सुप्रीम कोर्ट को तीन नए जज मिल गए हैं और इनमें से दो का रिश्ता सीधे उत्तर प्रदेश से है। राष्ट्रपति ने गुजरात हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल, दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और तेलंगाना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अपरेश कुमार सिंह को सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया है। विधि और न्याय मंत्रालय ने 5 अक्टूबर 2026 की शाम इसकी अधिसूचना की जानकारी दी।
न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल और न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय दोनों का मूल हाईकोर्ट इलाहाबाद है। न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह का मूल हाईकोर्ट झारखंड है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 28 सितंबर 2026 की बैठक में इन तीनों नामों की सिफारिश की थी, जिसका बयान सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर उसी दिन जारी हुआ था। सरकार ने एक हफ्ते के भीतर इस पर मुहर लगा दी।
सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर इस समय मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत समेत 34 न्यायाधीशों के नाम दर्ज हैं। तीनों के शपथ लेने के बाद यह संख्या 37 हो जाएगी। अभी शीर्ष अदालत में दो महिला न्यायाधीश हैं, न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति वी. मोहना। न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल के आने से यह संख्या तीन हो जाएगी।
न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल का जन्म 30 अप्रैल 1966 को हुआ। गुजरात हाईकोर्ट के आधिकारिक परिचय के अनुसार उन्होंने 1986 में लखनऊ विश्वविद्यालय से बीएससी किया और फिर अवध विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री ली। 16 दिसंबर 1990 को वकील के रूप में पंजीकरण के बाद उन्होंने करीब 21 साल इलाहाबाद हाईकोर्ट में मुख्य रूप से सिविल, रिट और वाणिज्यिक मामलों में वकालत की।
वे 21 नवंबर 2011 को इलाहाबाद हाईकोर्ट में अतिरिक्त न्यायाधीश बनीं और 6 अगस्त 2013 को स्थायी न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। अप्रैल 2023 में इलाहाबाद हाईकोर्ट की सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश होने के नाते उन्हें उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया। 23 जुलाई 2023 से वे गुजरात हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश हैं। वे प्रशिक्षित मध्यस्थ भी हैं।
न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय का जन्म 16 जून 1965 को उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर जिले के मुस्करई गांव में हुआ। दिल्ली हाईकोर्ट की वेबसाइट के अनुसार उन्होंने 1991 में लखनऊ विश्वविद्यालय से एलएलबी किया और 11 मई 1991 को वकालत शुरू की। उन्होंने मुख्य रूप से इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में सिविल और संवैधानिक मामलों में वकालत की।
मई 2007 में वे उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य स्थायी अधिवक्ता बने और हाईकोर्ट का जज बनने तक इसी पद पर रहे। उनकी नियुक्ति भी 21 नवंबर 2011 को इलाहाबाद हाईकोर्ट में हुई और 6 अगस्त 2013 को वे स्थायी जज बने। 28 मार्च 2023 को वे लखनऊ पीठ के वरिष्ठ न्यायाधीश बने। 29 जुलाई 2023 को बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने और 21 जनवरी 2025 को तबादले पर दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली।
न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह का जन्म 7 जुलाई 1965 को हुआ। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीए ऑनर्स और एलएलबी किया। 1990 से 2000 तक पटना हाईकोर्ट और 2001 से झारखंड हाईकोर्ट में वकालत की। 24 जनवरी 2012 को वे झारखंड हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश बने और 16 जनवरी 2014 को स्थायी हुए। दिसंबर 2022 से फरवरी 2023 तक वे झारखंड हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रहे।
17 अप्रैल 2023 को उन्होंने त्रिपुरा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली और 19 जुलाई 2025 को तबादले पर तेलंगाना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने। तेलंगाना हाईकोर्ट के परिचय पृष्ठ के अनुसार वे झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष भी रह चुके हैं।
संविधान के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश 65 वर्ष की उम्र तक पद पर रहते हैं, जबकि हाईकोर्ट में यह सीमा 62 वर्ष है। जन्मतिथि के हिसाब से न्यायमूर्ति उपाध्याय जून 2030 तक, न्यायमूर्ति सिंह जुलाई 2030 तक और न्यायमूर्ति अग्रवाल अप्रैल 2031 तक सुप्रीम कोर्ट में रहेंगे। गुजरात हाईकोर्ट की वेबसाइट पर न्यायमूर्ति अग्रवाल की हाईकोर्ट से सेवानिवृत्ति की तारीख 29 अप्रैल 2028 दर्ज है, यानी सुप्रीम कोर्ट जाने से उनका कार्यकाल करीब तीन साल बढ़ गया है।
वाराणसी समेत पूरे उत्तर प्रदेश के मुकदमे इलाहाबाद हाईकोर्ट और उसकी लखनऊ पीठ से होकर ही सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचते हैं। हाल में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी में जमीन अधिग्रहण को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज की थीं। सुप्रीम कोर्ट से जुड़ी वाराणसी की एक और खबर में हमने BHU के पूर्व छात्र प्रदीप राय के सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन अध्यक्ष चुने जाने की जानकारी दी थी।
तीनों जजों के सुप्रीम कोर्ट जाने से गुजरात, दिल्ली और तेलंगाना हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश के पद खाली होंगे। इन पदों पर नई नियुक्ति के लिए कॉलेजियम की सिफारिश और केंद्र की मंजूरी की प्रक्रिया अलग से चलेगी। शपथ ग्रहण के बाद तीनों न्यायाधीश सुप्रीम कोर्ट में मुकदमों की सुनवाई शुरू करेंगे।







