प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के एक साल पूरे होने पर उत्तर प्रदेश के चित्रकूट, महोबा और जालौन को अलग-अलग क्षेत्रों में काम के लिए सम्मानित किया गया है। 12 अक्टूबर को नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में चित्रकूट को कृषि उत्पादकता, महोबा को फसल विविधीकरण और टिकाऊ खेती तथा जालौन को कृषि ऋण तक पहुंच की श्रेणी में जगह मिली।
ये श्रेणीवार सम्मान हैं। समग्र प्रदर्शन की राष्ट्रीय सूची में बिहार का गया पहले, राजस्थान का नागौर दूसरे और मध्य प्रदेश का उमरिया तीसरे स्थान पर रहा। इसलिए उत्तर प्रदेश के इन तीन जिलों को समग्र सूची के शीर्ष तीन जिले बताना सही नहीं होगा। कृषि मंत्रालय ने दोनों तरह की पहचान अलग-अलग बताई है।
योजना के छह उद्देश्यों के तहत कुल 18 जिलों को सम्मानित किया गया। इसमें फसल कटाई के बाद भंडारण बढ़ाने, सिंचाई सुविधाओं और प्रशासनिक सेवाओं से जुड़े काम भी शामिल हैं। मंत्रालय की आधिकारिक सूचना के अनुसार, दूसरे वर्ष में ध्यान ऐसी प्रगति पर रहेगा जिसका असर खेत और किसान के जीवन में मापा जा सके।
हर जिले की जरूरत से बनती है योजना
धन-धान्य कृषि योजना 11 अक्टूबर 2025 को शुरू हुई थी और 11 अक्टूबर 2026 को उसका पहला वर्ष पूरा हुआ। इसके दायरे में 100 ऐसे जिले हैं जहां कृषि उत्पादकता, फसल सघनता और कृषि ऋण का वितरण कम है। चयन का यह आधार बताता है कि योजना का ध्यान पहले से बेहतर प्रदर्शन करने वाले जिलों को पुरस्कृत करने से कहीं आगे है।
इसमें 11 मंत्रालयों और विभागों की 36 केंद्रीय योजनाओं को संबंधित राज्य योजनाओं के साथ जोड़कर काम किया जाता है। उद्देश्य जिले की जरूरत के अनुसार मौजूद संसाधनों का इस्तेमाल करना है। 12 अक्टूबर के कार्यक्रम में किसी नई समान नकद सहायता या हर किसान के लिए एक जैसे भुगतान की घोषणा नहीं की गई।
जिला कार्ययोजना बनाते समय मिट्टी और बारिश की स्थिति, फसल का चलन तथा पानी की उपलब्धता देखी जाती है। स्थानीय ढांचा और किसानों की जरूरतें भी आधार हैं। इसलिए एक जिले में सफल तरीका दूसरे जिले में उसी रूप में लागू होगा, यह मान लेना ठीक नहीं है। वहां की परिस्थितियों के अनुसार योजना की उपयोगिता परखनी होगी।
मंत्रालय के मुताबिक, जिलों की प्रगति 121 संकेतकों वाले डैशबोर्ड से देखी जाती है और हर महीने रैंकिंग होती है। जिला धन-धान्य समितियों की भूमिका योजना और उसके अमल के बीच तालमेल की है। केंद्रीय तथा जिला नोडल अधिकारियों के साथ कृषि विज्ञान केंद्रों के वैज्ञानिक और मैदानी कर्मचारी भी इस काम से जुड़े हैं।
रैंकिंग या सम्मान किसी खास अवधि के काम की पहचान है। उससे अपने आप यह साबित नहीं होता कि जिले के प्रत्येक किसान की आय बढ़ गई या सभी खेतों में उत्पादन सुधर गया। ऐसी बात के लिए अलग आंकड़े चाहिए। ताजा सूचना में उत्तर प्रदेश के सम्मानित जिलों के लिए किसानवार आय या फसल उपज में वृद्धि के आंकड़े नहीं दिए गए हैं।
दूसरे साल क्या देखा जाएगा
कार्यक्रम में कुछ जिलों ने अपने काम के उदाहरण रखे। मंत्रालय के अनुसार, गडचिरोली ने जल संरक्षण और सूखे से निपटने की तैयारी, अल्लूरी सीताराम राजू जिले ने अधिक मूल्य वाली बागवानी तथा बांका ने प्राकृतिक खेती से जमीन को फिर उपयोगी बनाने का मॉडल प्रस्तुत किया। ये जिलों की प्रस्तुतियां थीं; हर जगह समान परिणाम मिलने का दावा नहीं किया गया।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दूसरे वर्ष में उत्पादन और फसल सघनता बढ़ाने, सिंचाई तथा पानी के बेहतर प्रबंधन पर ध्यान देने को कहा। कृषि ऋण, भंडारण और किसानों की आय से जुड़े परिणामों को भी उन्होंने कसौटी बताया। इन्हें आगे की प्राथमिकताओं के रूप में पढ़ना चाहिए, पहले ही हासिल उपलब्धियों के रूप में नहीं।
मंत्री ने 22 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 तक प्रस्तावित खेत बचाओ अभियान का भी उल्लेख किया। इसका उद्देश्य उर्वरकों के संतुलित इस्तेमाल के जरिए मिट्टी की सेहत पर ध्यान देना है। घोषणा में राज्यों से भागीदारी का अनुरोध है, लेकिन जिलेवार कार्यक्रम या किसान पंजीकरण की एक साझा प्रक्रिया नहीं दी गई है।
कृषि से जुड़ी अलग खबरों में Dalimss News ने दलहन मिशन के तहत प्रसंस्करण इकाइयों के आवंटन और जैव विविधता लाभ साझा करने की राशि पर रिपोर्ट किया है। धन-धान्य योजना का ताजा कार्यक्रम उनसे अलग है। अब इसकी जिला कार्ययोजनाओं को जमीन पर पूरा करने और घोषित उद्देश्यों के मुकाबले वास्तविक प्रगति दिखाने की बारी है।








