वाराणसी-रांची-कोलकाता कॉरिडोर का 35 प्रतिशत काम पूरा, सफर 18 घंटे से घटकर 5 घंटे होने की उम्मीद

Saurav Yadav••7 मिनट
खुले मैदानी इलाके में बन रही चौड़ी सड़क के मिट्टी के तटबंध पर चलता पीला रोड रोलर और खुदाई मशीन, दूर हेलमेट और चमकीले जैकेट में मजदूर, दोनों ओर हरे खेत
प्रतीकात्मक चित्र: Dalimss News के लिए तैयार किया गया चित्र, घटना की वास्तविक तस्वीर नहीं।

वाराणसी-रांची-कोलकाता कॉरिडोर का करीब 35 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने 1 अक्टूबर को पटना में 'राइजिंग बिहार इन्वेस्टर समिट 2026' के दौरान यह जानकारी दी। मंत्रालय की विज्ञप्ति के अनुसार लगभग 600 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर की लागत करीब 32,000 करोड़ रुपये है।

विज्ञप्ति में गडकरी के हवाले से कहा गया है कि परियोजना पूरी होने पर वाराणसी से कोलकाता तक का सफर करीब 18 घंटे से घटकर लगभग 5 घंटे का रह जाने की संभावना है। उन्होंने इसे बिहार को उत्तर प्रदेश, झारखंड और पश्चिम बंगाल से बेहतर तरीके से जोड़ने वाली परियोजना बताया।

समिट में बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, पथ निर्माण मंत्री ई. कुमार शैलेंद्र और उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह भी मौजूद थे। मुख्यमंत्री ने राज्य में निवेश, उद्योगों के विस्तार और रोजगार को सरकार की प्राथमिकता बताया।

गोरखपुर से सिलीगुड़ी तक

समिट में गडकरी ने गोरखपुर-सिलीगुड़ी हाई स्पीड कॉरिडोर का भी जिक्र किया। करीब 526 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर की लागत लगभग 72,000 करोड़ रुपये बताई गई है। इसमें से करीब 52,000 करोड़ रुपये का निवेश बिहार में होगा और लगभग 410 किलोमीटर हिस्सा बिहार से गुजरेगा। विज्ञप्ति के मुताबिक इसके ग्रीनफील्ड अलाइनमेंट को स्वीकृति मिल चुकी है और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया के लिए अधिसूचना जारी की जा चुकी है।

बिहार के आंकड़े

गडकरी ने बताया कि बिहार में हाईवे निर्माण के क्षेत्र में 3,88,100 करोड़ रुपये के काम किए जाने हैं। मौजूदा कार्यकाल के अंत तक कुल करीब 5 लाख करोड़ रुपये के काम पूरे करने का लक्ष्य है। करीब 33,000 करोड़ रुपये की लागत से 2,910 किलोमीटर लंबाई की परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि लगभग 65,100 करोड़ रुपये की 1,878 किलोमीटर की परियोजनाओं पर काम चल रहा है। आगामी परियोजनाओं का कुल प्रस्तावित निवेश करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये है।

उनके अनुसार 2014 में बिहार में राष्ट्रीय राजमार्गों की कुल लंबाई करीब 4,615 किलोमीटर थी, जो अब बढ़कर करीब 6,500 किलोमीटर हो गई है।

बाकी परियोजनाएं

धार्मिक और पर्यटन महत्व की परियोजनाओं में गडकरी ने राम-जानकी मार्ग का नाम लिया। लगभग 440 किलोमीटर लंबे इस मार्ग की लागत करीब 5,440 करोड़ रुपये है, इसका लगभग 27 प्रतिशत काम हो चुका है और इसे नवंबर 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य बताया गया। भगवान बुद्ध से जुड़े कॉरिडोर के तहत करीब 22,000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का लगभग 90 प्रतिशत काम पूरा होने की बात कही गई।

आगामी ग्रीनफील्ड परियोजनाओं में रक्सौल-हल्दिया कॉरिडोर है, जो करीब 550 किलोमीटर लंबा होगा और जिसकी अनुमानित लागत लगभग 45,200 करोड़ रुपये है। इसकी डीपीआर दिसंबर तक पूरी करने की बात कही गई। गडकरी के अनुसार इससे रक्सौल से हल्दिया की यात्रा का समय लगभग 20 घंटे से घटकर 8 घंटे रह सकता है। बक्सर-भागलपुर हाई स्पीड कॉरिडोर करीब 218 किलोमीटर लंबा है और उसकी लागत लगभग 10,000 करोड़ रुपये बताई गई। पटना रिंग रोड करीब 162 किलोमीटर की है, लागत लगभग 10,200 करोड़ रुपये, और गडकरी ने कहा कि इसके जरिए दरभंगा एयरपोर्ट को भी बेहतर संपर्क मिलेगा।

वाराणसी-रांची-कोलकाता कॉरिडोर के पूरा होने की तारीख और उत्तर प्रदेश वाले हिस्से का अलग ब्योरा विज्ञप्ति में नहीं है। ऊपर दिए सभी आंकड़े मंत्री ने समिट में रखे, जिन्हें मंत्रालय ने अपनी विज्ञप्ति में दर्ज किया है।

स्रोत और रिपोर्टिंग

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की विज्ञप्ति (पीआईबी पटना), राइजिंग बिहार इन्वेस्टर समिट 2026, 1 अक्टूबर 2026: https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2317880

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