डाक विभाग और ब्लू डार्ट ने पार्सल पहुंचाने के लिए समझौता किया है। 9 अक्टूबर को नई दिल्ली में हुए इस समझौते के तहत ब्लू डार्ट, इंडिया पोस्ट के नेटवर्क का इस्तेमाल शहरों के साथ कस्बों, गांवों और दूरदराज के इलाकों में डिलीवरी के लिए करेगी।

संचार मंत्रालय की विज्ञप्ति के मुताबिक व्यवस्था में पहले से भुगतान वाले पार्सल और कैश ऑन डिलीवरी, दोनों शामिल हैं। सामान पहुंचने की पुष्टि ओटीपी से करने और पार्सल की स्थिति रियल टाइम में देखने की सुविधा भी समझौते का हिस्सा है।

मंत्रालय ने बताया कि ब्लू डार्ट को देशभर में 1.64 लाख डाकघरों के नेटवर्क तक पहुंच मिलेगी। डाक विभाग के लिए इससे अपने पार्सल नेटवर्क में अतिरिक्त काम आने की संभावना है। समझौते का जोर ई-कॉमर्स की डिलीवरी व्यवस्था पर है।

अभी विज्ञप्ति में अलग-अलग पिनकोड पर सेवा शुरू होने की तारीख, ग्राहक से लिया जाने वाला शुल्क या तय डिलीवरी समय नहीं बताया गया है। इसलिए किसी ऑर्डर के जल्दी या सस्ते पहुंचने की गारंटी इस घोषणा से नहीं निकलती।

पार्सल के आखिरी सफर में डाक नेटवर्क की भूमिका

इंडिया पोस्ट की पार्सल लास्ट माइल सेवा पहले से थोक और अनुबंध वाले ग्राहकों, खासकर ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए है। इसमें पार्सल डिलीवरी वाले डाकघर या तय पार्सल हब में दिए जाते हैं। वहां से संबंधित डाकघर के स्थानीय क्षेत्र में उन्हें प्राप्तकर्ता तक पहुंचाया जाता है।

इस सामान्य सेवा के आधिकारिक विवरण में अधिकतम वजन पांच किलोग्राम है। डिलीवरी का प्रमाण, बीमा और कैश ऑन डिलीवरी जैसी अतिरिक्त सुविधाएं लागू शुल्क पर उपलब्ध हैं। ये लास्ट माइल उत्पाद के सार्वजनिक नियम हैं। इन्हें अपने आप ब्लू डार्ट के नए समझौते की पूरी व्यावसायिक शर्तें नहीं माना जा सकता।

छोटे ऑनलाइन विक्रेता के लिए इसका मतलब समझना आसान है। लंबी दूरी तक माल पहुंचाने के बाद भी गोदाम से ग्राहक के घर तक का हिस्सा बाकी रहता है। लास्ट माइल व्यवस्था इसी स्थानीय हिस्से के लिए होती है। किसी खास विक्रेता की सेवा में बदलाव उसके बुकिंग समझौते और चुने गए उत्पाद से तय होगा।

सीधे डाकघर से भेजने वाला पार्सल अलग सेवा है

आम ग्राहक के लिए डाकघर में उपलब्ध इंडिया पोस्ट पार्सल रिटेल की अपनी शर्तें हैं। विभाग का पेज इसे व्यक्तिगत और थोक, दोनों ग्राहकों के लिए बताता है। यह सामान्यतः सड़क या अन्य सतही माध्यम से भेजा जाता है। इसकी बुकिंग को हर स्थिति में एक्सप्रेस डिलीवरी समझना ठीक नहीं होगा।

रिटेल पार्सल की पैकिंग तय नियमों के अनुरूप होनी चाहिए और उसके साथ निर्धारित घोषणा देनी होती है। विभाग ने प्राप्तकर्ता विशेष डिलीवरी, कैश ऑन डिलीवरी, बीमा और डिलीवरी का प्रमाण जैसी अतिरिक्त सेवाओं का भी उल्लेख किया है। कौन सी सुविधा चाहिए, यह बुकिंग के समय स्पष्ट करना उपयोगी है।

डाकघर से खुद पार्सल भेजना और किसी ऑनलाइन दुकान से सामान मंगाना, ग्राहक के लिए दो अलग प्रक्रियाएं हैं। पहले मामले में वह डाक सेवा चुनता है; दूसरे में विक्रेता का चुना हुआ डिलीवरी नेटवर्क काम करता है। नई साझेदारी के नाम पर दोनों सेवाओं के शुल्क या शर्तें एक जैसी मान लेना सही नहीं होगा।

ट्रैकिंग और शिकायत के लिए क्या देखें

ब्लू डार्ट का आधिकारिक ट्रैकिंग पेज वेबिल नंबर या बुकिंग के समय मिले रेफरेंस नंबर से पार्सल की स्थिति देखने देता है। कंपनी के मुताबिक भेजे जाने की तारीख से 90 दिन तक शिपमेंट ट्रैक किया जा सकता है। खरीदार को विक्रेता से मिला पार्सल नंबर संभालकर रखना चाहिए।

कंपनी ऑनलाइन दुकानों के लिए ऐसे ट्रैकिंग साधन भी बताती है, जिनमें ऑर्डर नंबर से उसी दुकान की वेबसाइट पर शिपिंग और डिलीवरी की स्थिति दिखाई जा सकती है। इसलिए पहले ऑर्डर पेज और उसके अधिकृत ट्रैकिंग लिंक को देखना मददगार होगा। केवल साझेदारी की खबर देखकर किसी अनजान संदेश को सही न मानें।

डाक विभाग की शिकायत संबंधी गाइडलाइन ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने और उसकी स्थिति देखने का रास्ता देती है। जिस डाकघर में लेनदेन हुआ हो, वहां शिकायत देकर पावती ली जा सकती है। उचित समय में समाधान न मिलने पर विभाग के अगले वरिष्ठ अधिकारी तक मामला ले जाने की व्यवस्था है।

डाक सेवाओं की स्थानीय तैयारियों पर Dalimss News की वाराणसी में रक्षाबंधन के विशेष काउंटरों की पिछली रिपोर्ट भी पढ़ी जा सकती है। माल और यात्रियों की आवाजाही की व्यापक सरकारी योजना का संदर्भ एकीकृत परिवहन और लॉजिस्टिक्स प्राधिकरण पर हमारी रिपोर्ट में है।