हिमाचल प्रदेश के केलांग में अधिक ऊंचाई वाले इलाकों की स्वास्थ्य समस्याओं पर शोध के लिए आईसीएमआर का नया केंद्र प्रस्तावित है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा का शिलान्यास कार्यक्रम 12 अक्टूबर 2026 को तय किया गया है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसकी जानकारी 11 अक्टूबर की विज्ञप्ति में दी थी।
इसका नाम आईसीएमआर सेंटर फॉर हाई एल्टीट्यूड मेडिसिन एंड पब्लिक हेल्थ रिसर्च, यानी आईसीएमआर-सीएचएएमपी है। केंद्र लाहौल और स्पीति जिले में स्थापित किया जा रहा है। इसे भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद, आईसीएमआर, स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के तहत विकसित करेगी।
अभी उपलब्ध आधिकारिक घोषणा शिलान्यास के कार्यक्रम और प्रस्तावित शोध कार्यों के बारे में है। इसमें केंद्र का संचालन शुरू होने की तारीख, निर्माण की लागत या मरीजों के लिए कोई नई सेवा शुरू होने की सूचना नहीं दी गई है। इसलिए इसे चालू अस्पताल या उपलब्ध उपचार सुविधा मानकर पढ़ना सही नहीं होगा।
पहाड़ की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर शोध
मंत्रालय के मुताबिक, हिमालयी इलाकों में ऊंचाई के साथ कठिन भूभाग, विषम मौसम और भौगोलिक दूरी स्वास्थ्य सेवाओं के सामने अलग तरह की चुनौतियां रखते हैं। प्रस्तावित केंद्र का काम इन परिस्थितियों में रहने और काम करने वाले लोगों से जुड़े वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाना होगा।
शोध के विषयों में अधिक ऊंचाई पर शरीर की कार्यप्रणाली और वहां की परिस्थितियों के प्रति अनुकूलन शामिल हैं। पर्वतीय चिकित्सा भी इसके दायरे में होगी। इसका अर्थ केवल किसी एक बीमारी पर अध्ययन करना नहीं है; कार्यक्रम में पहाड़ी आबादी की व्यापक जनस्वास्थ्य जरूरतों को स्थान दिया गया है।
जलवायु से प्रभावित होने वाली और नई उभरती बीमारियों पर भी काम प्रस्तावित है। मंत्रालय ने संक्रामक तथा गैर-संक्रामक रोगों के साथ मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण और मानसिक स्वास्थ्य का उल्लेख किया है। पर्यावरण, कामकाज से जुड़े स्वास्थ्य जोखिम और आपदा चिकित्सा भी सूची में हैं।
केलांग की स्थिति लंबे समय तक चलने वाले क्षेत्रीय अध्ययनों के लिए इस्तेमाल करने की योजना है। ऐसे अध्ययनों में पर्यावरण की दशा, जलवायु में बदलाव और लोगों के स्वास्थ्य के बीच संबंध देखे जा सकेंगे। मंत्रालय ने अधिक ऊंचाई पर रहने वाली और जनजातीय आबादी को इस काम के केंद्र में रखा है।
डिजिटल स्वास्थ्य की योजना और संस्थागत सहयोग
केंद्र डिजिटल स्वास्थ्य मंचों, टेलीमेडिसिन और ड्रोन के जरिए स्वास्थ्य सामग्री पहुंचाने की संभावनाओं पर भी काम करेगा। साथ ही सार्वजनिक स्वास्थ्य की स्थिति की तत्काल निगरानी से जुड़े तरीकों को जोड़ने की योजना है। विज्ञप्ति इन्हें आगे विकसित किए जाने वाले काम के रूप में रखती है।
प्रस्तावित सहयोग में सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा, भारत के शोध संस्थान और हिमाचल प्रदेश सरकार शामिल होंगे। मंत्रालय का कहना है कि इन साझेदारियों से वैज्ञानिक आदान-प्रदान, प्रशिक्षण और शोध को नीति तथा व्यावहारिक उपयोग से जोड़ने में मदद मिलेगी। विज्ञप्ति में किसी अलग सहयोग समझौते की शर्तों का विवरण नहीं है।
केलांग में आईसीएमआर की मौजूदगी का पुराना आधिकारिक रिकॉर्ड भी है। परिषद के 23 मई 2022 के दस्तावेज में गोरखपुर स्थित क्षेत्रीय चिकित्सा अनुसंधान केंद्र के अधीन केलांग फील्ड स्टेशन का उल्लेख मिलता है। इसलिए नई घोषणा को इलाके में आईसीएमआर की पहली मौजूदगी कहना उचित नहीं होगा।
12 अक्टूबर के प्रस्तावित समारोह में भूमि पूजन और आधारशिला के अनावरण के साथ स्थानीय हिमालयी पौधों का रोपण रखा गया है। वैज्ञानिक प्रदर्शनी, केंद्र की वेबसाइट और संस्थागत वीडियो का शुभारंभ तथा भवन की रूपरेखा की प्रस्तुति भी कार्यक्रम में शामिल हैं। ये सभी बातें घोषित कार्यक्रम का हिस्सा हैं, समारोह पूरा होने की पुष्टि नहीं।
स्वास्थ्य अनुसंधान और सेवा पहुंच से जुड़े अन्य विषयों पर Dalimss News ने बीएचयू की आईसीएमआर समर्थित शोध परियोजनाओं और टेली-मानस की पहुंच के नए आंकड़ों पर रिपोर्ट प्रकाशित की है। वे अलग कार्यक्रम हैं; उनकी उपलब्धियों को केलांग के प्रस्तावित केंद्र के परिणामों में नहीं जोड़ा जा सकता।
आगे निर्माण और शोध कार्यक्रम के ठोस चरणों पर आधिकारिक विवरण मिलने से केलांग परियोजना की प्रगति स्पष्ट होगी। शिलान्यास की घोषणा केंद्र की दिशा स्पष्ट करती है, जबकि संचालन, सेवाओं और अध्ययन की समय-सारिणी के लिए आगे के आधिकारिक विवरण का इंतजार रहेगा।








