दलहन में आत्मनिर्भरता के लिए चल रहे केंद्रीय मिशन के पहले चरण में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को 528 प्रसंस्करण इकाइयां आवंटित की गई हैं। सरकार ने मिशन के एक साल पूरे होने पर 11 अक्टूबर 2026 को जारी विवरण में यह जानकारी दी। पूरे मिशन में 1,000 दाल मिलें स्थापित करने का लक्ष्य है।
यह आवंटन का आंकड़ा है, 528 मिलों के चालू हो जाने का नहीं। पीआईबी के विवरण में इन इकाइयों की राज्यवार सूची या उनके संचालन की तारीखें नहीं दी गई हैं। इसलिए किसी जिले में नई मिल शुरू होने की पुष्टि इस राष्ट्रीय आंकड़े से नहीं की जा सकती।
मिशन 11 अक्टूबर 2025 को शुरू हुआ था। इसके लिए 2025-26 से 2030-31 तक छह वर्ष की अवधि में 11,440 करोड़ रुपये का प्रावधान है। यह पूरी अवधि का निर्धारित वित्तीय आकार है; इसे पहले साल में खर्च हुई राशि नहीं माना जाना चाहिए।
प्रसंस्करण और बीज वितरण में क्या जानकारी मिली
सरकारी विवरण खाद्य प्रसंस्करण की एक अलग योजना के आंकड़े भी देता है। प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना के तहत खाद्य प्रसंस्करण और संरक्षण क्षमता सृजन व विस्तार की व्यवस्था में दलहन की 23 इकाइयों को मंजूरी मिली है। इनमें 18 इकाइयां पूरी हो चुकी हैं।
इन 23 मंजूरियों और 18 पूरी हुई परियोजनाओं को मिशन के पहले चरण के 528 आवंटनों के बराबर नहीं रखा जा सकता। विवरण इन्हें अलग कार्यक्रम के तहत बताता है। मंजूरी, राज्यों को आवंटन और निर्माण पूरा होना परियोजना की अलग स्थितियां हैं, जिनसे जमीन पर उपलब्ध क्षमता का अर्थ भी बदलता है।
बीज सहायता के मामले में सरकार ने रबी 2025-26 के दौरान 9.25 लाख बीज किट बांटने की सूचना दी है। छह साल में 87.5 लाख मुफ्त बीज किट का लक्ष्य रखा गया है। इस पहल में धान की कटाई के बाद खाली रहने वाली भूमि पर दलहन बढ़ाने पर भी ध्यान है।
इसके अलावा मिशन में 126 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। 1 अक्टूबर 2025 की मंत्रिमंडलीय मंजूरी में राज्यों की पांच वर्षीय बीज उत्पादन योजनाओं और बीजों की पहचान व निगरानी के लिए साथी पोर्टल का उल्लेख था। ये लक्ष्य अलग-अलग प्रकार की बीज सहायता से जुड़े हैं।
मंत्रिमंडल के मूल निर्णय में नई किस्मों की अलग-अलग क्षेत्रों में जांच का प्रावधान भी था। अधिक उपज के साथ कीटों का प्रतिरोध और स्थानीय जलवायु के अनुकूल किस्मों पर जोर दिया गया था। इससे बीज वितरण की संख्या के साथ उनकी क्षेत्रीय उपयोगिता भी योजना का हिस्सा बनती है।
उत्पादन अनुमान और आयात मूल्य को अलग समझें
सरकार के ताजा विवरण के अनुसार, 2025-26 के तीसरे अग्रिम अनुमान में दलहन उत्पादन 274.09 लाख टन है। पिछले वर्ष का आंकड़ा 256.83 लाख टन बताया गया है। खेती का क्षेत्र 277.20 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 286.46 लाख हेक्टेयर और उत्पादकता 926 से 957 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर हुई है।
आयात के मामले में प्रकाशित तुलना रुपये में है। दलहन आयात का मूल्य 2024-25 के 46,427.60 करोड़ रुपये से घटकर 2025-26 में 31,793.59 करोड़ रुपये बताया गया है, यानी 31.52 प्रतिशत की कमी। इस प्रतिशत को आयातित दाल की मात्रा में उतनी ही गिरावट कहना गलत होगा।
मिशन का 2030-31 तक उत्पादन 350 लाख टन और उत्पादकता 1,130 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तक पहुंचाने का लक्ष्य है। दलहन क्षेत्र 310 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाने और 489 जिलों में समूह आधारित काम करने की योजना है। ये भविष्य के लक्ष्य हैं, पहले वर्ष की उपलब्धियां नहीं।
खरीद व्यवस्था में तूर, उड़द और मसूर पर जोर है। मूल मंजूरी के अनुसार, नाफेड और एनसीसीएफ भाग लेने वाले राज्यों में पंजीकरण और समझौता करने वाले किसानों से खरीद करेंगे। चार साल की व्यवस्था को सभी किसानों की हर फसल की बिना शर्त खरीद का वादा नहीं समझना चाहिए।
कृषि से जुड़े दूसरे विषयों में Dalimss News ने बीज क्षेत्र के लाभ-साझेदारी योगदान और वाराणसी में किसानों के सूक्ष्म सिंचाई प्रशिक्षण पर भी रिपोर्ट की है। दलहन मिशन के इस अपडेट में स्थानीय पाठकों के लिए अगली उपयोगी जानकारी राज्यवार आवंटन और इकाइयों की वास्तविक प्रगति होगी।








