बुखार, दर्द या संक्रमण की दवा लेने मेडिकल स्टोर जाने पर अक्सर दुकान के बाहर या सोशल मीडिया पर किसी दवा के प्रचार दिख जाते हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय अब ऐसी दवाओं के प्रचार पर कसावट चाहता है, जो डॉक्टर की पर्ची पर ही मिलनी चाहिए। इसके लिए ड्रग्स रूल्स, 1945 में बदलाव का मसौदा 9 अक्टूबर 2026 को मंत्रालय ने इसकी जानकारी दी।

मसौदा राजपत्र अधिसूचना जी.एस.आर. 861(ई) के रूप में 28 सितंबर 2026 को जारी हुआ। मंत्रालय के मुताबिक यह औषधि तकनीकी सलाहकार बोर्ड से सलाह के बाद लाया गया है। बोर्ड की 93वीं बैठक 16 फरवरी 2026 को हुई थी, जिसमें दवा बेचने और बांटने के लाइसेंस वालों के प्रचार से जुड़े प्रावधानों की जरूरत पर विचार किया गया था।

मौजूदा नियमों में अनुसूची एच, एच1 और एक्स की दवाओं का प्रचार दवा निर्माता केंद्र सरकार की पूर्व मंजूरी के बिना नहीं कर सकते। ये वही श्रेणियां हैं, जिनमें कुछ एंटीबायोटिक, मनोरोग की दवाएं और डॉक्टर की निगरानी वाली अन्य दवाएं आती हैं। मंत्रालय का कहना है कि खुदरा और थोक बिक्री करने वालों के लिए ऐसा सीधा प्रावधान अब तक स्पष्ट रूप से नहीं था।

इसी कमी को भरने के लिए ड्रग्स रूल्स के नियम 65 में उप नियम (22) जोड़ने का प्रस्ताव है। यह प्रावधान दवा बेचने, रखने, प्रदर्शित करने, बिक्री के लिए पेश करने या बांटने का लाइसेंस रखने वालों पर लागू होगा। इनमें खुदरा और थोक, दोनों तरह के लाइसेंसधारी शामिल हैं। प्रस्ताव के अनुसार इन तीन अनुसूचियों की दवाओं का प्रचार केंद्र की पूर्व मंजूरी के बिना नहीं हो सकेगा।

मंत्रालय ने इस कदम का मकसद दवा आपूर्ति की पूरी कड़ी में निगरानी मजबूत करना बताया है। मसौदे से बिना मंजूरी वाले प्रचार को हतोत्साहित करने और बिना सलाह खुद से दवा लेने के जोखिम घटाने की उम्मीद है। विज्ञप्ति में खास तौर पर एंटीबायोटिक और मनोरोग की दवाओं का जिक्र है, जिनमें गलत इस्तेमाल का नुकसान ज्यादा माना जाता है।

अभी यह केवल मसौदा है, पक्का नियम नहीं। मंत्रालय ने आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं, जो राजपत्र की प्रतियां जनता को उपलब्ध होने की तारीख से 30 दिन के भीतर दिए जा सकते हैं। इस अवधि में मिले सुझावों पर केंद्र सरकार विचार करेगी और उसके बाद संशोधन को अंतिम रूप देगी। इसलिए दुकानदारों के लिए फिलहाल नियम नहीं बदला है।

मसौदे का सबसे सीधा असर मेडिकल स्टोर, थोक विक्रेताओं और वितरकों पर दिखेगा। अंतिम नियम बनने के बाद ये लाइसेंसधारी उन अनुसूचियों की दवाओं का नाम लेकर प्रचार करने से पहले केंद्र की मंजूरी लेने को बाध्य होंगे। प्रचार किन माध्यमों पर लागू होगा, इसका ब्योरा मंत्रालय की विज्ञप्ति में नहीं है, इसलिए अंतिम अधिसूचना का पाठ देखना होगा।

आम खरीदारों के लिए बात सीधी है। अनुसूची एच, एच1 और एक्स की दवाएं पंजीकृत डॉक्टर की पर्ची पर ही खरीदी जानी चाहिए, और किसी दुकान के प्रचार के आधार पर इन्हें खुद से लेना सही नहीं। दवा पर लिखा अनुसूची का निशान और पर्ची की शर्त देखकर चलें। कोई सवाल हो तो अपने डॉक्टर या फार्मासिस्ट से पूछें। यह जानकारी सामान्य है और किसी की इलाज संबंधी सलाह नहीं।

स्वास्थ्य क्षेत्र की दूसरी खबरों में ई-संजीवनी से 50 करोड़ दूरस्थ परामर्श और स्वास्थ्य पेशेवरों के पंजीकरण की नई व्यवस्था पढ़ी जा सकती हैं। मसौदे की पूरी जानकारी स्वास्थ्य मंत्रालय की विज्ञप्ति में है।