जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक 8 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई। इस बार दरों में बदलाव पर नहीं, प्रक्रिया सुधारों पर जोर रहा। वित्त मंत्रालय के मुताबिक सिफारिशें पंजीकरण, रिटर्न, रिफंड और नोटिस के निपटारे से जुड़ी हैं। ये सिफारिशें हैं, लागू होने के लिए अधिसूचना या कानून में संशोधन जरूरी है।
पंजीकरण से शुरू करें, जो छोटे कारोबारियों को सबसे ज्यादा छूता है। जो आवेदक हर महीने ढाई लाख रुपये से ज्यादा का इनपुट टैक्स क्रेडिट आगे नहीं देना चाहते, उन्हें पोर्टल पर नियम 14ए के तहत पहले से स्वचालित पंजीकरण मिल रहा है। बाकी आवेदनों के लिए परिषद ने दस्तावेजों की साफ सूची वाला परिपत्र, सवाल-जवाब और आवेदन फॉर्म में ड्रॉप-डाउन विकल्प सुझाए हैं, ताकि कमी के कारण आवेदन लौटाए न जाएं।
पंजीकरण में बदलाव कराना भी आसान होगा। मुख्य कारोबारी स्थान को छोड़कर बाकी सभी ब्योरों के संशोधन पोर्टल पर अपने आप मंजूर होंगे। स्वचालित रास्ते से पंजीकृत करदाताओं के लिए कारोबारी स्थान का संशोधन भी अपने आप स्वीकार होगा। पंजीकरण रद्द कराने के आवेदन पहले चरण में उन मामलों में अपने आप स्वीकार होंगे, जहां सारे रिटर्न भरे जा चुके हों और बकाया चुकता हो।
ई-कॉमर्स मंच से बेचने वाले छोटे विक्रेताओं के लिए नया नियम 14बी प्रस्तावित है। जिस राज्य में विक्रेता का अपना ठिकाना नहीं है, वहां वह मंच के गोदाम को अपना मुख्य कारोबारी स्थान घोषित कर सकेगा, बशर्ते वह माल की आपूर्ति करता हो और महीने में ढाई लाख रुपये से ज्यादा क्रेडिट आगे न देता हो। ऐसे मामलों में पंजीकरण सिस्टम शर्तों के साथ अपने आप देगा।
रिटर्न में गलतियों और मिलान की दिक्कतों को घटाने के लिए जीएसटीआर-1 और जीएसटीआर-3बी के आंकड़े मिलाने की सुविधाएं बढ़ेंगी। इनवॉइस मैनेजमेंट सिस्टम में खरीदार किसी दस्तावेज को स्वीकार, अस्वीकार या लंबित रख सकेगा। परिषद ने कहा कि देनदारी और क्रेडिट सुधारने की यह वैकल्पिक व्यवस्था अप्रैल 2027 के रिटर्न से लागू हो सकती है। इससे पहले प्रस्तावित व्यवस्था सार्वजनिक परामर्श के लिए रखी जाएगी।
रिफंड के लिए दो चरण तय हैं। पहले चरण में इलेक्ट्रॉनिक कैश लेजर में जमा अतिरिक्त रकम का पूरा रिफंड सिस्टम बिना अधिकारी के दखल के मंजूर करेगा। पावती या कमी का ज्ञापन देने की सीमा 15 दिन से घटाकर 10 दिन करने की सिफारिश है। निर्यात और उलटे शुल्क ढांचे वाले दावों में दावा की गई रकम का 90 प्रतिशत अस्थायी रूप से अपने आप मंजूर होगा।
नोटिस और जुर्माने में राहत की सिफारिशें खास हैं। धारा 73, 74 और 74ए के तहत कारण बताओ नोटिस तभी जारी होगा, जब विवादित कर 10,000 रुपये या उससे ज्यादा हो। जिन नोटिसों में रकम इससे कम है और जो उस दिन तक लंबित हैं, उनका निपटारा इसी सीमा के आधार पर होगा। धारा 125 के तहत अधिकतम सामान्य जुर्माना 25,000 से घटाकर 10,000 रुपये करने का सुझाव है।
धोखाधड़ी रहित मामलों में आदेश के 30 दिन के भीतर (धारा 73) या 60 दिन के भीतर (धारा 74ए) कर और ब्याज चुकाने पर जुर्माना घटकर 5 प्रतिशत रह जाएगा। ऐसे मामलों में न्यूनतम 10,000 रुपये के जुर्माने की शर्त हटाने की भी सिफारिश है। जिन आदेशों में केवल जुर्माना है, उनमें अपील के लिए पूर्व जमा की ऊपरी सीमा 40 करोड़ रुपये (20 करोड़ केंद्र और 20 करोड़ राज्य) तय होगी।
इनपुट टैक्स क्रेडिट के मोर्चे पर परिषद ने उलटे शुल्क ढांचे में जमा क्रेडिट के रिफंड का दायरा बढ़ाने की बात कही है। इनपुट सेवाओं पर क्रेडिट का रिफंड 1 नवंबर 2026 या उसके बाद लिए गए क्रेडिट पर मिलेगा। पूंजीगत माल का क्रेडिट 1 अप्रैल 2027 या उसके बाद लिया हो, तो रिफंड 60 महीनों में बंटकर मिलेगा। धारा 17(5) के तहत आउटडोर कैटरिंग, स्वास्थ्य और जीवन बीमा जैसी आपूर्तियों पर क्रेडिट की रोक हटाने की भी सिफारिश है।
इन सिफारिशों का असर तारीख पर निर्भर करता है। जो हिस्सा नियमों या कानून में संशोधन मांगता है, वह अधिसूचना आने पर ही लागू होगा, इसलिए आज की तारीख में किसी दुकानदार को अपनी प्रक्रिया बदलने की जरूरत नहीं है। मंत्रालय ने बताया है कि स्पष्टीकरण के लिए सवाल-जवाब जारी किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने इन सिफारिशों का स्वागत करते हुए इन्हें सरल और भरोसे पर टिकी कर व्यवस्था की ओर कदम बताया।
जीएसटी से जुड़ी हाल की खबरों के लिए रिजर्व बैंक की रेपो दर पर फैसला और छोटे और मझोले उद्योगों के लिए ग्रोथ फंड भी पढ़ सकते हैं। पूरी सूची के लिए वित्त मंत्रालय की मूल विज्ञप्ति देखें। निजी कर सलाह के लिए अपने चार्टर्ड अकाउंटेंट से बात करें।


