दीपावली के बाद वाली भाई दूज बुधवार, 11 नवंबर 2026 को है। दृक पंचांग के अनुसार उस दिन वाराणसी में तिलक का अपराह्न समय दोपहर 12:48 से 3:00 बजे और गुरुग्राम में दोपहर 1:11 से 3:21 बजे है। ये भारतीय मानक समय के अनुसार स्थानीय मुहूर्त हैं। भाई के आने और परिवार के भोजन की योजना बनाते समय उसी शहर की पंक्ति देखें जहां तिलक होना है।
दोनों शहरों में पर्व की तारीख एक है, लेकिन तिलक की अवधि की घड़ी अलग है। इस लेख में 26 अक्टूबर 2026 को पढ़े गए शहरवार पंचांग का समय दिया गया है। यहां नवंबर वाली भाई दूज की जानकारी है; होली के आसपास खोजी जाने वाली भाई दूज की तारीख इससे न मिलाएं।
| शहर | भाई दूज | तिलक का अपराह्न समय | अवधि |
|---|---|---|---|
| वाराणसी | 11 नवंबर 2026, बुधवार | दोपहर 12:48 से 3:00 बजे | 2 घंटे 12 मिनट |
| गुरुग्राम | 11 नवंबर 2026, बुधवार | दोपहर 1:11 से 3:21 बजे | 2 घंटे 10 मिनट |
भाई दूज 2026 की द्वितीया तिथि कब है?
वाराणसी के लिए दृक पंचांग द्वितीया का आरंभ मंगलवार, 10 नवंबर 2026 को दोपहर 2:00 बजे और अंत बुधवार, 11 नवंबर को दोपहर 3:53 बजे बताता है। उसी पृष्ठ पर भाई दूज का दिन 11 नवंबर चुना गया है। इसलिए तिथि 10 नवंबर को शुरू होने का अर्थ यह नहीं कि इस पंचांग का तिलक मुहूर्त भी उसी दिन है।
एक और अंतर ध्यान में रखें: द्वितीया समाप्त होने का समय और तिलक की बताई अवधि का अंत एक नहीं हैं। वाराणसी की तालिका दोपहर 3:00 बजे तक का अपराह्न समय देती है। तिथि 3:53 बजे तक होने के आधार पर इस तालिका की अवधि अपने आप बढ़ाकर नहीं पढ़नी चाहिए।
गुरुग्राम में तिलक कब करें और कौन सा शहर चुनें?
गुरुग्राम के पंचांग पृष्ठ पर स्थान का नाम गुड़गांव है। यहां तिलक का समय दोपहर 1:11 बजे शुरू होता है, यानी वाराणसी की तुलना में 23 मिनट बाद। गुरुग्राम की अवधि दोपहर 3:21 बजे समाप्त होती है। इस अंतर को समय क्षेत्र बदलने का मामला न समझें; दोनों पंक्तियां भारतीय मानक समय की हैं।
अगर बहन वाराणसी में रहती हैं और भाई गुरुग्राम से पहुंच रहे हैं, लेकिन तिलक वाराणसी में होना है, तो वाराणसी की पंक्ति काम आएगी। उलटी स्थिति में गुरुग्राम का समय देखें। यह उदाहरण तालिका का उपयोग समझाने के लिए है। किसी तीसरे शहर में आयोजन हो तो उसके नाम से नया पंचांग पृष्ठ खोलें।
परिवार के संदेश में तारीख, शहर और समय तीनों लिखना उपयोगी होगा। केवल दोपहर का मुहूर्त लिख देने से आने वाले व्यक्ति को यह पता नहीं चलेगा कि किस समय तक पहुंचना है। भोजन, स्वागत और तिलक के लिए अपनी व्यवस्था पहले तय करें; यहां दिए समय किसी ट्रेन, सड़क या मंदिर के कार्यक्रम का अनुमान नहीं हैं।
भाई दूज की पूजा में क्या किया जाता है?
दृक पंचांग भाई दूज को कार्तिक शुक्ल द्वितीया का पर्व बताता है। इसके वर्णन में बहन का भाई को तिलक लगाना, उसकी कुशलता की प्रार्थना करना, आरती और भोजन का आयोजन शामिल है। भाई अपनी सामर्थ्य के अनुसार बहन को उपहार देता है। इसे उपहार की किसी तय कीमत या अनिवार्य खर्च वाली रस्म की तरह नहीं पढ़ना चाहिए।
पूजा की थाली और भोजन की तैयारी परिवार की परंपरा के अनुसार की जा सकती है। पंचांग में तिलक के बाद मिठाई और भोजन देने का वर्णन है, लेकिन सभी परिवारों के लिए एक जैसा व्यंजन या वस्तुओं की एक निश्चित संख्या तय नहीं की गई है। घर में चली आ रही विधि अलग हो तो उसका संदर्भ स्थानीय पुरोहित या अपने परिवार के जानकार से स्पष्ट कर लें।
भाई दूज को यम द्वितीया क्यों कहते हैं?
इस पर्व से यमराज और उनकी बहन यमुना की कथा जुड़ी है। दृक पंचांग की यम द्वितीया कथा में यमुना के आग्रह पर यमराज के उनके घर आने, स्वागत और भोजन का वर्णन मिलता है। इसी धार्मिक कथा के साथ बहन के घर भाई के सत्कार की परंपरा समझाई जाती है।
कथा और पूजा में व्यक्त दीर्घायु तथा कुशलता की कामना धार्मिक आस्था का हिस्सा है। इसे किसी निश्चित स्वास्थ्य परिणाम की गारंटी नहीं माना जाता। पर्व की सामाजिक तैयारी में भाई और बहन का साथ बैठना, परिवार के लिए समय निकालना और अपनी सुविधा के अनुसार मिलने का कार्यक्रम तय करना केंद्र में रखा जा सकता है।
क्या 11 नवंबर को सबकी छुट्टी होगी?
प्रधान नियंत्रक संचार लेखा, दिल्ली के आधिकारिक पृष्ठ पर दिल्ली और नई दिल्ली स्थित केंद्रीय प्रशासनिक कार्यालयों की 2026 सूची में 11 नवंबर की भाई दूज प्रतिबंधित अवकाश में दर्ज है। यह जानकारी उस सूची के दायरे की है। इससे वाराणसी या गुरुग्राम के सभी स्कूलों, बैंकों और निजी कार्यालयों के बंद होने की घोषणा नहीं होती।
छुट्टी या यात्रा की योजना अपने संस्थान के कैलेंडर से मिलाएं। पूजा का मुहूर्त जानना और काम से अवकाश मिलना अलग सवाल हैं। यदि किसी मंदिर में विशेष कार्यक्रम में जाना है तो उसकी जारी सूचना से समय की पुष्टि करें; शहर का सामान्य पंचांग मंदिर के प्रवेश या आयोजन का समय नहीं बताता।
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