दिवाली पर घर की लक्ष्मी पूजा का समय देख रहे हैं तो दृक पंचांग 8 नवंबर 2026, रविवार को वाराणसी के लिए शाम 5:37 से 7:34 बजे और गुरुग्राम के लिए शाम 5:55 से 7:51 बजे की अवधि देता है। उसी पृष्ठ पर देर रात का महानिशीथ काल भी मिलता है, लेकिन पंचांग सामान्य गृहस्थ पूजा के लिए प्रदोष काल वाले मुहूर्त की अनुशंसा करता है। दोनों समयों को एक ही प्रकार की पूजा अवधि समझना ठीक नहीं होगा।

यह फर्क खास तौर पर तब उपयोगी है जब किसी संदेश में केवल रात 12 बजे का समय लिखा हो या अमावस्या शुरू होने को ही लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त बता दिया गया हो। नीचे की तालिकाएं एक ही पंचांग की हैं और भारतीय मानक समय में दी गई हैं। शहर, पूजा का प्रकार और आधी रात के बाद बदलती तारीख, तीनों साथ पढ़ें।

8 नवंबर को घर की लक्ष्मी पूजा का समय

शहरप्रदोष काललक्ष्मी पूजा मुहूर्तवृषभ काल
वाराणसीशाम 5:13 से 7:49शाम 5:37 से 7:34शाम 5:37 से 7:34
गुरुग्रामशाम 5:32 से रात 8:10शाम 5:55 से 7:51शाम 5:55 से 7:51

समय का आधार दृक पंचांग के वाराणसी लक्ष्मी पूजा पृष्ठ और गुरुग्राम लक्ष्मी पूजा पृष्ठ हैं। यहां पूरी प्रदोष अवधि और उसके भीतर दी गई लक्ष्मी पूजा अवधि को अलग दिखाया गया है। घर की पूजा के लिए पहली तालिका की लक्ष्मी पूजा वाली पंक्ति पढ़ना सबसे सीधा तरीका है।

उदाहरण के लिए, वाराणसी में शाम 5:20 बजे प्रदोष काल शुरू हो चुका होगा, लेकिन तालिका में दिया पूजा मुहूर्त 5:37 बजे से है। गुरुग्राम में शाम 7:55 बजे प्रदोष काल रहेगा, जबकि लक्ष्मी पूजा की विशेष अवधि 7:51 बजे समाप्त हो चुकी होगी। इससे समझ आता है कि प्रदोष का पूरा विस्तार और चुना गया मुहूर्त एक ही अवधि नहीं हैं।

महानिशीथ काल कब है और किसके लिए बताया गया है?

शहरमहानिशीथ शुरूमहानिशीथ समाप्त
वाराणसी8 नवंबर, रात 11:16 बजे9 नवंबर, रात 12:08 बजे
गुरुग्राम8 नवंबर, रात 11:40 बजे9 नवंबर, रात 12:32 बजे

दृक पंचांग इस देर रात की अवधि को विशेष साधना और उस विधि से परिचित पंडितों के लिए उपयुक्त बताता है। सामान्य परिवारों के लिए उसकी सलाह शाम का प्रदोष मुहूर्त है। इसलिए रात का समय देखकर यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि शाम की पूजा अधूरी होगी या हर परिवार को आधी रात तक इंतजार करना चाहिए। यह स्रोत की धार्मिक पद्धति का विवरण है।

तालिका में समाप्ति की तारीख 9 नवंबर लिखने का कारण घड़ी का आधी रात पार करना है। वाराणसी में रात 11:16 बजे से 52 मिनट जोड़ने पर अगले दिन 12:08 बजे होते हैं। गुरुग्राम में 11:40 बजे से 52 मिनट बाद 12:32 बजे होते हैं। इन गणनाओं से दिवाली की तारीख 9 नवंबर नहीं बन जाती; दोनों स्रोत लक्ष्मी पूजा का दिन 8 नवंबर ही बताते हैं।

अमावस्या की अवधि और पूजा मुहूर्त में क्या अंतर है?

दृक पंचांग के इन दोनों पृष्ठों में अमावस्या 8 नवंबर को सुबह 11:27 बजे शुरू होकर 9 नवंबर को दोपहर 12:31 बजे समाप्त होती है। यह तिथि की पूरी अवधि है। शाम का पूजा मुहूर्त इसके भीतर आता है। इसलिए सुबह तिथि शुरू होते ही ऊपर दी गई शाम की पूजा अवधि शुरू हो गई, ऐसा पढ़ना गलत होगा।

स्रोत लक्ष्मी पूजा के लिए अमावस्या, प्रदोष और स्थिर लग्न का मेल देखता है। वृषभ लग्न को इस गणना में स्थिर लग्न माना गया है। इसी वजह से तालिका में वृषभ काल और चुने गए शाम के पूजा समय एक जैसे हैं। दूसरे शहर का वृषभ काल उठाकर अपने शहर के प्रदोष समय के साथ मिलाने से उस पंचांग की गणना का अर्थ बदल जाएगा।

परिवार यदि दूसरे पंचांग या परंपरा के अनुसार पूजा करता है, तो उसी स्रोत की पूरी समयावधि देखे। एक जगह से तिथि, दूसरी से लग्न और तीसरी से रात की अवधि लेकर अंतिम मुहूर्त बनाना भ्रम बढ़ाता है। यहां तुलना का उद्देश्य वाराणसी और गुरुग्राम की एक ही गणना पद्धति में दिए समय को स्पष्ट करना है।

पूजा की विधि और परिवार का कार्यक्रम कैसे मिलाएं?

मुहूर्त और विधि अलग प्रश्न हैं। दृक पंचांग का लक्ष्मी पूजा विधि पृष्ठ षोडशोपचार, यानी सोलह चरणों वाली पूजा का क्रम देता है। उसमें शुरुआत ध्यान से होती है। जिस परिवार को विस्तृत क्रम अपनाना है, वह विधि पहले पढ़कर अपनी तैयारी कर सकता है; समय की तालिका अकेले पूरी पूजा विधि नहीं बताती।

दोनों शहरों के परिजन यदि एक साथ अपनी शाम की पूजा का कार्यक्रम बनाना चाहें, तो दी गई अवधियों का साझा हिस्सा शाम 5:55 से 7:34 बजे तक है। यह तालिका से निकाला गया समय मिलान है, किसी अतिरिक्त मुहूर्त की घोषणा नहीं। पूजा की अवधि, घर की परंपरा और स्थानीय मार्गदर्शन के अनुसार कार्यक्रम तय किया जा सकता है।

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