सड़क, रेल, बंदरगाह, हवाई अड्डे और जलमार्ग की योजनाएं अब तक अलग अलग मंत्रालय अपने हिसाब से बनाते रहे हैं। इन्हें एक साथ जोड़कर देखने के लिए केंद्र सरकार एक नई संस्था बना रही है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 6 अक्टूबर को एकीकृत परिवहन और लॉजिस्टिक्स प्राधिकरण (ITLA) की स्थापना को मंजूरी दी। यह एक स्पेशल पर्पज व्हीकल यानी विशेष प्रयोजन इकाई के रूप में बनेगा।
सरकार ने इसकी वजह भी साफ लिखी है। विज्ञप्ति के मुताबिक परिवहन से जुड़े कई मंत्रालयों और एजेंसियों में बिखरी योजना और अमल से लंबे समय से दिक्कतें आती रही हैं। ITLA का काम इसी तालमेल को सुधारना और अलग अलग परिवहन साधनों को आपस में जोड़कर विकसित करने की योजना बनाना होगा।
प्राधिकरण का सबसे बड़ा काम एक राष्ट्रीय परिवहन मास्टर प्लान तैयार करना होगा। इसकी योजना अवधि दस साल या उससे ज्यादा की होगी। इसमें सड़क, रेलवे, बंदरगाह और जहाजरानी, नागरिक उड्डयन, अंतर्देशीय जलमार्ग, तटीय जहाजरानी, शहरी परिवहन और लॉजिस्टिक्स, सब कुछ शामिल रहेगा। परिवहन मंत्रालयों की करीब पांच साल की योजनाएं और सालाना योजनाएं इसी मास्टर प्लान की कसौटी पर परखी जाएंगी।
बड़ी परियोजनाओं पर भी इसकी नजर रहेगी। केंद्र सरकार की 500 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा लागत वाली बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का तकनीकी मूल्यांकन ITLA करेगा। ऐसी परियोजनाओं के अमल की निगरानी और अटकने पर समाधान का तंत्र भी यही देगा। हालांकि परियोजनाओं का वित्तीय मूल्यांकन पहले की तरह मौजूदा व्यवस्था से ही होगा।
एक नई चीज परियोजना पूरी होने के बाद का हिसाब है। ITLA यह भी जांचेगा कि बनकर तैयार हुई परियोजना से असल में क्या फायदा हुआ। यानी कोई एक्सप्रेसवे, रेल लाइन या टर्मिनल जिस मकसद से बना था, वह मकसद पूरा हुआ या नहीं, इसका आकलन एक तय संस्था करेगी। पत्र सूचना कार्यालय के पृष्ठभूमि नोट में इसे पोस्ट इम्प्लीमेंटेशन इम्पैक्ट असेसमेंट कहा गया है।
आम लोगों से इसका सबसे सीधा जुड़ाव आंकड़ों वाले हिस्से में है। ITLA एक राष्ट्रीय परिवहन डेटा भंडार बनाएगा। इसमें जीएसटीएन के ई-वे बिल, फास्टैग, वाहन पोर्टल, जीपीएस आधारित प्रणालियों और शहरों के यातायात प्रबंधन सिस्टम जैसे स्रोतों से आंकड़े जुटाए जाएंगे। इनसे माल की आवाजाही और कहां से कहां तक सामान या लोग जाते हैं, इसका विश्लेषण होगा।
विज्ञप्ति में यह नहीं बताया गया है कि फास्टैग या वाहन जैसे आंकड़े किस रूप में साझा होंगे और उनके इस्तेमाल पर निजता से जुड़े कौन से नियम लागू होंगे। सरकार ने इन आंकड़ों का मकसद योजना, निगरानी और प्रभाव के आकलन तक बताया है। प्राधिकरण का ढांचा और नियम सामने आने पर ही इसकी पूरी तस्वीर साफ होगी।
देश में लोग रोज कैसे सफर करते हैं, इस पर सरकार का पहला बड़ा सर्वे हाल में आया था। उस सर्वे के मुताबिक काम पर जाने वाले 42.6% लोग दोपहिया से चलते हैं, जिस पर राष्ट्रीय घरेलू यात्रा सर्वेक्षण के नतीजों की हमारी रिपोर्ट विस्तार से है। ऐसे आंकड़े और ITLA का डेटा भंडार मिलकर यह बता सकते हैं कि नई सड़क या लाइन कहां सबसे ज्यादा जरूरी है।
पूर्वांचल से जुड़ी कई केंद्रीय परियोजनाएं 500 करोड़ की इस सीमा से कहीं बड़ी हैं। मसलन करीब 600 किलोमीटर लंबे वाराणसी रांची कोलकाता कॉरिडोर की प्रगति पर हमने पहले बताया था, जिसकी लागत लगभग 32,000 करोड़ रुपये बताई गई है। आगे ऐसी परियोजनाओं के तकनीकी मूल्यांकन और निगरानी में ITLA की भूमिका होगी, हालांकि पहले से चल रही परियोजनाओं पर यह व्यवस्था कब से और कैसे लागू होगी, यह विज्ञप्ति में साफ नहीं है।
सरकार के मुताबिक ITLA पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान और राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति के साथ मिलकर काम करेगा। यह 2022 की राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति की समीक्षा और उसे अपडेट करने में सलाह देगा। लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में प्रशिक्षण, कौशल विकास और शोध को बढ़ावा देना भी इसके कामों में शामिल है। पृष्ठभूमि नोट के मुताबिक कोरिया, जापान, अमेरिका, चीन और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भी इस तरह की केंद्रीय संस्थाएं हैं।








