सीपीग्राम्स पर केंद्र सरकार के मंत्रालयों और विभागों ने सितंबर में 2,38,579 शिकायतों का निस्तारण किया। प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग ने 13 अक्टूबर को जारी रिपोर्ट में यह जानकारी दी। साल 2026 में केंद्रीय शिकायतों के निस्तारण में औसतन 13 दिन लगे हैं। यह पूरे तंत्र का औसत है। किसी एक शिकायत पर इतने ही दिन में संतोषजनक जवाब मिलने का वादा नहीं है।

रिपोर्ट में निस्तारण और नागरिक की संतुष्टि के आंकड़े अलग हैं। केंद्रीय विभागों से जुड़ी 1,11,794 प्रतिक्रियाओं में 48,741 मामलों का समाधान बताया गया। इनमें 39,436 नागरिक संतुष्ट थे। इसलिए करीब 81 प्रतिशत संतुष्टि का आंकड़ा केवल उन मामलों का है जिनका समाधान बताया गया, सभी शिकायतों का नहीं।

निस्तारण की गिनती और शिकायत का समाधान

राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की अलग रिपोर्ट में सितंबर के दौरान 99,134 शिकायतें मिलने और 1,15,168 का निस्तारण होने की जानकारी है। महीने के अंत में 2,37,128 शिकायतें लंबित थीं। ये आंकड़े राज्य स्तर की शिकायतों के हैं। इन्हें केंद्रीय मंत्रालयों के आंकड़ों में मिलाकर किसी एक विभाग की कामयाबी या नागरिकों की संतुष्टि का प्रतिशत निकालना सही नहीं होगा। दोनों रिपोर्टों का दायरा अलग है।

उत्तर प्रदेश ने सितंबर में 45,970 शिकायतों का निस्तारण दर्ज किया। आंध्र प्रदेश का आंकड़ा 8,340 और हरियाणा का 6,437 रहा। ये निपटाए गए मामलों की संख्या हैं, सेवा की गुणवत्ता की समग्र रैंकिंग नहीं। देशभर में सितंबर में 92,822 नए उपयोगकर्ता जुड़े, जिनमें 15,742 उत्तर प्रदेश के थे। रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिम बंगाल ने 22 सितंबर को सीपीग्राम्स से अपना पूरा एकीकरण कर लिया था।

सीपीग्राम्स सरकारी सेवा से जुड़ी शिकायत दर्ज करने का चौबीसों घंटे उपलब्ध ऑनलाइन माध्यम है। शिकायत दर्ज होने पर मिला पंजीकरण नंबर संभालकर रखें। उसी नंबर से पोर्टल पर स्थिति देखी जा सकती है। पोर्टल केंद्र के मंत्रालयों और विभागों के साथ राज्यों से भी जुड़ा है, लेकिन आवेदन का निस्तारण संबंधित प्रशासन को करना होता है।

सरकार शिकायत दर्ज करने का शुल्क नहीं लेती। कॉमन सर्विस सेंटर से मदद लेने पर उसके सेवा शुल्क का सवाल अलग है। पोर्टल साफ कहता है कि ईमेल से भेजी गई शिकायतें इस माध्यम में स्वीकार नहीं की जातीं। आरटीआई और अदालत में विचाराधीन मामलों के लिए भी इसे विकल्प न मानें।

जवाब से असंतुष्ट हों तो समय पर अपील करें

विभाग के सवाल-जवाब पृष्ठ के अनुसार शिकायत के निस्तारण की समयसीमा 21 दिन है। देरी हो तो वजह बताते हुए अंतरिम उत्तर दिया जाना चाहिए। तय समय में जवाब न मिले तो संबंधित मंत्रालय या विभाग के लोक शिकायत निदेशक से मामला उठाया जा सकता है। राज्य सरकार से जुड़ी शिकायत संबंधित राज्य या केंद्रशासित प्रदेश को भेजी जाती है। लंबित राज्य मामले पर उसी प्रशासन से भी जानकारी ली जा सकती है।

केंद्रीय मंत्रालय या विभाग के जवाब से असंतुष्ट आवेदक के लिए अपील की व्यवस्था है। सवाल-जवाब पृष्ठ अपील दाखिल करने के लिए 30 दिन बताता है। आवेदन बंद होने के बाद मिले जवाब को पढ़ना और समय पर अपनी प्रतिक्रिया देना इसलिए जरूरी है। इंटरनेट उपलब्ध न हो तो डाक से सादे कागज या पोस्टकार्ड पर शिकायत भेजी जा सकती है। इस लिखित शिकायत का कोई तय प्रारूप नहीं है।

23 अगस्त 2024 के विस्तृत दिशानिर्देश, जो अभी पोर्टल पर उपलब्ध हैं, विभागों की जिम्मेदारी भी बताते हैं। कोई कार्यालय सिर्फ यह कहकर शिकायत बंद न करे कि विषय उससे संबंधित नहीं है। उसे सही अधिकारी तक पहुंचाने का प्रयास करना चाहिए। यदि समस्या सुलझाने में अधिक समय लगे तो अंतरिम जवाब में कारण के साथ संभावित समयसीमा बताई जाए। यह पुराने दिशानिर्देशों का प्रावधान है, अक्टूबर में घोषित नया नियम नहीं।

अपील पर संबंधित अपीलीय अधिकारी को स्वतंत्र रूप से विचार करना है। दिशानिर्देश अपील के निस्तारण के लिए 30 दिन की समयसीमा बताते हैं। इसे आवेदक की अपील दाखिल करने वाली 30 दिन की अवधि से अलग समझें। पहली अवधि नागरिक के अगले कदम से जुड़ी है, दूसरी अधिकारी की कार्रवाई से। मूल आवेदन, पंजीकरण नंबर और जवाब साथ रखने से यह स्पष्ट रहेगा कि आप किस निर्णय पर दोबारा विचार चाहते हैं।

पोर्टल के अनुसार शिकायत बंद होने के बाद खराब प्रतिक्रिया देने पर अपील का विकल्प खुलता है। अपील की स्थिति भी पंजीकरण नंबर से देखी जा सकती है।

स्थानीय स्तर पर शिकायत उठाने के दूसरे रास्तों पर भी Dalimss News ने जानकारी दी है। गुरुग्राम के समाधान शिविरों की व्यवस्था अलग है। वाराणसी में शिकायत बंद करने से पहले शिकायतकर्ता की पुष्टि लेने के निर्देश पर हमारी पिछली रिपोर्ट भी पढ़ी जा सकती है। इन स्थानीय प्रक्रियाओं को सीपीग्राम्स की अपील व्यवस्था से जुड़ा हुआ न मानें।