मोबाइल से जुड़ी ठगी से बचने के लिए बना सरकारी पोर्टल संचार साथी 30 करोड़ से ज्यादा बार खोला जा चुका है। दूरसंचार विभाग ने 5 अक्टूबर 2026 को जारी विज्ञप्ति में बताया कि मई 2023 में शुरू हुए इस पोर्टल की मदद से अब तक 60.96 लाख खोए या चोरी हुए मोबाइल ब्लॉक किए गए, 37.85 लाख का पता लगाया गया और 14 लाख से ज्यादा फोन उनके मालिकों तक लौटे।

विभाग के अनुसार संचार साथी ऐप 2.8 करोड़ से ज्यादा बार डाउनलोड हुआ है और यह अंग्रेजी, हिंदी और 21 क्षेत्रीय भाषाओं में चलता है। लोगों की शिकायतों के आधार पर 50 लाख से ज्यादा मोबाइल कनेक्शन काटे गए हैं। विभाग का दावा है कि उसके वित्तीय धोखाधड़ी जोखिम संकेतक (FRI) से 5,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का संदिग्ध साइबर नुकसान रोका गया।

आंकड़े अपनी जगह हैं, असली सवाल यह है कि आम मोबाइल उपभोक्ता इस पोर्टल से क्या कर सकता है। नीचे हर सुविधा का तरीका पोर्टल के अक्सर पूछे जाने वाले सवालों वाले हिस्से के आधार पर दिया गया है। पोर्टल का पता sancharsaathi.gov.in है और यही सुविधाएं संचार साथी की आधिकारिक वेबसाइट और ऐप दोनों पर मिलती हैं।

पहली सुविधा है अपने नाम पर चल रहे मोबाइल कनेक्शन जानना। नियम के अनुसार एक व्यक्ति देश की सभी कंपनियों को मिलाकर अधिकतम 9 मोबाइल कनेक्शन ले सकता है। जम्मू कश्मीर, असम और पूर्वोत्तर राज्यों में यह सीमा 6 है। पोर्टल पर अपने मोबाइल नंबर पर आए OTP से लॉगिन करते ही आपके पहचान पत्र पर जारी सारे नंबर दिख जाते हैं।

अगर इनमें कोई नंबर आपका नहीं है या अब जरूरत नहीं है, तो उसके आगे 'This is not my number' या 'Not required' चुनकर Report बटन दबाएं। ऐसे नंबर को कंपनी दोबारा सत्यापन के लिए चिह्नित करती है। सत्यापन न होने पर 30 दिन में उस नंबर की आउटगोइंग सेवा, 45 दिन में इनकमिंग सेवा बंद होती है और 60 दिन के भीतर कनेक्शन काट दिया जाता है। विदेश में रोमिंग, दिव्यांगता या अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति में 30 दिन का अतिरिक्त समय मिल सकता है।

दूसरी सुविधा खोए या चोरी हुए फोन को ब्लॉक करने की है। इसके लिए पहले पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराकर उसकी कॉपी रखें। फिर अपनी कंपनी से खोए हुए नंबर का डुप्लिकेट सिम लें, क्योंकि फॉर्म भरते समय OTP इसी नंबर पर आता है। TRAI के नियम के कारण नए जारी सिम पर SMS सुविधा 24 घंटे बाद शुरू होती है, इसलिए एक दिन का समय लग सकता है। पुलिस रिपोर्ट की कॉपी और पहचान पत्र जरूरी है, फोन का बिल हो तो वह भी लगा सकते हैं।

फॉर्म जमा होते ही एक Request ID मिलती है, जिसे संभालकर रखें। पोर्टल के अनुसार शिकायत वाला फोन 24 घंटे के भीतर देश के सभी नेटवर्क पर बंद कर दिया जाता है। अगर कोई उस फोन को इस्तेमाल करने की कोशिश करता है, तो उसकी ट्रेसिंग रिपोर्ट बनती है। इसकी सूचना SMS से आपको मिलती है और रिपोर्ट उस थाने को भेजी जाती है जहां शिकायत दर्ज है। फोन मिल जाने पर पहले पुलिस को बताएं, फिर उसी Request ID से अनब्लॉक का फॉर्म भरें।

तीसरी सुविधा फोन असली है या नहीं, यह जांचने की है। त्योहारों में बहुत से लोग पुराना फोन बेचते या सेकंड हैंड फोन खरीदते हैं। खरीदने से पहले फोन में *#06# डायल करके उसका 15 अंकों का IMEI नंबर देखें और उसे पोर्टल पर डालें, या KYM लिखकर उसके बाद IMEI नंबर 14422 पर SMS करें। जवाब में फोन की कंपनी, ब्रांड, मॉडल और डिवाइस का प्रकार आता है। दो सिम वाले फोन में दो IMEI नंबर होते हैं। पुराना फोन बेचने से पहले क्या करें, यह हमारी पुराना फोन बेचने या एक्सचेंज करने की चेकलिस्ट में है।

चौथी सुविधा चक्षु है। इसमें फर्जी KYC या बिल भुगतान के संदेश, खुद को सरकारी अफसर, पुलिस या बैंक कर्मचारी बताने वाले कॉल और निवेश, नौकरी या कर्ज के झूठे ऑफर की शिकायत की जा सकती है। शिकायत कॉल, SMS या व्हाट्सऐप, किसी भी माध्यम से आई हो, दर्ज हो सकती है। विभाग के अनुसार चक्षु पर अब तक 12.80 लाख शिकायतें आईं, जिनके आधार पर 59.82 लाख मामलों में कार्रवाई हुई।

चक्षु उन लोगों के लिए नहीं है जिनके खाते से पैसा पहले ही निकल चुका है। पोर्टल खुद कहता है कि ऐसे में तुरंत साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर फोन करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। जल्दी शिकायत का फायदा क्या होता है, यह वाराणसी के रामनगर के एक निवासी को 97,250 रुपये वापस मिलने की हमारी खबर में देखा जा सकता है।

पांचवीं सुविधा उन अंतरराष्ट्रीय कॉल की शिकायत की है जो +91 से शुरू होने वाले भारतीय नंबर जैसी दिखती हैं। विभाग के मुताबिक ऐसी कॉल अवैध टेलीकॉम सेटअप से आती हैं और इनकी शिकायत से सरकार उन पर कार्रवाई कर पाती है। पोर्टल पर बैंकों और वित्तीय संस्थाओं के असली कस्टमर केयर नंबर, ईमेल और वेबसाइट की सूची भी है, ताकि कोई अनजान नंबर बैंक का होने का दावा करे तो उसे मिलाया जा सके।

पोर्टल के 'Keep Yourself Aware' हिस्से में फर्जी लोन ऐप, निवेश घोटाले, नौकरी के फर्जी कॉल और नकली ट्रैफिक चालान जैसे तरीकों पर जानकारी दी गई है। वाराणसी में साइबर ठगी के बड़े मामलों की पड़ताल पर 116 करोड़ रुपये के साइबर फ्रॉड की SIT जांच वाली हमारी रिपोर्ट भी इसी खतरे की तस्वीर दिखाती है। अपने नाम पर चल रहे नंबरों की जांच समय समय पर की जा सकती है, क्योंकि आपके पहचान पत्र पर जारी कोई अनजान सिम किसी और के हाथ में ठगी का जरिया बन सकता है।