देशभर में 21 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026 तक बैंकों के वित्तीय समावेशन शिविर लगेंगे। वित्त मंत्रालय की 19 अक्टूबर की घोषणा के मुताबिक अभियान में 2.70 लाख ग्राम पंचायतों और शहरी स्थानीय निकायों को शामिल किया जाएगा। शिविरों में नए जनधन खाते खोलने के साथ पुराने बचत खातों की री-केवाईसी और अधूरे नामांकन का काम भी होगा।

सूची में लंबित सी-केवाईसी पहचान संख्या बनाना, बचत खातों और लॉकर में नामांकन अपडेट करना तथा डिजिटल धोखाधड़ी और लावारिस वित्तीय संपत्तियों पर जानकारी देना शामिल है। जीवन ज्योति बीमा, सुरक्षा बीमा और अटल पेंशन योजना के पंजीकरण भी अभियान का हिस्सा हैं।

पात्र पीएम-किसान लाभार्थियों के किसान क्रेडिट कार्ड आवेदन और आगामी रबी मौसम के फसल बीमा पंजीकरण भी लिए जाएंगे। घोषणा में वाराणसी या किसी दूसरे जिले के शिविरों का स्थान और समय नहीं दिया गया है।

नया खाता और योजना का लाभ अलग बातें

जनधन खाते की व्यवस्था पहले से लागू है, यह इस अभियान में बनाई गई नई श्रेणी नहीं है। 27 अगस्त के सरकारी विवरण के अनुसार बैंकिंग सुविधा से बाहर व्यक्ति का बुनियादी बचत खाता खोला जाता है और उसमें न्यूनतम राशि बनाए रखने की शर्त नहीं है। खाता बैंक शाखा या बैंक मित्र केंद्र के माध्यम से खुल सकता है।

खाता खोलने का फॉर्म और जरूरी केवाईसी दस्तावेज जमा होने के बाद बैंक उनका सत्यापन करता है। खाता सक्रिय होने का चरण इसके बाद आता है। संयुक्त खाता भी खोला जा सकता है। सरकारी विवरण में भरा और हस्ताक्षरित फॉर्म, पासपोर्ट आकार की तस्वीर तथा पहचान और पते से संबंधित दस्तावेजों का उल्लेख है।

जनधन खाते में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण की सुविधा और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़ने की व्यवस्था है। लेकिन बैंक खाता होना और संबंधित योजना में पात्र होना अलग शर्तें हैं। उदाहरण के लिए, पीएम आवास शहरी की आवेदन प्रक्रिया पर हमारी पिछली रिपोर्ट में भी आवेदन, जांच और मंजूरी के अलग चरण बताए गए हैं।

री-केवाईसी में पावती और अपडेट की सूचना

वाणिज्यिक बैंकों के लिए आरबीआई के एक अक्टूबर तक अद्यतन केवाईसी निर्देश बताते हैं कि जानकारी में बदलाव न होने पर ग्राहक की स्वघोषणा ली जा सकती है। इसके रास्तों में बैंक में दर्ज ईमेल या मोबाइल नंबर, एटीएम, बैंक के डिजिटल माध्यम और पत्र शामिल हैं। अधिकृत बैंक मित्र भी जानकारी अपरिवर्तित रहने या केवल पता बदलने पर घोषणा ले सकता है।

बैंक मित्र के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक घोषणा के लिए सफल बायोमेट्रिक ई-केवाईसी का प्रावधान है। इलेक्ट्रॉनिक विकल्प उपलब्ध होने तक कागजी घोषणा दी जा सकती है। बैंक मित्र को प्राप्ति की पावती देनी है। रिकॉर्ड अपडेट होने पर ग्राहक को सूचना देना बैंक की जिम्मेदारी है।

पुराने दस्तावेज की वैधता खत्म हो चुकी हो या वह मौजूदा मानकों के मुताबिक न हो तो प्रक्रिया बदल सकती है। निर्देशों में नियत तारीख से पहले कम से कम तीन सूचनाएं और उसके बाद तीन अनुस्मारक देने का प्रावधान है। दोनों में कम से कम एक पत्र होना चाहिए। यह पहले से लागू प्रक्रिया है, शिविर की नई छूट नहीं।

पेंशन पंजीकरण में उम्र और करदाता की शर्त

अटल पेंशन योजना के लिए पीएफआरडीए के सवाल-जवाब में प्रवेश की उम्र 18 से 40 वर्ष बताई गई है। बचत बैंक या डाकघर बचत खाता होना जरूरी है। एक अक्टूबर 2022 से आवेदन की तारीख पर आयकरदाता रहे या आयकरदाता हों, ऐसे व्यक्ति नया खाता खोलने के पात्र नहीं हैं। यह रोक नए पंजीकरण से जुड़ी है।

30 सितंबर 2022 तक जुड़ चुके लोगों पर करदाता होने के कारण वही रोक लागू नहीं होती। पात्र रहते हुए योजना में जुड़ने के बाद आयकरदाता बनने पर भी खाता जारी रह सकता है। योगदान प्रवेश की उम्र, चुने गए पेंशन स्तर और भुगतान की अवधि पर निर्भर करता है। मासिक, तिमाही या छमाही ऑटो-डेबिट के विकल्प हैं और देरी पर अतिरिक्त ब्याज लगता है।

इस योजना में नामित व्यक्ति का विवरण अनिवार्य है और एक व्यक्ति केवल एक अटल पेंशन खाता रख सकता है। इसलिए शिविर की पंजीकरण सुविधा को सभी लोगों की स्वतः पात्रता या बिना योगदान पेंशन मिलने की घोषणा नहीं समझना चाहिए।

फोन पर दस्तावेज या ओटीपी मांगने वालों से सावधानी

आरबीआई की 29 अगस्त 2024 की चेतावनी में सरकारी योजना का नाम लेकर प्रोसेसिंग शुल्क या सुरक्षा राशि मांगने और खाता बंद करने की धमकी देने जैसे तरीकों का उल्लेख है। यह पुरानी सामान्य चेतावनी है, नए शिविरों में किसी धोखाधड़ी की पुष्टि नहीं। अनजान व्यक्ति को केवाईसी दस्तावेजों की प्रति, पासवर्ड, पिन या ओटीपी न दें।

ऐसा संदेश या लिंक मिलने पर संबंधित बैंक शाखा से पुष्टि करें, अप्रमाणित ऐप या वेबसाइट पर जानकारी दर्ज न करें। आरबीआई स्पष्ट करता है कि वह लोगों के लिए व्यक्तिगत खाते नहीं खोलता और उनमें पैसा जमा करने को नहीं कहता। सरकारी सेवाओं से जुड़ी हमारी अन्य रिपोर्ट: सीपीग्राम्स की शिकायत और अपील व्यवस्था।