उत्तर प्रदेश के शहरी क्षेत्रों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0 के तहत 73,182 घरों को मंजूरी मिली है। नई दिल्ली में 16 अक्टूबर 2026 को हुई केंद्रीय स्वीकृति और निगरानी समिति की दसवीं बैठक में कुल 1.93 लाख से अधिक घर स्वीकृत किए गए। आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय की विज्ञप्ति के अनुसार, इनमें 11 राज्यों के आर्थिक रूप से कमजोर परिवार शामिल हैं।
इस मंजूरी के साथ योजना में स्वीकृत घरों की कुल संख्या 20.80 लाख हो गई है। बैठक की स्वीकृतियां लाभार्थी आधारित निर्माण और भागीदारी में किफायती आवास, यानी बीएलसी और एएचपी, से संबंधित हैं। विज्ञप्ति उत्तर प्रदेश का जिलावार ब्योरा नहीं देती। इसलिए राज्य के आंकड़े से किसी एक शहर में मिलने वाले घरों की संख्या तय नहीं होती।
किन परिवारों के लिए है शहरी आवास सहायता
सितंबर 2024 के योजना दिशानिर्देशों में परिवार की परिभाषा में पति, पत्नी और अविवाहित बेटे या बेटियां आते हैं। परिवार के किसी सदस्य के नाम देश में कहीं भी पक्का घर नहीं होना चाहिए। पिछले 20 वर्षों में केंद्र, राज्य, केंद्रशासित प्रदेश या स्थानीय सरकार की आवास योजना में घर आवंटित होने पर इस योजना का लाभ नहीं मिलता। यह शर्त ग्रामीण और शहरी, दोनों क्षेत्रों में मिले पुराने आवास पर लागू है।
आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए वार्षिक पारिवारिक आय की सीमा तीन लाख रुपये है। राज्यों को मंत्रालय की सहमति से स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार इसे बदलने की गुंजाइश है। मकान परिवार की महिला मुखिया के नाम या पति और पत्नी के संयुक्त नाम होना चाहिए। वयस्क महिला सदस्य न होने पर पुरुष सदस्य के नाम घर हो सकता है। विधुर, अविवाहित, अलग रह रहे या ट्रांसजेंडर आवेदकों के लिए व्यक्तिगत नाम पर स्वामित्व का प्रावधान है। दिशानिर्देश मिशन अवधि में खरीदे गए घर के पंजीकृत दस्तावेज में महिला सदस्य का नाम बाद में जोड़ने की अनुमति भी देते हैं।
आवेदन की रसीद और घर की मंजूरी अलग चरण
मंत्रालय की लाभार्थी आवेदन पुस्तिका ऑनलाइन पोर्टल, कॉमन सर्विस सेंटर और संबंधित नगर निकाय के माध्यम से आवेदन का रास्ता बताती है। बीएलसी फॉर्म में वर्तमान पते और स्थायी पते के अलावा निर्माण स्थल का पता भी दर्ज होता है। आय प्रमाणपत्र की पीडीएफ 200 केबी से छोटी और निर्माण स्थल के जमीन संबंधी दस्तावेज की पीडीएफ पांच एमबी से छोटी होनी चाहिए। सक्रिय बैंक खाते और आईएफएससी का विवरण भी फॉर्म का हिस्सा है।
एएचपी आवेदन में प्रस्तावित परियोजना के राज्य, जिले और शहर की जानकारी मांगी जाती है। आवेदक को यह भी बताना होता है कि उसने कोई एएचपी परियोजना पहचान ली है या नहीं। पुस्तिका के मुताबिक, अंतिम रूप से सेव करने के बाद फॉर्म में बदलाव नहीं किया जा सकता। इसके बाद आवेदन संख्या और पावती बनती है। पावती आवेदन को जांच और आगे की कार्रवाई के लिए संबंधित नगर निकाय को भेजे जाने की पुष्टि करती है। यह प्रक्रिया पूरी होना अपने आप मकान आवंटन का प्रमाण नहीं है।
मंजूरी के बाद निर्माण और कब्जे की प्रक्रिया
एएचपी के लिए अप्रैल 2026 की मानक संचालन प्रक्रिया मंजूरी के बाद भी कई काम निर्धारित करती है। एएचपी ऐप में परियोजना की जगह, टावरों की संख्या और हर टावर के फ्लैट दर्ज किए जाते हैं। निर्माण की अलग अवस्थाओं की जियो टैगिंग होती है। अमल करने वाली एजेंसियों को पोर्टल पर भौतिक और वित्तीय प्रगति, तस्वीरें तथा धन के उपयोग का विवरण नियमित रूप से अद्यतन करना है। इससे स्वीकृति के बाद काम की प्रगति का अलग रिकॉर्ड बनता है।
इसी प्रक्रिया में परियोजना पूरी होने पर संबंधित अधिकारियों से अग्नि सुरक्षा, सीवर, बिजली और लिफ्ट जैसी सेवाओं के आवश्यक अनापत्ति तथा पूर्णता प्रमाणपत्र लेने का प्रावधान है। चयनित लाभार्थी के नाम पंजीकरण के बाद मकान का आवंटन और वास्तविक हस्तांतरण किया जाता है। कब्जे से पहले निर्माण एजेंसी को निवासियों के लिए घर और साझा सुविधाओं के सुरक्षित उपयोग तथा रखरखाव का प्रशिक्षण आयोजित करना है। एएचपी परियोजनाओं में ऑनलाइन और ऑफलाइन शिकायत व्यवस्था भी निर्धारित है। इन चरणों के कारण घर स्वीकृत होने, तैयार होने और परिवार के वहां रहने पहुंचने की स्थितियां अलग-अलग दर्ज होती हैं।
ग्रामीण आवास की व्यवस्था अलग है। Dalimss News की आंध्र प्रदेश के ग्रामीण आवास कार्यक्रम और ग्रामीण रोजगार के अनुमत कार्यों पर पिछली रिपोर्टें उस संदर्भ को समझाती हैं।








