नशे के खिलाफ चल रहे राष्ट्रीय अभियान के तहत आयोजित युवा संवाद मेले की कुल पहुंच 1,06,855 लोगों तक रही। युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय ने 10 अक्टूबर को जारी अपने विवरण में यह आंकड़ा दिया है। मेला 9 अक्टूबर को माय भारत और राष्ट्रीय सेवा योजना, यानी एनएसएस, के जरिए 200 चुने हुए संस्थानों और उनसे जुड़े गांवों में आयोजित किया गया था।
मंत्रालय के अनुसार इनमें 93,662 युवा प्रतिभागी शामिल थे। गांवों और बस्तियों में अलग गतिविधियों के जरिए 13,193 अन्य नागरिकों तक पहुंच बनाई गई। इन दोनों संख्याओं का जोड़ घोषित कुल पहुंच के बराबर है। यह कार्यक्रम में भागीदारी का आंकड़ा है, नशे की समस्या से उबर चुके लोगों की संख्या नहीं।
यह आयोजन नशा मुक्त युवा अभियान के 100 सप्ताह वाले संकल्प अभियान के पहले महीने के समापन पर हुआ। पहले महीने की थीम मेरा स्वास्थ्य, मेरा गर्व थी। देश के 15 एनएसएस क्षेत्रीय निदेशालयों ने इसकी गतिविधियां संचालित कीं। मंत्रालय का कहना है कि जिन 200 संस्थानों का लक्ष्य रखा गया था, सभी में कार्यक्रम हुआ।
बातचीत और नुक्कड़ नाटकों से संदेश पहुंचाया
युवा संवाद वाले हिस्से में 509 सेमिनार और खुली चर्चाएं आयोजित हुईं। इनमें 36,086 युवाओं की भागीदारी दर्ज की गई। बातचीत का विषय नशे के कारण, साथियों का दबाव और समुदाय के स्तर पर रोकथाम था। अध्यापकों तथा स्थानीय प्रतिनिधियों को भी इन चर्चाओं में शामिल किया गया।
स्वयंसेवकों ने जानकारी देने के लिए 396 स्टॉल और कियोस्क लगाए। मंत्रालय ने इस हिस्से की पहुंच 32,909 प्रतिभागियों तक बताई है। यहां नशे के शारीरिक और मानसिक प्रभावों के बारे में जानकारी दी गई और उपलब्ध परामर्श सेवाओं से परिचित कराया गया। विज्ञप्ति में इन सेवाओं का संस्थानवार ब्योरा नहीं दिया गया है।
नुक्कड़ नाटक, छोटे नाटकों और संगीत प्रस्तुतियों के जरिए भी लोगों से संपर्क किया गया। मंत्रालय के मुताबिक ऐसी 587 प्रस्तुतियां हुईं और इनकी पहुंच 24,944 लोगों तक रही। स्थानीय भाषा और परिचित सांस्कृतिक तरीकों का इस्तेमाल अभियान का हिस्सा था। यह जानकारी आयोजक मंत्रालय के संकलन पर आधारित है।
डिजिटल माध्यम पर युवा कार्यकर्ताओं ने नशा मुक्त युवा हैशटैग के साथ 935 पोस्ट साझा कीं। यह पोस्ट की गिनती है। मंत्रालय ने इनके कुल दर्शकों, अलग-अलग खातों तक पहुंच या ऑनलाइन भागीदारी से हुए बदलाव का कोई आंकड़ा इस विज्ञप्ति में नहीं दिया है।
आंकड़ों से क्या पता चलता है
कुल पहुंच और अलग गतिविधियों में बताई गई भागीदारी को एक ही पैमाने की गिनती मानकर जोड़ना ठीक नहीं होगा। विज्ञप्ति यह स्पष्ट नहीं करती कि एक व्यक्ति के कई गतिविधियों में शामिल होने की स्थिति को कैसे दर्ज किया गया। इसलिए घोषित कुल आंकड़े के साथ प्रत्येक गतिविधि की गिनती अलग ही पढ़ी जानी चाहिए।
इसी तरह कार्यक्रम हो जाना और उसका स्वास्थ्य पर असर दो अलग बातें हैं। जारी विवरण में जागरूकता गतिविधियों और उनमें भाग लेने वालों की जानकारी है। इसमें उपचार पूरा करने, नशा छोड़ने या दोबारा नशे की ओर लौटने की दर पर कोई अध्ययन प्रस्तुत नहीं किया गया है।
महीने के समापन के बाद अगला चरण शारीरिक फिटनेस और खेलों पर केंद्रित होगा। मंत्रालय ने दूसरे महीने के लिए फिट युवा, नशामुक्त युवा की थीम बताई है। उद्देश्य युवाओं को नियमित शारीरिक गतिविधियों और स्वस्थ दिनचर्या से जोड़ना है। संस्थानवार कार्यक्रम, तारीख और भागीदारी की शर्तें इस राष्ट्रीय विवरण में नहीं हैं।
स्थानीय गतिविधि की जानकारी कहां मिलेगी
माय भारत के आधिकारिक अभियान पेज पर गीत, नुक्कड़ नाटक, निबंध और नारा लेखन जैसी गतिविधियों के अलग विकल्प दिए गए हैं। वहां कार्यक्रमों तथा जागरूकता सामग्री की जानकारी भी उपलब्ध है। किसी गतिविधि में हिस्सा लेने से पहले उसी के पेज पर दी गई तारीख, पात्रता और आयोजक का विवरण देखना चाहिए।
माय भारत का सामान्य पोर्टल स्वयंसेवा और व्यावहारिक सीखने के अवसर भी दिखाता है। कार्यक्रम खोजते समय स्थान का चयन करने की सुविधा है। राष्ट्रीय स्तर पर जारी पहुंच के आंकड़े से यह नहीं माना जा सकता कि हर जिले या हर कॉलेज में एक जैसी गतिविधि और बराबर संख्या में स्थान उपलब्ध हैं।
युवाओं की भागीदारी से जुड़ी दूसरी पहल पर Dalimss News की विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग के निबंध चरण की रिपोर्ट पढ़ी जा सकती है। मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में अलग जानकारी टेली-मानस और मान जागृति पर हमारी रिपोर्ट में है। इन सेवाओं और प्रतियोगिताओं की प्रक्रिया युवा संवाद मेले से अलग है।








