इग्नू असाइनमेंट का फ्रंट पेज बनाते समय अपने पाठ्यक्रम की आधिकारिक प्रश्न पुस्तिका में दिया प्रारूप अपनाएं। केवल इंटरनेट से मिला सजावटी कवर छाप लेना पर्याप्त नहीं है। नाम, नामांकन संख्या, पाठ्यक्रम कोड, पाठ्यक्रम का शीर्षक और प्रवेश सत्र जैसे विवरण सही होने चाहिए। विश्वविद्यालय की अलग पुस्तिकाओं में मांगे गए विवरण एक जैसे नहीं हैं। इसलिए नीचे दी गई सूची को तैयारी की मदद समझें और अंतिम पन्ना अपनी संबंधित पुस्तिका से मिलाकर बनाएं।
यह मार्गदर्शिका इग्नू की दो आधिकारिक असाइनमेंट पुस्तिकाओं पर आधारित है। पहली भूस्थानिक विश्लेषण और मॉडलिंग के पाठ्यक्रम एमजीवाई 006 की जनवरी और जुलाई 2026 चक्र की पुस्तिका है। दूसरी कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व कार्यक्रम के एमईडीएस 055 की जुलाई 2025 और जनवरी 2026 सत्र वाली पुस्तिका है। यहां उनकी हिदायतों की तुलना की गई है, किसी नए सार्वभौमिक प्रारूप या नई जमा समयसीमा की घोषणा नहीं की जा रही।
| जानकारी | क्या मिलाएं |
|---|---|
| विद्यार्थी की पहचान | नाम और नामांकन संख्या |
| शैक्षणिक पहचान | कार्यक्रम, पाठ्यक्रम और असाइनमेंट कोड |
| सत्र | पुस्तिका पर लिखा लागू प्रवेश चक्र |
| जमा केंद्र | आवंटित अध्ययन केंद्र और मांगा गया क्षेत्रीय केंद्र विवरण |
इग्नू असाइनमेंट फ्रंट पेज पर क्या लिखें?
एमजीवाई 006 की आधिकारिक पुस्तिका में पहले पृष्ठ पर पाठ्यक्रम कोड, पाठ्यक्रम का शीर्षक, असाइनमेंट कोड, अध्ययन केंद्र का नाम और जमा करने की तारीख मांगी गई है। नामांकन संख्या, नाम और पूरा पता पहले पृष्ठ के ऊपर दाहिनी ओर लिखने का निर्देश है। पाठ्यक्रम का शीर्षक, असाइनमेंट संख्या और अध्ययन केंद्र का नाम पन्ने के बीच वाले हिस्से में रखने को भी कहा गया है।
उसी पुस्तिका में दिए नमूने में प्रवेश चक्र, कार्यक्रम कोड, क्षेत्रीय केंद्र कोड, संपर्क संख्या और पता भरने की जगह भी है। इसमें साफ निर्देश है कि प्रारूप का पालन नहीं होने पर उत्तरपुस्तिका वापस की जा सकती है और फिर से जमा करने को कहा जा सकता है। इस विशेष पाठ्यक्रम के विद्यार्थी के लिए अपना नया डिजाइन बनाने से ज्यादा उपयोगी काम उस नमूने के प्रत्येक खाने को सही भरना है।
इसके मुकाबले एमईडीएस 055 की आधिकारिक पुस्तिका पहले पृष्ठ पर नाम और पूरा पता, नामांकन संख्या, प्रवेश सत्र, पाठ्यक्रम कोड, पाठ्यक्रम शीर्षक और क्षेत्रीय केंद्र मांगती है। यह अंतर छोटा दिखाई दे सकता है, लेकिन इसी से पता चलता है कि एक पाठ्यक्रम की पूरी सूची को दूसरे कार्यक्रम के लिए अनिवार्य बताना ठीक नहीं होगा। विद्यार्थी की अपनी पुस्तिका और कार्यक्रम मार्गदर्शिका अंतिम जांच का आधार हैं।
कार्यक्रम कोड और पाठ्यक्रम कोड में अंतर कैसे समझें?
कार्यक्रम कोड उस डिग्री या डिप्लोमा की पहचान करता है जिसमें विद्यार्थी पंजीकृत है। पाठ्यक्रम कोड उस विशेष विषय की पहचान है जिसके उत्तर लिखे जा रहे हैं। उदाहरण के लिए एमजीवाई 006 पुस्तिका में संबंधित कार्यक्रमों और उसके अलग विषय का उल्लेख मिलता है। फ्रंट पेज पर दोनों खाने दिए हों तो उनमें एक ही जानकारी दो बार भरने के बजाय सही कार्यक्रम और सही विषय का विवरण अलग लिखें।
असाइनमेंट कोड को भी प्रश्न पुस्तिका से देखकर उतारें। केवल विषय का नाम पहचान लेना पर्याप्त जांच नहीं है। एक विद्यार्थी के पास पुरानी डाउनलोड की हुई फाइल और वर्तमान सत्र की दूसरी फाइल हो सकती है। लिखना शुरू करने से पहले पुस्तिका का सत्र, पाठ्यक्रम कोड और प्रश्न मिलाना बाद में पूरा काम बदलने की परेशानी कम करता है। कवर पर नया सत्र लिख देने से पुराने प्रश्न नए असाइनमेंट नहीं बन जाते।
हाथ से लिखना, कागज और उत्तरों का क्रम
एमजीवाई 006 पुस्तिका ए चार आकार का कागज इस्तेमाल करने और केवल हस्तलिखित उत्तर जमा करने को कहती है। टाइप या प्रिंट किए गए उत्तर स्वीकार या मूल्यांकित नहीं किए जाने की बात उसमें लिखी है। पृष्ठों को सावधानी से क्रमांक देकर बांधने, हर उत्तर के साथ प्रश्न संख्या लिखने और अपने शब्दों में उत्तर देने के निर्देश भी हैं। यह केवल फ्रंट पेज का काम नहीं, पूरी उत्तरपुस्तिका तैयार करने का नियम है।
एमईडीएस 055 की पुस्तिका भी अपने हाथ से लिखे उत्तर मांगती है। वह सादा या लाइन वाला ए चार कागज, दोनों तरफ लेखन, हाशिया और पाठ्यक्रम के अनुसार पन्ने बांधने या स्टेपल करने की बात करती है। दोनों स्रोत पढ़ने से यह व्यावहारिक सीख मिलती है कि सामग्री की तैयारी और पन्नों की व्यवस्था एक साथ जांचनी चाहिए। अच्छी सजावट अधूरे प्रश्नों या गलत पाठ्यक्रम की भरपाई नहीं करती।
उत्तर अपने शब्दों में बनाने के लिए पहले संबंधित अध्ययन सामग्री पढ़ें, फिर प्रत्येक प्रश्न के मुख्य बिंदु लिखें। एमईडीएस 055 के निर्देश बिंदुओं को तार्किक क्रम में रखने और उत्तरों में स्पष्ट संबंध बनाने पर जोर देते हैं। किसी दूसरे पाठ्यक्रम की शब्द सीमा को अपने विषय पर लागू न करें। अपने प्रश्नों के अंक, शब्द सीमा और निर्देश उसी पुस्तिका से देखें जिसके लिए उत्तर तैयार हो रहे हैं।
असाइनमेंट कहां जमा करें और क्या संभालकर रखें?
दोनों पुस्तिकाएं आवंटित अध्ययन केंद्र में असाइनमेंट जमा करने को कहती हैं। इसलिए किसी अनजान वेबसाइट पर फाइल चढ़ाने को विश्वविद्यालय की सामान्य जमा प्रक्रिया न मानें। यदि आपके कार्यक्रम या केंद्र की वर्तमान आधिकारिक सूचना में अलग प्रक्रिया है, तो उस सूचना का पाठ्यक्रम और सत्र ध्यान से मिलाएं। यहां उद्धृत पुस्तिकाओं से सभी विद्यार्थियों के लिए एक ही ऑनलाइन अपलोड व्यवस्था की पुष्टि नहीं होती।
एमजीवाई 006 की पुस्तिका जमा करने से पहले उत्तरों की प्रति रखने को कहती है। एमईडीएस 055 में स्कैन प्रति तब तक सुरक्षित रखने की हिदायत है जब तक अंक ग्रेड कार्ड में दिखाई न दें। अपनी प्रति में फ्रंट पेज भी शामिल रखें ताकि बाद में पहचान संबंधी विवरण जांचे जा सकें। इसका अर्थ यह नहीं कि प्रति रखना जमा करने की जगह ले लेता है, मूल प्रक्रिया समय पर पूरी करनी होती है।
पुस्तिकाओं में पुराने सत्रों की मूल जमा तारीखें भी हैं और विस्तार के लिए विश्वविद्यालय की वेबसाइट देखने को कहा गया है। इसलिए उन तारीखों को वर्तमान खुली समयसीमा मानकर यहां नहीं दोहराया गया है। अंतिम जांच में अपने सत्र की वर्तमान सूचना, सही पाठ्यक्रम, नामांकन संख्या और पूरा उत्तर क्रम देखें। संबंधित मदद के लिए हमारा इग्नू ग्रेड कार्ड और असाइनमेंट अंकों का मार्गदर्शन, टर्म एंड परिणाम की जानकारी और इग्नू के एक वर्षीय स्नातकोत्तर कार्यक्रमों का विवरण भी पढ़ सकते हैं।








