अस्पतालों और दूसरे चिकित्सा प्रतिष्ठानों में इलाज तथा उपलब्ध सुविधाओं की दरें मरीजों को साफ दिखाई दें, इसके लिए केंद्र ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से मौजूदा प्रावधानों के पालन की समीक्षा करने को कहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने इस संबंध में सभी मुख्य सचिवों को पत्र लिखा है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने 12 अक्टूबर को इसकी जानकारी दी।
पत्र में कहा गया है कि शुल्क की जानकारी ऐसी जगह हो जहां मरीज और उनके साथ आए लोग उसे आसानी से देख सकें। संबंधित अधिकारियों से जरूरी कदम उठाने और चिकित्सा प्रतिष्ठानों को उचित परामर्श जारी करने का अनुरोध किया गया है। इस घोषणा में इलाज के लिए कोई नई देशव्यापी मूल्य सीमा तय नहीं की गई है।
मंत्रालय के मुताबिक, दरें स्पष्ट होने से परिवार इलाज के संभावित खर्च को समझ सकेंगे और बिल को लेकर अनावश्यक उलझन कम हो सकती है। यह मंत्रालय का बताया उद्देश्य है। पत्र जारी होने भर से हर अस्पताल में अनुपालन हो जाने या सभी मरीजों का खर्च घट जाने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
दरें कहां और किस भाषा में दिखानी हैं
स्वास्थ्य मंत्रालय की आधिकारिक सूचना में क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट्स अधिनियम, 2010 और उसके केंद्रीय नियम, 2012 का उल्लेख है। जिन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में यह कानून लागू है, वहां नियमों के अनुसार हर तरह की सेवा और उपलब्ध सुविधा की दर प्रमुख स्थान पर स्थानीय भाषा तथा अंग्रेजी में दिखाई जानी चाहिए।
इसका मतलब केवल कुल पैकेज का नाम लिख देना नहीं है। सूचना में सेवाओं और सुविधाओं की दरें दिखाने के प्रावधान का जिक्र है। मरीज के लिए उपयोगी जानकारी वही होगी जिसे वह पढ़ सके और समझ सके कि बताई गई रकम किस सेवा से जुड़ी है। हालांकि पत्र किसी एक तरह का बोर्ड या दर सूची का नया नमूना निर्धारित नहीं करता।
जहां यह केंद्रीय कानून लागू नहीं है, वहां संबंधित राज्य या केंद्रशासित प्रदेश का नियामक ढांचा लागू होता है। मंत्रालय ने बताया है कि ऐसे कई ढांचों में भी शुल्क प्रदर्शित करने के प्रावधान मौजूद हैं। इसलिए इस पत्र के आधार पर हर राज्य में एक ही कानूनी व्यवस्था लागू होने का दावा करना सही नहीं होगा।
दर सूची और किसी मरीज के पूरे इलाज का अनुमान अलग बातें हैं। किसी सेवा की लिखी कीमत देखने से उस सेवा का शुल्क समझ आता है, लेकिन केवल उसी से पूरे उपचार का अंतिम बिल तय नहीं हो जाता। परिवार अस्पताल से यह स्पष्ट कर सकता है कि दिया गया अनुमान किन सेवाओं के लिए है और उसमें क्या शामिल है।
राज्यों को देखना होगा पालन
मंत्रालय ने स्वास्थ्य को राज्य का विषय बताते हुए कहा है कि लागू प्रावधानों का कार्यान्वयन और पालन सुनिश्चित करना संबंधित राज्य या केंद्रशासित प्रदेश की जिम्मेदारी है। मुख्य सचिवों से संबंधित अधिकारियों और संस्थानों को परामर्श जारी कराने का अनुरोध इसी प्रशासनिक जिम्मेदारी के तहत किया गया है।
इस घोषणा में अनुपालन की कोई नई अंतिम तारीख, अलग जुर्माना या सभी राज्यों के लिए साझा शिकायत हेल्पलाइन नहीं बताई गई। स्थानीय स्तर पर किस प्राधिकारी को शिकायत देनी है, यह संबंधित व्यवस्था से ही स्पष्ट होगा। बिना राज्य की अधिसूचना देखे किसी एक प्रक्रिया को पूरे देश के लिए लागू बताना मरीजों को गलत दिशा दे सकता है।
विदेश से मेडिकल या आयुष वीजा पर आने वाले मरीजों के लिए भी पत्र में अलग बात कही गई है। राज्यों से अनुरोध है कि जहां लागू हो, ऐसे मरीजों को दिए जाने वाले पैकेज की दरें प्रमुखता से दिखाने के लिए संस्थानों को प्रोत्साहित किया जाए। उद्देश्य इलाज चुनने से पहले कीमत की जानकारी उपलब्ध कराना है।
पैकेज का नाम और उसकी दर दिखने के बाद भी उसमें शामिल सुविधाएं समझना जरूरी रहता है। मंत्रालय की सूचना किसी एक समान राष्ट्रीय पैकेज की घोषणा नहीं करती। घरेलू और विदेशी मरीजों की सभी सेवाओं के लिए समान शुल्क तय होने की बात भी इसमें नहीं कही गई है।
स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच से जुड़े दूसरे कदमों पर Dalimss News ने ई-संजीवनी के ऑनलाइन परामर्श और कैंसर की कुछ दवाओं पर व्यापार मार्जिन की सीमा की खबरें प्रकाशित की हैं। वे अलग व्यवस्थाएं हैं। ताजा पत्र का विषय अस्पताल में शुल्क की जानकारी दिखाई देना और लागू नियमों का पालन है; आगे राज्य स्तर पर जारी निर्देशों से इसके अमल की तस्वीर साफ होगी।








