वाराणसी: शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को शाम 4 बजे के केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के बुलेटिन में शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक 147 दर्ज हुआ। यह 5 नवंबर के 138 से नौ अंक अधिक है और हवा अब भी मध्यम श्रेणी में है। यह नया आंकड़ा है। जैसा कि dalimss.news की पिछली खबर में बताया गया था, 4 नवंबर को सूचकांक 134 था। तीनों आंकड़ों का समय भारतीय मानक समय है।
इस बार शहर के चारों निगरानी केंद्रों के आंकड़े शामिल हैं। बोर्ड की आधिकारिक सूची में अर्दली बाजार, भेलूपुर, बीएचयू के पर्यावरण एवं सतत विकास संस्थान और मलदहिया के केंद्र दर्ज हैं। इन इलाकों में रहने वालों के लिए ध्यान देने वाली बात यह है कि 147 पूरे शहर का औसत सूचकांक है। इसे अपने मोहल्ले या किसी एक केंद्र की अलग रीडिंग नहीं समझना चाहिए।
बोर्ड के अनुसार मध्यम श्रेणी में फेफड़ों की बीमारी, अस्थमा और हृदय रोग वाले लोगों को सांस लेने में परेशानी हो सकती है। ऐसे लोग बाहर की गतिविधियां तय करते समय ताजा स्थानीय जानकारी देखें। यह बुलेटिन पिछली 24 घंटे की स्थिति बताता है, इसलिए इसे शनिवार सुबह की तत्काल रीडिंग मानकर योजना बनाना सही नहीं होगा।
तीन दिनों में क्या बदला
6 नवंबर के आधिकारिक बुलेटिन में वाराणसी के लिए प्रमुख प्रदूषक PM10 लिखा है। 5 नवंबर और 4 नवंबर के बुलेटिन में भी यही प्रदूषक प्रमुख था। नए आंकड़े में श्रेणी बदलने की सूचना नहीं है। बदलाव सूचकांक के स्तर और निगरानी केंद्रों की भागीदारी में दिखता है।
| तारीख और समय | शहर का सूचकांक | श्रेणी | शामिल केंद्र |
|---|---|---|---|
| 4 नवंबर, शाम 4 बजे | 134 | मध्यम | चार में से तीन |
| 5 नवंबर, शाम 4 बजे | 138 | मध्यम | चार में से चार |
| 6 नवंबर, शाम 4 बजे | 147 | मध्यम | चार में से चार |
4 नवंबर से 6 नवंबर के बीच अंतर 13 अंक है। हालांकि पहले दिन एक केंद्र का आंकड़ा शामिल नहीं था। इसलिए इस अंतर को हर मोहल्ले में एक जैसी बढ़ोतरी का प्रमाण नहीं माना जा सकता। 5 और 6 नवंबर की तुलना में दोनों दिन चार केंद्र शामिल थे, फिर भी शहर का औसत स्थानीय अंतर छिपा सकता है।
बुलेटिन में 147 सूचकांक का मान है, हवा में PM10 की मात्रा का माप नहीं। प्रमुख प्रदूषक का नाम बताने से यह भी तय नहीं होता कि प्रदूषण किस गतिविधि से आया। इन बुलेटिनों के आधार पर किसी सड़क, निर्माण स्थल या उत्सव को बढ़ोतरी का कारण बताना संभव नहीं है।
शहर का औसत और मोहल्ले की हवा अलग हो सकती है
बोर्ड बुलेटिन के नीचे स्पष्ट करता है कि कई केंद्र वाले शहरों के लिए औसत मान दिया जाता है। अलग स्थानों पर वायु गुणवत्ता में फर्क हो सकता है। बोर्ड खुद औसत निकालने की इस व्यवस्था की सीमा बताता है और किसी खास केंद्र की स्थिति के लिए अपने पोर्टल की जानकारी देखने को कहता है।
आधिकारिक निगरानी केंद्र सूची में वाराणसी के चारों केंद्र उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नाम से दर्ज हैं। सूची केंद्रों की पहचान बताती है, जबकि दैनिक बुलेटिन यह बताता है कि उस दिन कितने केंद्रों का आंकड़ा शहर के सूचकांक में लिया गया। दोनों सूचनाओं का काम अलग है।
सूचकांक को पढ़ते समय किन बातों का ध्यान रखें
बोर्ड के राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक पृष्ठ पर गणना और उसकी सीमाओं की जानकारी उपलब्ध है। किसी केंद्र पर अलग प्रदूषकों के उपसूचकांक बनते हैं और उनमें सबसे खराब उपसूचकांक उस केंद्र का समग्र सूचकांक तय करता है। सभी प्रदूषकों को जोड़कर 147 जैसा अंक नहीं बनाया जाता।
गणना के लिए कम से कम तीन प्रदूषकों की पर्याप्त जानकारी जरूरी है, जिनमें PM10 या PM2.5 में से एक शामिल होना चाहिए। किसी प्रदूषक का उपसूचकांक निकालने के लिए सामान्यतः कम से कम 16 घंटे के आंकड़े चाहिए। लगातार मिलने वाले आंकड़ों पर आधारित पोर्टल और तय समय का दैनिक बुलेटिन इसलिए एक ही क्षण की तस्वीर नहीं हैं।
बोर्ड की श्रेणियों में 51 से 100 संतोषजनक और 101 से 200 मध्यम है। 201 से 300 खराब श्रेणी है। शुक्रवार का 147 मध्यम दायरे में है। इसे खराब श्रेणी में पहुंचना बताना या संतोषजनक हवा कहना, दोनों ही आधिकारिक वर्गीकरण से मेल नहीं खाएंगे।
वाराणसी के लोग क्या करें
बाहर निकलने या लंबा समय खुले में बिताने की योजना से पहले आंकड़े की तारीख, समय और केंद्र देखें। बीमारी वाले लोगों के लिए बोर्ड का मध्यम श्रेणी संबंधी स्वास्थ्य संदेश प्रासंगिक है।
बोर्ड की सामान्य जन सलाह में अनावश्यक देर तक इंजन चालू रखकर खड़े रहने से बचने का सुझाव है। यह हवा सुधारने में नागरिक भागीदारी की सामान्य सलाह है।
पिछली स्थिति का संदर्भ देखने के लिए 1 नवंबर की वायु गुणवत्ता रिपोर्ट और 30 अक्टूबर की रिपोर्ट उपलब्ध हैं। फिलहाल इस खबर का नवीनतम पुष्ट आधार 6 नवंबर, शाम 4 बजे का बुलेटिन है। अगली तुलना भी उसी तरह तारीख और समय देखकर करनी होगी।








