगामी सुनवाई का कार्यक्रम मानकर यात्रा की योजना न बनाएं।

जिला प्रशासन के शिकायत दर्ज करने संबंधी सेवा पृष्ठ पर लोक शिकायत अनुभाग का स्थान कलेक्ट्रेट बताया गया है। उसी पृष्ठ से राज्य के शिकायत पोर्टल का पता मिलता है। यह व्यवस्था शिकायत दर्ज करने के साथ उसकी निगरानी और संबंधित कार्यालय तक पहुंच बनाने का माध्यम भी देती है।

अपनी शिकायत की स्थिति कैसे देखें

जनसुनवाई समाधान पोर्टल पर नागरिकों के लिए शिकायत पंजीकरण और शिकायत की स्थिति के विकल्प अलग हैं। पंजीकरण में एक बार इस्तेमाल होने वाले सत्यापन कोड की सुविधा दी गई है। स्थिति वाले पृष्ठ पर शिकायत संख्या, पंजीकृत नंबर और सुरक्षा कोड मांगा जाता है। इसके बाद सत्यापन कोड का विकल्प भी है।

पोर्टल के प्रश्नोत्तर के अनुसार पंजीकरण के बाद 14 अंकों की एक विशिष्ट संदर्भ संख्या मिलती है। इस संख्या से प्रकरण की स्थिति पता की जा सकती है। शिकायत की तारीख और संदर्भ संख्या साथ रखने से किसी पुराने मामले तथा नए आवेदन के बीच भ्रम कम होगा। स्थिति वाले पृष्ठ पर यह सीमा भी लिखी है कि निस्तारित संदर्भों का विवरण केवल तीन महीने पहले तक का देखा जा सकेगा।

अगर निर्धारित अवधि में समाधान नहीं हुआ है तो पोर्टल पर अनुस्मारक भेजने का विकल्प है। इसका इस्तेमाल उसी दर्ज प्रकरण में देरी की ओर ध्यान दिलाने के लिए किया जा सकता है। सोमवार के संदेश में सभी शिकायतों के लिए दिनों की कोई एक समान समयसीमा घोषित नहीं की गई है।

निस्तारण दर्ज होने पर भी नागरिक अपनी प्रतिक्रिया दे सकते हैं। पोर्टल बताता है कि इस प्रतिक्रिया का मूल्यांकन उच्च अधिकारी करते हैं और निस्तारित संदर्भ को दोबारा सक्रिय किया जा सकता है। इसीलिए केवल निस्तारित लिखा देखकर रुकने के बजाय संबंधित कार्रवाई और अपनी वास्तविक समस्या की स्थिति का मिलान करें।

कौन से मामले इस शिकायत व्यवस्था में नहीं आते

पोर्टल शिकायत दर्ज करने से पहले कुछ विषयों को जनशिकायत की श्रेणी से बाहर बताता है। इनमें सूचना के अधिकार से जुड़े मामले, अदालत में विचाराधीन प्रकरण, सुझाव तथा आर्थिक सहायता या नौकरी दिए जाने की मांग शामिल हैं। इन विषयों के लिए संबंधित प्रक्रिया देखना जरूरी है।

सरकारी कर्मचारियों के सेवा संबंधी मामलों, जिनमें स्थानांतरण भी शामिल है, पर भी शर्त दी गई है। जब तक विभाग में उपलब्ध विकल्पों का इस्तेमाल न कर लिया गया हो, ऐसे मामले इस व्यवस्था में जनशिकायत नहीं माने जाते। आवेदन भेजने से पहले पोर्टल पर दी गई सूची पढ़ लें।

  • दर्ज शिकायत की संदर्भ संख्या सुरक्षित रखें।
  • स्थिति वाले विकल्प में कार्रवाई का विवरण देखें।
  • तय समय बीतने पर अनुस्मारक का विकल्प देखें।
  • निस्तारण की गुणवत्ता पर अपनी प्रतिक्रिया दें।

स्थानीय सेवाओं से जुड़े अलग मामलों की पृष्ठभूमि के लिए सिगरा में नगर निगम की शिकायत सुनवाई, साकेत नगर में सीवर कार्य के निरीक्षण और पेयजल तथा सीवर परियोजनाओं की मंजूरी संबंधी पुराने विवरण पढ़ सकते हैं। कलेक्ट्रेट के सोमवार के संदेश में उन मामलों के निस्तारण का अलग परिणाम घोषित नहीं किया गया है।