डिस्टेंस या ऑनलाइन पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए डीईबी आईडी बनाने का आधिकारिक रास्ता यूजीसी के दूरस्थ शिक्षा ब्यूरो का पोर्टल है। इसके लिए पहले एबीसी आईडी चाहिए, जिसे डिजिलॉकर खाते से बनाया जा सकता है। डीईबी के सवाल जवाब पृष्ठ के अनुसार, एबीसी आईडी के बिना डीईबी आईडी नहीं बन सकती और संबंधित ओडीएल या ऑनलाइन कार्यक्रम में प्रवेश के लिए वैध डीईबी आईडी जरूरी है।

दोनों पहचान संख्याओं का काम अलग है। एबीसी आईडी पहले से होने का मतलब यह नहीं कि डीईबी आईडी भी अपने आप बन गई। यूजीसी डीईबी के आधिकारिक सवाल जवाब के अनुसार, इस व्यवस्था का उद्देश्य विद्यार्थी को आयोग से मान्य संस्थान और स्वीकृत कार्यक्रम में प्रवेश लेने में मदद करना है। इसे प्रवेश मिलने की गारंटी नहीं समझना चाहिए।

सवालआधिकारिक जानकारी
पहले क्या चाहिए?एबीसी आईडी और उसमें सही व्यक्तिगत जानकारी
डीईबी आईडी कहां बनती है?यूजीसी डीईबी के विद्यार्थी पोर्टल पर
कितने समय के लिए मान्य है?ओडीएल और ऑनलाइन अध्ययन के पूरे जीवनचक्र में
गलती होने पर पहला कदम?एबीसी या अपार रिकॉर्ड की जांच और सुधार

डीईबी आईडी कैसे बनाएं और कौन सी जानकारी चाहिए?

सबसे पहले अपनी एबीसी या अपार पहचान में नाम, जन्म संबंधी जानकारी और लिंग की जांच करें। डीईबी पोर्टल खुद सलाह देता है कि कार्ड में गलती या अधूरी जानकारी हो तो उसे पहले ठीक किया जाए। गलत मूल रिकॉर्ड के साथ अगला फॉर्म भरने से बाद में दोनों जगह जानकारी मिलाने की समस्या पैदा हो सकती है।

इसके बाद आधिकारिक डीईबी आईडी पृष्ठ खोलें। वहां नई पहचान बनाने और पहले से मौजूद विवरण अपडेट करने के विकल्प दिखाई देते हैं। नई पहचान वाले हिस्से में एबीसी आईडी, आधार के अनुसार नाम, जन्म वर्ष और लिंग जैसे विवरण मांगे जाते हैं। पृष्ठ पर सहमति तथा कैप्चा से जुड़े हिस्से भी हैं।

हर खाने में उसी व्यक्ति की जानकारी भरें जिसके लिए पहचान बनाई जा रही है। नाम की वर्तनी को अपनी सुविधा से छोटा या अलग न करें। यदि किसी विवरण को लेकर संदेह है तो पहले मूल कार्ड देखें। पोर्टल पर दिखाई देने वाली सहमति और जानकारी पढ़कर ही आगे बढ़ें, क्योंकि इसमें संस्थानों और मान्य कार्यक्रमों की जांच करने की बात भी शामिल है।

प्रक्रिया पूरी होने पर मिलने वाली डीईबी पहचान को अपने प्रवेश रिकॉर्ड के साथ संभालकर रखें। किसी सामान्य पहचान संख्या को डीईबी आईडी बताकर प्रवेश फॉर्म में डालना ठीक नहीं होगा। पहले यह सुनिश्चित करें कि संख्या इसी आधिकारिक प्रक्रिया से बनी है और उसके साथ दिखाई दे रही व्यक्तिगत जानकारी आपकी है।

एबीसी आईडी और डीईबी आईडी में क्या अंतर है?

डीईबी के सवाल जवाब में साफ है कि विद्यार्थी डिजिलॉकर खाते से एबीसी आईडी बना सकते हैं और उसी एबीसी आईडी का उपयोग करके डीईबी पोर्टल पर पंजीकरण करते हैं। इसलिए क्रम महत्वपूर्ण है: पहले सही एबीसी रिकॉर्ड, फिर डीईबी प्रक्रिया। केवल डिजिलॉकर में दस्तावेज दिखाई देना दूसरे चरण के पूरा होने का प्रमाण नहीं है।

डीईबी आईडी ओडीएल और ऑनलाइन अध्ययन के पूरे जीवनचक्र के लिए मान्य बताई गई है। इसलिए नया पाठ्यक्रम देखने पर सबसे पहले अपनी मौजूदा पहचान और रिकॉर्ड जांचें। हर प्रवेश पूछताछ के साथ एक नई पहचान बनाने का अनुमान लगाने के बजाय, संस्थान की वर्तमान प्रवेश प्रक्रिया में मांगी गई जानकारी से मिलान करें।

पहचान बनने के बाद भी विश्वविद्यालय की पात्रता शर्तें अलग से लागू होती हैं। आवश्यक पिछली योग्यता, कार्यक्रम की उपलब्धता और प्रवेश सत्र की जांच करनी होगी। डीईबी आईडी बनना इस बात का प्रमाण नहीं कि जिस भी कार्यक्रम का विज्ञापन दिखे उसमें विद्यार्थी को प्रवेश मिल सकता है।

डीईबी आईडी में नाम या जन्मतिथि गलत हो तो क्या करें?

पोर्टल ने सुधार का क्रम भी दिया है। पहले अपार कार्ड की जानकारी जांचें। एबीसी या अपार रिकॉर्ड में त्रुटि हो तो एबीसी की सहायता व्यवस्था अथवा डिजिलॉकर के जरिए उसका सुधार कराएं। मूल रिकॉर्ड ठीक होने की पुष्टि के बाद ही डीईबी विवरण अपडेट करने की प्रक्रिया अपनाएं।

यह क्रम इसलिए उपयोगी है क्योंकि केवल आगे वाले फॉर्म में सही नाम टाइप कर देना मूल पहचान की गलती को नहीं बदलता। उदाहरण के लिए, यदि कार्ड में नाम गलत है लेकिन विद्यार्थी प्रवेश फॉर्म में सही नाम लिखता है, तो दोनों रिकॉर्ड अलग रह सकते हैं। पहले स्रोत रिकॉर्ड ठीक करना और फिर उससे जुड़े विवरण अपडेट करना बेहतर जांच पद्धति है।

पृष्ठ पर पहले से बनी डीईबी आईडी के लिए अलग अपडेट लिंक दिया गया है। नई पहचान बनाने के हिस्से और पुराने विवरण सुधारने के हिस्से को ध्यान से चुनें। सहायता लेने से पहले त्रुटि का सही विवरण नोट कर लें, लेकिन अपनी पहचान संख्या या निजी दस्तावेज सार्वजनिक चर्चा में डालकर समस्या बताने की जरूरत नहीं है।

प्रवेश से पहले मान्यता की कौन सी जांच जरूरी है?

डीईबी के अनुसार विद्यार्थी को उसी प्रवेश सत्र के लिए संस्थान की ओडीएल या ऑनलाइन कार्यक्रम चलाने की मान्यता जांचनी चाहिए। इसके बाद संस्थान की अपनी वेबसाइट पर कार्यक्रम के विवरण देखें। केवल विश्वविद्यालय का परिचित नाम या किसी पुराने सत्र का पत्र मौजूदा कार्यक्रम की स्थिति तय करने के लिए पर्याप्त जांच नहीं है।

सवाल जवाब में प्रतिबंधित कार्यक्रमों, फ्रेंचाइजी व्यवस्था पर रोक और ओडीएल कार्यक्रमों के क्षेत्राधिकार की जांच का भी उल्लेख है। इसलिए किसी स्थानीय केंद्र का विज्ञापन देखने पर उसे विश्वविद्यालय की आधिकारिक सूचना से मिलाएं। पहचान बनाने की सुविधा को इन जांचों का विकल्प मानने से बचें।

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