एक्स-रे, सीटी स्कैन और सोनोग्राफी जैसे जांच विभागों में काम करने के लिए दो साल का डिप्लोमा करने वाले छात्र अब देशभर में एक जैसा पाठ्यक्रम पढ़ेंगे। राष्ट्रीय संबद्ध और स्वास्थ्य सेवा व्यवसाय आयोग (NCAHP) ने मेडिकल रेडियोलॉजी और इमेजिंग टेक्नोलॉजी में डिप्लोमा, यानी D.MRIT, का दक्षता आधारित पाठ्यक्रम अधिसूचित कर दिया है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने 7 अक्टूबर को आयोग के इन फैसलों की जानकारी दी।
यह पाठ्यक्रम 30 सितंबर 2026 को 'एक राष्ट्र, एक पाठ्यक्रम' व्यवस्था के तहत जारी हुआ। D.MRIT कराने वाले या कराने की योजना बना रहे सभी संस्थानों को इसे शैक्षणिक सत्र 2027-28 से अनिवार्य रूप से अपनाना होगा। जो संस्थान चाहें, वे इसी सत्र 2026-27 से भी इसे लागू कर सकते हैं।
कोर्स दो साल का है और इसमें दाखिले के लिए 12वीं विज्ञान वर्ग में भौतिकी, रसायन और जीव विज्ञान (PCB) के साथ किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से पास होना जरूरी है। पढ़ाई में छह महीने की इंटर्नशिप भी शामिल है, जिसमें छात्र निगरानी में अस्पताल के असली माहौल में मरीजों की देखभाल, रेडिएशन से सुरक्षा के तरीके और जांच की मशीनें चलाना सीखेंगे।
आयोग के मुताबिक पाठ्यक्रम इस तरह बनाया गया है कि डिप्लोमा पूरा करने वाले एक्स-रे, सीटी स्कैन, सोनोग्राफी, मैमोग्राफी और फ्लोरोस्कोपी जैसी जांच सेवाओं में काम कर सकें और मरीज की सुरक्षा, रेडिएशन से बचाव और गुणवत्ता के तय मानकों का पालन करें। सरकार ने कहा है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, अस्पतालों और डायग्नोस्टिक सेंटरों में ऐसे प्रशिक्षित लोगों की जरूरत बढ़ रही है और छात्र भी डिप्लोमा स्तर का कोर्स मांग रहे थे।
इस क्षेत्र में डिग्री का रास्ता पहले से तय हो चुका है। आयोग ने बैचलर (B.MRIT) और मास्टर (M.MRIT) के पाठ्यक्रम 24 अप्रैल 2025 को जारी किए थे, जो सत्र 2026-27 से लागू हैं। अब डिप्लोमा जुड़ने से 12वीं के बाद डिप्लोमा, डिग्री और फिर मास्टर तक की एक सीढ़ी बन गई है। आयोग अब तक अलग अलग संबद्ध स्वास्थ्य पेशों के 20 दक्षता आधारित पाठ्यक्रम जारी कर चुका है। इसी क्षेत्र में UGC की डिग्री सूची में हालिया बदलाव से सामान्य M.PT और M.OT बंद हुए हैं।
दूसरा बड़ा बदलाव पंजीकरण का है। 15 सितंबर 2026 को राजपत्र में छपे संबद्ध और स्वास्थ्य सेवा व्यवसायी पंजीकरण विनियम, 2026 के तहत अब इन पेशेवरों के नाम राज्य रजिस्टर और केंद्रीय रजिस्टर में दर्ज होंगे। ऑनलाइन प्रणाली से हर पेशेवर को विशिष्ट पहचान यानी UID संख्या मिलेगी। कोई भी व्यक्ति मान्यता प्राप्त संबद्ध स्वास्थ्य पेशे में प्रैक्टिस तभी कर सकेगा जब उसका पंजीकरण हो चुका हो, और इसके लिए मान्यता प्राप्त मूल योग्यता होना जरूरी है।
पंजीकरण पांच साल के लिए वैध रहेगा। नवीनीकरण के लिए कंटीन्यूइंग प्रोफेशनल डेवलपमेंट (CPD) की शर्तें पूरी करनी होंगी, जो मंजूर ऑनलाइन और ऑफलाइन तरीकों से की जा सकेंगी। राज्य और केंद्रीय रजिस्टर आपस में तुरंत सिंक होंगे और आम लोग आयोग व राज्य परिषदों की वेबसाइट पर किसी भी पेशेवर का पंजीकरण जांच सकेंगे। प्रमाणपत्र डिजिटल रूप में भी मिलेगा, जिस पर UID और सुरक्षित QR कोड होगा।
जिन राज्यों में अभी काम करने वाली राज्य परिषद नहीं है, वहां के पेशेवर सीधे केंद्रीय रजिस्टर में पंजीकरण करा सकेंगे। मान्यता प्राप्त संस्थानों में पढ़ रहे जो छात्र इंटर्नशिप या क्लिनिकल प्रशिक्षण कर रहे हैं, उन्हें अंतरिम पंजीकरण मिलेगा। इसकी प्रक्रिया संस्थान शुरू करेगा, पंजीकरण राज्य परिषद देगी और इसके लिए कोई फीस नहीं लगेगी।
विदेश से पढ़ाई करके लौटे भारतीय नागरिकों के लिए भी रास्ता तय किया गया है। उनकी योग्यता आयोग से मान्य हो या तय क्रेडेंशियल समकक्षता मूल्यांकन पूरा हो, और जहां लागू हो वहां एग्जिट परीक्षा पास हो, तो वे पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकेंगे। जो लोग अभी बिना तय योग्यता के इस क्षेत्र में काम कर रहे हैं, उनके लिए आयोग अस्थायी पंजीकरण और ब्रिज कोर्स का विकल्प लाने पर काम कर रहा है।
संस्थानों की जांच के लिए स्वायत्त बोर्ड विनियम, 2026 भी अधिसूचित हुए हैं। हर राज्य परिषद के तहत 10 से 20 सदस्यों वाले बोर्ड बनेंगे, जिनमें आकलन और रेटिंग बोर्ड कॉलेजों का निरीक्षण करेगा और उनकी रेटिंग राज्य परिषद की वेबसाइट पर सार्वजनिक करेगा। जहां राज्य परिषद काम नहीं कर रही, वहां यह काम 10 से 30 सदस्यों वाली केंद्रीय आकलन समिति करेगी। PCB से 12वीं करने वाले जो छात्र NEET-UG 2026 के स्ट्रे वैकेंसी राउंड के बाद दूसरे स्वास्थ्य कोर्स देख रहे हैं, उनके लिए यह रेटिंग सार्वजनिक होने के बाद दाखिले से पहले कॉलेज परखने का एक जरिया बनेगी।





