पीएम-किसान सम्मान निधि की 24वीं किस्त शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को गुजरात के बनासकांठा से जारी कर दी गई। पीआईबी के ताजा विवरण के अनुसार करीब 18,690 करोड़ रुपये 9.34 करोड़ पात्र किसानों तक प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के जरिए भेजे गए। योजना के तहत पात्र किसान परिवार को साल में 6,000 रुपये मिलते हैं, जो 2,000 रुपये की तीन बराबर किस्तों में दिए जाते हैं।

प्रधानमंत्री कार्यालय की शुक्रवार की विज्ञप्ति भी बनासकांठा के कार्यक्रम में नई किस्त भेजे जाने की पुष्टि करती है। यह अब केवल आगामी भुगतान की घोषणा नहीं है। हालांकि राष्ट्रीय स्तर पर राशि जारी होने की सूचना किसी एक किसान के खाते का भुगतान रिकॉर्ड नहीं है। अपने खाते में जमा रकम और योजना में दर्ज भुगतान की स्थिति अलग से देखनी होगी।

रकम जारी हुई, अपना भुगतान रिकॉर्ड भी देखें

पीआईबी के मुताबिक पीएम-किसान का मोबाइल ऐप लाभार्थियों को भुगतान की स्थिति देखने की सुविधा देता है। इसमें स्व-पंजीकरण और ई-केवाईसी भी की जा सकती है। पोर्टल पर स्थान के अनुसार लाभार्थी किसानों की सूची उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। इसलिए केवल किस्त जारी होने की खबर के आधार पर यह मान लेना ठीक नहीं होगा कि हर आवेदन मंजूर हो गया है या प्रत्येक लंबित मामले का भुगतान हो चुका है।

लाभ देने से पहले किसान की जमीन का रिकॉर्ड पीएम-किसान पोर्टल पर दर्ज होना, बैंक खाता आधार से जुड़ा होना और ई-केवाईसी पूरी होना जरूरी बताया गया है। ये योजना के सत्यापन की शर्तें हैं। बैंक खाते में सामान्य केवाईसी अपडेट कराने की प्रक्रिया पर हमारी बैंकिंग शिविरों और री-केवाईसी की रिपोर्ट भी पढ़ सकते हैं। पीएम-किसान के लिए जरूरी सत्यापन का रिकॉर्ड योजना में ही जांचना होगा।

पंजीकरण से खाते तक कई स्तर की जांच

आधिकारिक विवरण में पंजीकरण के तीन माध्यम बताए गए हैं: पीएम-किसान पोर्टल, मोबाइल ऐप और कॉमन सर्विस सेंटर। इसके बाद राज्य सरकार पात्रता की जांच करके लाभार्थी का विवरण पोर्टल पर डालती है। आधार और बैंक खाते की जानकारी का सत्यापन होता है तथा अपात्र आवेदनों को अलग किया जाता है। केवल फॉर्म भर देना राशि जारी करने का अंतिम चरण नहीं है।

राज्य की अंतिम मंजूरी के बाद रिकॉर्ड सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली, यानी पीएफएमएस, को खाते की जांच के लिए भेजा जाता है। पात्र रिकॉर्ड के आधार पर धन अंतरण का अनुरोध और भुगतान आदेश बनते हैं। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग स्वीकृति आदेश जारी करता है। इसके बाद संबंधित बैंकों और भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम के जरिए रकम सीधे किसान के बैंक खाते तक पहुंचाई जाती है।

पात्र किसान परिवारों की पहचान और लाभार्थियों का डेटाबेस तैयार करने की जिम्मेदारी राज्यों की है। इस रिकॉर्ड में नाम, उम्र, श्रेणी, आधार, बैंक खाते और मोबाइल नंबर जैसी जानकारी रखी जाती है। दोहरे भुगतान रोकने के लिए विवरण की शुद्धता और उसे नियमित रूप से अपडेट करने पर जोर दिया गया है। लाभार्थियों की सूचियां गांव के स्तर पर भी प्रदर्शित की जाती हैं।

ई-केवाईसी के विकल्प और शिकायत का रास्ता

ई-केवाईसी के लिए आधिकारिक विवरण ओटीपी, बायोमेट्रिक और चेहरे से पहचान के विकल्प बताता है। पीएम-किसान ऐप में चेहरे से पहचान की सुविधा 2023 में जोड़ी गई थी। इस तरीके में चेहरे को स्कैन करके सत्यापन किया जाता है और ओटीपी या उंगली के निशान वाले सत्यापन की जरूरत नहीं पड़ती। शुक्रवार की किस्त जारी होने से ये पहले से मौजूद सुविधाएं नई योजना नहीं बन जातीं।

लाभ से छूट गए किसान शिकायत व्यवस्था का इस्तेमाल कर सकते हैं। पीआईबी ने पीएम-किसान पोर्टल और केंद्रीय लोक शिकायत प्रणाली सीपीग्राम्स, दोनों का उल्लेख किया है। राष्ट्रीय स्तर पर समीक्षा के साथ राज्य और जिला निगरानी समितियां भी योजना का काम देखती हैं। सरकारी सेवा से जुड़ी शिकायत और उसके जवाब के बाद उपलब्ध प्रक्रिया को समझने के लिए हमारी सीपीग्राम्स संबंधी रिपोर्ट देखी जा सकती है।

जानकारी लेने का एक और माध्यम किसान-ईमित्र है। सितंबर 2023 में शुरू किया गया यह चैटबॉट पीएम-किसान के डिजिटल तंत्र से जुड़ा है। इसमें भुगतान, पंजीकरण और पात्रता के बारे में आवाज या लिखित सवाल पूछे जा सकते हैं। आधिकारिक विवरण के अनुसार यह हिंदी सहित 11 भारतीय भाषाओं में चौबीसों घंटे सहायता देता है। इसे व्यक्तिगत भुगतान मंजूर करने वाला अधिकारी न समझें।

नई किस्त के साथ जारी विवरण योजना को वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने के जुलाई के कैबिनेट फैसले की भी जानकारी देता है। इस अवधि के लिए स्वीकृत वित्तीय प्रावधान 3.15 लाख करोड़ रुपये है। यह पूरी अवधि का प्रावधान है, शुक्रवार को बांटी गई राशि नहीं। अभी की खबर 24वीं किस्त के अंतरण की है; अगली किस्त की निश्चित तारीख इस विवरण में नहीं दी गई है।