गांव में रोजगार गारंटी के तहत अब कौन से काम कराए जा सकते हैं, इसकी नई सूची जारी हो गई है। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 6 अक्टूबर 2026 को विकसित भारत रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) यानी VB-G RAM G अधिनियम, 2025 के तहत अनुमन्य कार्यों की अनुसूची अधिसूचित की है। इसमें कुल 375 काम रखे गए हैं।

पुराने ढांचे में ऐसे 266 काम थे। यानी सूची करीब 41 प्रतिशत बड़ी हुई है। मंत्रालय की विज्ञप्ति के मुताबिक इन कामों को चार हिस्सों में बांटा गया है: जल सुरक्षा, बुनियादी ग्रामीण ढांचा, आजीविका से जुड़ा ढांचा और चरम मौसम व आपदा से बचाव के विशेष काम।

सबसे ज्यादा 128 काम जल सुरक्षा के हैं। इनमें चेक डैम, गली प्लग, भूमिगत डाइक, रिचार्ज शाफ्ट, इंजेक्शन वेल, नदियों, छोटी धाराओं और नालों का पुनर्जीवन, जलभराव वाली जमीन को सुधारना और खेतों तक पानी ले जाने वाली नालियों की मरम्मत शामिल है। ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई, छत पर वर्षा जल संचयन और टांके भी सूची में हैं। पहाड़ी इलाकों के लिए आइस स्तूप और कृत्रिम ग्लेशियर जैसे काम भी जोड़े गए हैं।

बुनियादी ग्रामीण ढांचे के 111 काम हैं। इनमें सोलर स्ट्रीट लाइट, कचरे से उपयोगी सामान बनाने वाले रीसाइक्लिंग प्लांट, घरों के इस्तेमाल किए पानी को साफ करने की इकाइयां, कचरा छंटाई शेड, ग्रामीण पुस्तकालय, पशु चिकित्सा और ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र, कॉमन सर्विस सेंटर और युवा केंद्र आते हैं। सरकारी स्कूलों में अतिरिक्त कक्षाएं और प्रयोगशालाएं बनाना भी अब इसी सूची का हिस्सा है। जल जीवन मिशन की पेयजल व्यवस्था की मरम्मत और रखरखाव, गांव के पार्क और फुटपाथ भी इसमें रखे गए हैं।

सबसे बड़ा बदलाव आजीविका वाले कामों में दिखता है। इस श्रेणी में 98 काम हैं और कुल सूची में इनका हिस्सा 26 प्रतिशत है, जबकि पिछले ढांचे में यह केवल 1.1 प्रतिशत था। इसमें कृषि उपज के प्रसंस्करण, सफाई, ग्रेडिंग और पैकिंग की इकाइयां, कोल्ड स्टोरेज, छोटी आटा चक्की, मंडी यार्ड, डेयरी ढांचा, मशरूम और रेशम कीट पालन के शेड, पॉली हाउस और मछली पालन के ढांचे शामिल हैं। स्वयं सहायता समूहों के लिए वर्कशेड, SHE मार्ट और संघ भवन भी बनाए जा सकेंगे।

पहली बार आपदा तैयारी और चरम मौसम के लिए अलग श्रेणी बनी है, जिसमें 38 काम हैं। इनमें बाढ़ राहत आश्रय, रिटेनिंग वॉल, तटबंधों को मजबूत करना, बाढ़ से बचाव के काम, आपदा के बाद ग्रामीण सड़कों और सामुदायिक संपत्तियों की बहाली और जंगल की आग रोकने के लिए फायर लाइन शामिल हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के जिन गांवों में हर साल बाढ़ आती है, वहां के लिए तटबंध और राहत आश्रय जैसे काम अब सीधे सूची में दर्ज हैं।

किसानों और कमजोर परिवारों पर अलग से जोर है। 181 काम कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों के हैं, जिनमें 52 ऐसे हैं जो किसी एक लाभार्थी की जमीन या संपत्ति पर हो सकते हैं। 107 काम अंत्योदय यानी सबसे कमजोर परिवारों के लिए चिह्नित हैं, जिनमें 68 व्यक्तिगत लाभार्थी वाले हैं। महिलाओं के समूहों से जुड़े 36 और युवाओं से जुड़े 36 काम भी रखे गए हैं। सरकारी भवनों में दिव्यांगजनों के लिए सीढ़ी और रैंप बनाने का प्रावधान भी है।

ये सारे काम ऊपर से तय नहीं होंगे। हर काम विकसित ग्राम पंचायत योजना से निकलेगा, जिसे ग्राम सभा मंजूरी देगी, और उसकी निगरानी विकसित भारत राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना स्टैक पर डिजिटल तरीके से होगी। इसलिए अगर गांव में चेक डैम, स्कूल की कक्षा या बाढ़ आश्रय की जरूरत है, तो उसे ग्राम सभा की बैठक में प्रस्ताव के रूप में रखवाना पहला कदम है। हाल में हुई 2 अक्टूबर की विशेष ग्राम सभाओं पर हमारी रिपोर्ट में यही योजना प्रक्रिया समझाई गई थी।

यह अधिनियम मनरेगा, 2005 की जगह लाया गया है। राष्ट्रपति ने दिसंबर 2025 में इसे मंजूरी दी थी और 21 दिसंबर 2025 की सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार इसमें हर ग्रामीण परिवार को साल में कम से कम 125 दिन मजदूरी वाले काम की कानूनी गारंटी है, जबकि पहले यह 100 दिन थी। राज्य बुवाई और कटाई के व्यस्त मौसम में साल भर में कुल 60 दिन तक काम रोकने की अधिसूचना जारी कर सकते हैं, लेकिन 125 दिन की गारंटी बाकी समय में पूरी करनी होगी। मजदूरी हर हफ्ते या काम पूरा होने के 15 दिन के भीतर देनी होगी।

कानून 1 जुलाई 2026 से देश भर में लागू हुआ। उस दिन जारी विज्ञप्ति के अनुसार अब देश में कहीं भी अधिसूचित मजदूरी 300 रुपये से कम नहीं है। राष्ट्रीय औसत मजदूरी 298.8 रुपये से बढ़कर 327.4 रुपये प्रतिदिन हुई और उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड जैसे राज्यों में 15 से 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई। खर्च का बंटवारा केंद्र और राज्यों के बीच 60:40 का है।

नई सूची का सीधा असर गांव में मिलने वाले काम के प्रकार पर पड़ेगा। अब तक ज्यादातर काम मिट्टी, तालाब और कच्ची सड़क तक सीमित माने जाते थे। अब कोल्ड स्टोरेज, डेयरी शेड और स्कूल की कक्षा जैसे काम भी योजना में लिए जा सकते हैं। ग्रामीण आवास और ढांचे पर केंद्र की दूसरी योजनाओं के बारे में पीएम आवास ग्रामीण पर हमारी पिछली रिपोर्ट भी पढ़ी जा सकती है।