केंद्र ने दिव्यांगजन पेंशन का दायरा बढ़ाने को मंजूरी दी है। 14 अक्टूबर के कैबिनेट फैसले में दिव्यांगता की पात्रता सीमा 80 प्रतिशत से घटाकर 40 प्रतिशत और न्यूनतम आयु जन्म से करने का निर्णय है। सहायता 79 वर्ष तक के लिए 375 रुपये और 80 वर्ष या उससे अधिक के लिए 625 रुपये होगी। बदली पात्रता, लाभार्थियों की संख्या और सहायता दर के दिशा-निर्देश तीन महीने के भीतर जारी कर लागू किए जाने हैं। इसलिए मंजूरी को अभी सभी खातों में बढ़ी राशि आने की पुष्टि नहीं समझना चाहिए।

राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम का नाम प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना होगा। इसे 2026-27 से 2030-31 तक चलाने के लिए 53,428 करोड़ रुपये मंजूर हुए हैं। दिव्यांगजन पेंशन सहित इसकी उप-योजनाओं के नाम भी बदले जाएंगे। वृद्धावस्था, विधवा पेंशन और पारिवारिक लाभ योजना मौजूदा स्वरूप में जारी रहेंगी। सरकार के अनुसार फैसले से 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के कुल 3.20 करोड़ लाभार्थियों को फायदा होगा।

वृद्धावस्था और विधवा पेंशन की पात्रता और दरें

नवंबर 2025 के सरकारी विवरण के अनुसार गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवारों में 60 से 79 वर्ष के पात्र बुजुर्गों के लिए केंद्रीय सहायता 200 रुपये प्रतिमाह है। 80 वर्ष या अधिक उम्र पर यह 500 रुपये है। विधवा पेंशन में 40 से 79 वर्ष के पात्र लाभार्थियों के लिए केंद्रीय हिस्सा 300 रुपये प्रतिमाह और 80 वर्ष से 500 रुपये बताया गया है।

इसी विवरण में राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ के तहत बीपीएल परिवार के मुख्य कमाने वाले सदस्य की मृत्यु पर 20,000 रुपये की एकमुश्त सहायता का प्रावधान है, यदि उसकी उम्र 18 से 59 वर्ष थी। यह नियमित मासिक पेंशन से अलग सहायता है। पात्र लोगों की पहचान में ग्राम पंचायतों और नगर निकायों की भूमिका है। भुगतान लाभार्थी के बैंक या डाकघर खाते के जरिए किया जाता है; अत्यंत कठिन परिस्थितियों में, जब लाभार्थी वहां नहीं जा सकता, घर पर नकद भुगतान की अनुमति भी योजना के दिशा-निर्देश देते हैं।

केंद्रीय सहायता और खाते में मिलने वाली कुल पेंशन हमेशा बराबर नहीं होती। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 17 मार्च 2026 के संसदीय जवाब में स्पष्ट किया था कि राज्य अपने संसाधनों से केंद्रीय हिस्से के ऊपर अतिरिक्त रकम देते हैं। उस समय विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों का अतिरिक्त हिस्सा 50 से 5,700 रुपये प्रतिमाह बताया गया था। यह देशभर में अलग-अलग योजनाओं की सीमा है, किसी एक व्यक्ति या उत्तर प्रदेश के हर लाभार्थी को इतनी अतिरिक्त रकम मिलने की घोषणा नहीं।

उसी जवाब में बताया गया कि केंद्र से राज्यों को राशि डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज लाभार्थियों की संख्या या राज्य के लिए निर्धारित सीमा, दोनों में जो कम हो, उसके आधार पर मिलती है। इसके बाद राज्य जिला या पंचायत स्तर पर भुगतान कराते हैं। मंत्रालय ने सामाजिक, आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियों के कारण अधिक असुरक्षित आवेदकों को प्राथमिकता देने की बात भी रखी। कार्यक्रम के आकलनों में समय पर नियमित भुगतान, सहायता की पर्याप्तता और लाभार्थी सत्यापन को बेहतर बनाने की जरूरत सामने आई थी।

दिव्यांगता प्रमाणपत्र के लिए कहां जाएं

दिव्यांगता का प्रमाणपत्र बनवाने की प्रक्रिया अलग है। दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग की यूडीआईडी मार्गदर्शिका के अनुसार मान्यता प्राप्त 21 दिव्यांगताओं में से किसी से प्रभावित भारतीय नागरिक ऑनलाइन आवेदन कर सकता है। नाबालिग या स्वयं आवेदन करने में असमर्थ व्यक्ति की ओर से कानूनी अभिभावक आवेदन कर सकता है। पोर्टल पर पंजीकरण के बाद फोटो, हस्ताक्षर या अंगूठे का निशान, पहचान प्रमाण और संबंधित चिकित्सा रिकॉर्ड के साथ फॉर्म भरना होता है। सहायता के लिए निर्धारित अस्पताल जाना भी विकल्प है।

विभाग इस सेवा का शुल्क शून्य बताता है और कार्ड आवासीय पते पर स्पीड पोस्ट से मुफ्त भेजा जाता है। आवेदन के बाद चुने हुए अस्पताल के यूडीआईडी प्रकोष्ठ से चिकित्सा आकलन की तारीख लेनी होती है। अस्पताल दस्तावेजों की जांच और निर्धारित मानकों के अनुसार आकलन करके प्रमाणपत्र जारी करता है। पोर्टल के आवेदन-स्थिति विकल्प में नामांकन संख्या, यूडीआईडी संख्या, आधार संख्या या पंजीकृत मोबाइल नंबर से प्रगति देखी जा सकती है। यह पहचान और दिव्यांगता सत्यापन का दस्तावेज है; संबंधित सरकारी योजना का लाभ उसके लागू नियमों के अनुसार मिलता है।

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