केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने 3 अक्टूबर 2026 को एजेंसियों को बधाई दी कि तुर्की से नार्को तस्करी के आरोपी नवप्रीत सिंह को भारत वापस लाया गया है। गृह मंत्रालय की विज्ञप्ति के अनुसार उन्हें ड्रग तस्करी और अन्य अपराधों के मामलों में जेल भेज दिया गया है। शाह के अनुसार नवप्रीत सिंह ने नवाब विर्क नाम की फर्जी पहचान से तुर्की की नागरिकता ली थी। इसके बावजूद वह अफगानिस्तान से भारत में हेरोइन और मेथम्फेटामाइन की तस्करी से जुड़ा रहा। भारतीय एजेंसियों ने फर्जी पहचान खोलकर उसे वापस लाने में सफलता पाई।

विज्ञप्ति में मोदी सरकार का लक्ष्य दोहराया गया है कि दिसंबर 2029 से पहले हर नार्को कार्टेल को खत्म करने की दिशा में काम जारी रहेगा। भगोड़ों को वापस लाने को राष्ट्रीय प्राथमिकता बताया गया है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक 2019 से अगस्त 2026 तक 36 देशों से कुल 288 भगोड़ों को भारत लाया जा चुका है।

गृह मंत्री ने भगोड़ों के खिलाफ तीन स्तंभ बताए: वैश्विक अभियान, मजबूत समन्वय और स्मार्ट कूटनीति। उन्होंने भगोड़े अपराधियों के मुद्दे को संप्रभुता, आर्थिक स्थिरता, कानून व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ा। 2019 में एनआईए संशोधन अधिनियम और यूएपीए संशोधन अधिनियम आए। 2020 के बाद भगोड़ों को वापस लाने की प्रक्रिया को मिशन मोड में बढ़ाया गया। कार्रवाई का दायरा संगठनों से आगे बढ़कर व्यक्तिगत आतंकी, हैंडलर, फंडिंग नेटवर्क और विदेश में बैठे सपोर्ट सिस्टम तक फैला।

भारतपोल और सूचना साझाकरण

जनवरी 2025 में BHARTPOL (भारतपोल) लॉन्च किया गया। इसका मकसद भारत और वैश्विक एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाना है। विज्ञप्ति कहती है कि भारतपोल ने सीबीआई, राज्य पुलिस मुख्यालय और जिला पुलिस मुख्यालय को एक सूचना ढांचे में जोड़ा है। राज्य और केंद्रीय एजेंसियों के 1,400 से अधिक यूनिट ऑफिस पोर्टल से जुड़े हैं। सीबीआई द्वारा मांगी जानकारी अन्य एजेंसियां अक्सर 10 से 20 दिनों में और कुछ मामलों में 3 से 10 दिनों में साझा कर देती हैं। पहले की तुलना में प्रतिक्रिया समय घटा है।

मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक कानून (PMLA) के सख्त लागू होने का जिक्र भी है। 2019 से 2026 तक भगोड़ों की कुल 17,874 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त बताई गई है। उसी अवधि में 18,762 करोड़ रुपये की सफल वापसी (रेस्टिट्यूशन) का आंकड़ा दिया गया है। इसमें देश छोड़कर भागे आर्थिक अपराधियों का पैसा भी शामिल है। पिछले तीन वर्षों में 401 भगोड़े अपराधियों के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी हुए। जुलाई 2026 तक कुल 182 रेड कॉर्नर नोटिस जारी होने का उल्लेख है।

नशीले पदार्थों की तस्करी और स्थानीय संदर्भ

हेरोइन और मेथम्फेटामाइन जैसी तस्करी सीमा पार नेटवर्क से जुड़ी होती है। एक व्यक्ति की वापसी पूरे नेटवर्क का अंत नहीं होती, पर विदेशी ठिकाने तोड़ना जांच एजेंसियों के लिए जरूरी कड़ी है। घरेलू स्तर पर नार्को मामलों में राज्य पुलिस की कार्रवाई भी जारी रहती है। हाल में गुड़गांव में नार्को आरोपी घरों पर कार्रवाई और सोनभद्र में गांजा जब्ती जैसी घटनाएं स्थानीय स्तर की सख्ती दिखाती हैं। आर्थिक अपराध विंग के वाराणसी ऋण धोखाधड़ी गिरफ्तारी जैसे मामले याद दिलाते हैं कि सीमा पार और घरेलू आर्थिक अपराध अक्सर एक ही जांच श्रृंखला में जुड़ते हैं।

पाठकों के लिए व्यावहारिक बात यह है कि नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़े किसी भी संदिग्ध प्रस्ताव या ऑनलाइन संपर्क को नजरअंदाज करें और स्थानीय पुलिस या आधिकारिक हेल्पलाइन पर सूचना दें। विज्ञप्ति अदालती फैसले का विस्तृत ब्योरा नहीं देती। आरोपों की कानूनी स्थिति आगे की सुनवाई और दस्तावेजों पर निर्भर करेगी। नाम, फर्जी पहचान और प्रत्यर्पण की तारीख जैसी बातें आधिकारिक बयान से ली गई हैं।

विज्ञप्ति राजनीतिक दलों या विपक्ष की प्रतिक्रिया दर्ज नहीं करती। अदालत में आरोपों की पुष्टि या खंडन अलग प्रक्रिया है। फिलहाल आधिकारिक बयान इतना कहता है कि व्यक्ति भारत लौट आया है और संबंधित मामलों में हिरासत में है। आगे की सुनवाई, आरोप पत्र और अदालती आदेश ही कानूनी स्थिति तय करेंगे।

आने वाले समय में एजेंसियां और भगोड़ों की सूची, रेड कॉर्नर नोटिस और संपत्ति जब्ती के आंकड़े अपडेट करती रहेंगी। जो पाठक नीतिगत पृष्ठभूमि समझना चाहते हैं, उन्हें गृह मंत्रालय और पत्र सूचना कार्यालय की ताजा विज्ञप्तियां देखनी चाहिए। नवप्रीत सिंह की वापसी 2026 के उस अभियान का हिस्सा है जिसमें सरकार ने विदेशी ठिकानों से तस्करों को लाने को प्राथमिकता दी है।