प्रधानमंत्री कौशल और रोजगार परिवर्तन योजना पीएम-सेतु (PM-SETU) ने 4 अक्टूबर 2026 को एक साल पूरा किया। योजना 4 अक्टूबर 2025 को शुरू हुई थी। पत्र सूचना कार्यालय की नोट के अनुसार इसका मकसद सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) को आधुनिक, उद्योग से जुड़े प्रशिक्षण केंद्र बनाना है। कुल परिव्यय 60,000 करोड़ रुपये है। इसमें केंद्र का हिस्सा 30,000 करोड़, राज्यों का 20,000 करोड़ और उद्योग का 10,000 करोड़ रुपये है।
एक साल में 850 ITI चिन्हित हो चुके हैं। इनमें 172 हब और 678 स्पोक संस्थान शामिल हैं। 14 ITI क्लस्टरों के रणनीतिक निवेश प्रस्ताव (SIP) राष्ट्रीय संचालन समिति ने मंजूरी दी है। इन 14 क्लस्टरों में कुल निवेश 3,446 करोड़ रुपये का है। योजना अब पायलट से आगे बढ़कर देशभर के 200 चिन्हित ITI क्लस्टरों में लागू होने के चरण में है।
देश में सरकारी और निजी मिलाकर ITI की संख्या 2014 में 9,776 से बढ़कर 2026 में 13,888 हो गई है, यानी लगभग 42 प्रतिशत की वृद्धि। नामांकन 2014-15 के 9.51 लाख से 2025-26 में 14.70 लाख तक पहुंचा है। यह विस्तार पीएम-सेतु जैसे उन्नयन कार्यक्रमों के लिए आधार देता है। प्रशिक्षण की अवधि ट्रेड के अनुसार छह महीने से दो साल तक होती है। राष्ट्रीय स्तर पर दिशा-निर्देश और पाठ्यक्रम का समन्वय कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के अंतर्गत प्रशिक्षण महानिदेशालय (DGT) करता है, जबकि प्रशासनिक नियंत्रण राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पास रहता है।
हब और स्पोक मॉडल कैसे काम करता है
घटक एक के तहत 1,000 सरकारी ITI अपग्रेड होने हैं। इनमें 200 हब और 800 स्पोक हैं। औसतन एक हब से चार स्पोक जुड़े होते हैं। हब पर इनोवेशन सेंटर, प्रशिक्षक प्रशिक्षण, उत्पादन इकाई और प्लेसमेंट सुविधाएं जुड़ती हैं। स्पोक आसपास के शिक्षार्थियों को उसी क्लस्टर के संसाधनों से जोड़ते हैं। स्मार्ट क्लासरूम, आधुनिक प्रयोगशालाएं और डिजिटल सामग्री इसी ढांचे का हिस्सा हैं।
घटक दो में भुवनेश्वर, चेन्नई, हैदराबाद, कानपुर और लुधियाना स्थित पांच राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों (NSTI) का विस्तार शामिल है। यहां सेक्टर-विशेष राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के जरिए प्रशिक्षकों का उन्नत प्रशिक्षण तय है। सिंगापुर के साथ चेन्नई NSTI, फ्रांस के साथ कानपुर, ऑस्ट्रेलिया के साथ भुवनेश्वर का समझौता और जर्मनी के साथ हैदराबाद NSTI के लिए आशय घोषणा का जिक्र आधिकारिक नोट में है।
उद्योग की साझेदारी और 14 क्लस्टर
अपग्रेडेड क्लस्टरों के लिए विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) का ढांचा है। एंकर उद्योग साझेदार की प्रस्तावित हिस्सेदारी 51 प्रतिशत है। केंद्र और राज्य सरकारें 24.5-24.5 प्रतिशत रखती हैं। SPV स्थानीय जरूरत के हिसाब से पाठ्यक्रम, प्रशिक्षण, बुनियादी ढांचा और उद्योग एक्सपोजर तय कर सकता है। राज्यों को उद्योग के साथ मिलकर प्रस्ताव भेजने होते हैं। राष्ट्रीय संचालन समिति का अध्यक्ष कौशल विकास सचिव है। यह नीति, दिशानिर्देश, निगरानी और जरूरी सुधार तय करती है।
मंजूर 14 SIP में आंध्र प्रदेश, ओडिशा, गुजरात, तेलंगाना, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र और जम्मू-कश्मीर के क्लस्टर शामिल हैं। क्षेत्रों में इस्पात और धातु, विविध विनिर्माण, स्वास्थ्य, फार्मा, बुनियादी ढांचा, ऑटोमोटिव, रक्षा और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे सेक्टर दिखते हैं। उदाहरण के लिए कुरुक्षेत्र क्लस्टर में 320 करोड़ रुपये और पटनचेरु में 275 करोड़ रुपये का निवेश दर्ज है। 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने क्लस्टर चिन्हित कर बजट हेड बनाए हैं। 35 ने राज्य संचालन समिति गठित की है। 26 ने उद्योग भागीदारी आमंत्रित करने की प्रक्रिया शुरू की है।
नए ट्रेड और छात्रों के लिए मतलब
DGT ने शिल्पकार प्रशिक्षण योजना के अंतर्गत 32 नए युग के पाठ्यक्रम जोड़े हैं। इनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा, एडिटिव मैन्यूफैक्चरिंग, इलेक्ट्रिक वाहन, सेमीकंडक्टर, रोबोटिक्स, ग्रीन हाइड्रोजन, ड्रोन, IoT, सौर ऊर्जा, 5G और सॉफ्टवेयर टेस्टिंग शामिल हैं। राज्य अपने ITI में इन्हें अपना सकते हैं। जो युवा EV सर्विसिंग, सौर पैनल स्थापना या साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में जाना चाहते हैं, उनके लिए स्थानीय ITI में इन ट्रेडों की उपलब्धता पूछना अब व्यवहारिक कदम है।
दाखिला और छात्रवृत्ति की तारीखें अलग-अलग बोर्ड और योजनाओं पर निर्भर करती हैं। हाल ही में एनएमएमएसएस छात्रवृत्ति का आवेदन 31 अक्टूबर तक बढ़ाया गया और सीबीएसई तीन भाषा नियम पर भी अभिभावकों के लिए स्पष्टीकरण जारी हुए हैं। शारीरिक शिक्षा शिक्षकों के राष्ट्रीय रजिस्टर से जुड़े एनएसआरएस मॉड्यूल जैसे कदम भी कौशल और स्कूल तंत्र के बीच कड़ी दिखाते हैं। ITI उम्मीदवारों को राज्य की आधिकारिक वेबसाइट, pm-setu.skillindiadigital.gov.in और संबंधित ITI कार्यालय से चालू ट्रेड सूची और प्रवेश विंडो जांचनी चाहिए।
आने वाले महीनों में बाकी क्लस्टरों के SIP, उद्योग साझेदारों की नियुक्ति और नए ट्रेडों का राज्यों में अपनाना मुख्य अगला पड़ाव है। जो परिवार दिवाली के आसपास करियर विकल्प तौल रहे हैं, उनके लिए स्थानीय हब ITI में कौन से नए ट्रेड खुले हैं, यह सवाल अब सीधे रोजगार की दिशा से जुड़ता है।

