पूर्णिया से ग्रीस को एक टन फूल मखाना की खेप रवाना, एपीडा ने निर्यात में मदद की

Pankaj Yadav••6 मिनट
गोदाम में जूट की बोरियों पर बैठे कामगार मखाना की सफेद फलियों को छानते और पैक करते हुए, पीछे लकड़ी के क्रेट और पीली रोशनी
प्रतीकात्मक चित्र: Dalimss News के लिए तैयार किया गया चित्र, घटना की वास्तविक तस्वीर नहीं।

बिहार के पूर्णिया से एक मीट्रिक टन फूल मखाना की खेप ग्रीस भेजी जा रही है। कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) ने इस खेप को रवाना करने में मदद की। प्राधिकरण की 2 अक्टूबर 2026 की विज्ञप्ति के अनुसार खेप इंडो ग्लोबल एक्सपोर्ट, बेलौरी, पूर्णिया से मंगवाई गई है और एस.एस. फूड्स एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड, नई दिल्ली के जरिए ग्रीस जा रही है। मार्ग मुंद्रा पोर्ट से ग्रीस के पिराएउस पोर्ट तक है।

एपीडा का कहना है कि इस निर्यात से घरेलू बाजार में मिलने वाली कीमत के मुकाबले ऊंची कीमत मिली। इससे पता चलता है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार मखाना उत्पादकों के लिए अतिरिक्त मूल्य पैदा कर सकते हैं। प्राधिकरण इसे बिहार के पारंपरिक मखाने के लिए बाहरी बाजार तक पहुंच बढ़ाने और किसानों की आमदनी सुधारने की दिशा में एक और कदम बताता है।

बिहार में मखाना उत्पादन

विज्ञप्ति में कहा गया है कि मखाना उत्पादन में भारत दुनिया में आगे है और देश के कुल उत्पादन में बिहार की हिस्सेदारी करीब 80 से 85 प्रतिशत है। बिहार के दस जिलों में 35 हजार हेक्टेयर से अधिक इलाके में मखाने की खेती होती है। क्षेत्र को जमीनी स्तर पर बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र, दरभंगा से तकनीकी मदद मिल रही है।

खेप रवाना करने वाले कार्यक्रम की अध्यक्षता बिहार सरकार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने की। मौके पर एपीडा चेयरमैन अभिषेक देव, राज्य कृषि विभाग के बागवानी निदेशक अभिषेक कुमार, बिहार सरकार के वरिष्ठ अधिकारी और मखाना निर्यात श्रृंखला से जुड़े अन्य लोग मौजूद रहे।

मंत्री और निर्यात के आंकड़े

सिन्हा ने कहा कि यह निर्यात बिहार के मखाना क्षेत्र के लिए उपलब्धि है क्योंकि उत्पाद लगातार अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच रहा है। उन्होंने बताया कि भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में बीस से अधिक अंतरराष्ट्रीय स्थलों पर सात हजार मीट्रिक टन से अधिक मखाना और उससे बने उत्पादों का निर्यात किया, जिनकी कीमत 22 मिलियन अमेरिकी डॉलर थी।

उन्होंने कहा कि बिहार सरकार एक कृषि निर्यात नीति पर काम कर रही है जिसका मकसद किसानों की मदद करना और निर्यात बढ़ाकर उनकी आय बढ़ाना है। उन्होंने यह भी बताया कि मखाना निर्यात श्रृंखला के लिए पैकहाउस बनाए गए हैं। एपीडा के प्रयासों की उन्होंने सराहना की।

यूरोपीय बाजार और आगे की राह

एपीडा का कहना है कि पूर्णिया से ग्रीस को यह खेप बिहार के उत्पादकों और निर्यातकों को बाहरी बाजारों से जोड़ने के बढ़ते काम का हिस्सा है। प्राधिकरण भारतीय मखाने को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने के लिए बाजार से जुड़ाव बना रहा है और निर्यातकों की मदद कर रहा है। विज्ञप्ति के मुताबिक मखाने का निर्यात अब यूरोपीय बाजारों में भी बढ़ रहा है। इससे उत्पादकों के लिए नए मौके खुल रहे हैं और पारंपरिक बाजारों के अलावा दूसरे बाजारों में कारोबार बढ़ाने के रास्ते बन रहे हैं।

एपीडा इन प्रयासों से बिहार के मखाना उत्पादकों को अंतरराष्ट्रीय मांग से जोड़ने की बात कहता है। किसानों के लिए बेहतर आमदनी और निर्यात श्रृंखला में उत्पादक समूहों की ज्यादा भागीदारी के मौके पैदा होने का जिक्र भी विज्ञप्ति में है। आधिकारिक ब्यौरा पत्र सूचना कार्यालय पर उपलब्ध विज्ञप्ति में पढ़ा जा सकता है।

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स्रोत और रिपोर्टिंग

कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) की विज्ञप्ति, पत्र सूचना कार्यालय, 2 अक्टूबर 2026: https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2318162

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