भारतीय नर्सिंग परिषद ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के नर्सिंग पाठ्यक्रमों में प्रवेश की आखिरी तारीख 31 अक्टूबर से बढ़ाकर 15 नवंबर कर दी है। 30 अक्टूबर के आदेश में एएनएम, जीएनएम, बीएससी नर्सिंग, पोस्ट बेसिक बीएससी, एमएससी, पीएचडी, पोस्ट बेसिक डिप्लोमा और नर्स प्रैक्टिशनर कार्यक्रम शामिल हैं। संस्थान मंजूर वार्षिक क्षमता से अधिक दाखिले नहीं दे सकते।
बीएससी नर्सिंग में प्रवेश की तारीख से बैच भी तय होगा। 31 अक्टूबर तक दाखिला लेने वाले विद्यार्थी नियमित या सम बैच में रहेंगे। एक से 15 नवंबर के बीच प्रवेश पाने वालों को अनियमित या विषम बैच में रखा जाएगा। दोनों बैच की परीक्षाएं अलग होंगी। विश्वविद्यालयों को परीक्षा में बैठने की अनुमति देने से पहले संबंधित सेमेस्टर की निर्धारित आवश्यकताएं पूरी करानी होंगी।
आगे समय बढ़ाने के अनुरोध स्वीकार नहीं होंगे। राज्य परीक्षा बोर्ड, परिषद और विश्वविद्यालय प्रवेश के नियमों का पालन सुनिश्चित करेंगे। उल्लंघन होने पर संबंधित संस्थान या उसके प्रबंधन के खिलाफ लागू नियमों के तहत कार्रवाई का प्रावधान बताया गया है।
प्रवेश संबंधी दूसरी सूचना
इसी दिन जारी एक दूसरी अधिसूचना खाली बीएससी नर्सिंग सीटों के लिए प्रवेश परीक्षा की पात्रता से जुड़ी है। विभिन्न राज्यों ने परिषद से न्यूनतम क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल घटाने का अनुरोध किया था। परिषद ने सत्र 2026-27 की कॉमन एंट्रेंस परीक्षा में शामिल हुए अभ्यर्थियों के लिए यह सीमा घटाकर रिक्त सीटें भरने पर अनापत्ति दी है।
यह अनुमति किसी एक नए पर्सेंटाइल की देशभर में घोषणा नहीं है। अधिसूचना में सामान्य या आरक्षित वर्ग के लिए नई संख्या नहीं दी गई है। इसमें नए आवेदन, काउंसलिंग या सीट आवंटन का अलग कार्यक्रम भी नहीं बताया गया। इसलिए इस आदेश को किसी विशेष राज्य में आवेदन प्रक्रिया फिर खुल जाने या किसी अभ्यर्थी का प्रवेश तय हो जाने की सूचना नहीं समझना चाहिए।
छूट का दायरा प्रवेश परीक्षा के क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल तक है। परिषद ने बीएससी नर्सिंग के अन्य प्रवेश नियमों का पालन जारी रखने को कहा है और अपने दिशानिर्देश का लिंक दिया है। परीक्षा दिए बिना सीधे दाखिले की अनुमति इस पत्र में नहीं है।
अभ्यर्थियों के लिए शर्तें
बारहवीं के अंकों का प्रतिशत और प्रवेश परीक्षा का पर्सेंटाइल अलग शर्तें हैं। परिषद के जिस दिशानिर्देश का नई अधिसूचना में हवाला है, उसमें विज्ञान से बारहवीं उत्तीर्ण अभ्यर्थी के भौतिकी, रसायन और जीव विज्ञान में मिलाकर कम से कम 45 प्रतिशत अंक तथा अंग्रेजी में अलग से उत्तीर्ण होना बताया गया है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए पीसीबी की सीमा 40 प्रतिशत है।
उसी दस्तावेज में विश्वविद्यालय या राज्य सरकार की प्रवेश परीक्षा के आधार पर मेरिट बनाने का प्रावधान है। नर्सिंग एप्टीट्यूड, भौतिकी, रसायन, जीव विज्ञान और अंग्रेजी के लिए 20-20 अंक दिए गए हैं। उसमें सामान्य वर्ग का मूल क्वालिफाइंग मानक 50वां पर्सेंटाइल तथा एससी, एसटी और ओबीसी का 40वां पर्सेंटाइल दर्ज है। ये दस्तावेज के पुराने आधार मानक हैं, 30 अक्टूबर को घोषित कोई नया घटा हुआ कटऑफ नहीं।
दिशानिर्देश में राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त ओपन स्कूल तथा राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान से विज्ञान और अंग्रेजी पढ़ने वाले अभ्यर्थियों की पात्रता भी दर्ज है। अभ्यर्थी का चिकित्सकीय रूप से स्वस्थ होना आवश्यक बताया गया है। इससे स्पष्ट है कि प्रवेश परीक्षा संबंधी राहत को बाकी शैक्षणिक शर्तों से अलग पढ़ना होगा।
परिषद की पाठ्यक्रम सूची इन कार्यक्रमों की अवधि भी अलग बताती है। बेसिक बीएससी नर्सिंग चार वर्ष का कार्यक्रम है। पोस्ट बेसिक बीएससी का नियमित पाठ्यक्रम दो वर्ष और दूरस्थ माध्यम वाला तीन वर्ष है, जबकि एमएससी की अवधि दो वर्ष है। एएनएम दो वर्ष और जीएनएम तीन वर्ष का पाठ्यक्रम है। दोनों की परीक्षा नर्सिंग परीक्षा बोर्ड लेता है, जबकि बीएससी की विश्वविद्यालय। इसलिए प्रवेश की एक साझा अंतिम तारीख होने का मतलब सभी पाठ्यक्रमों का एक जैसा प्रशिक्षण या परीक्षा ढांचा होना नहीं है।
भारतीय नर्सिंग परिषद स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन स्वायत्त निकाय है। उसके आधिकारिक परिचय के अनुसार परिषद का काम नर्सों, मिडवाइफ और हेल्थ विजिटर के प्रशिक्षण में समान मानक स्थापित करना है। नए दोनों आदेश परिषद की आधिकारिक वेबसाइट के विशेष सूचना खंड में उपलब्ध हैं।
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