प्याज के दाम अब नीचे आने लगे हैं। केंद्र सरकार के मुताबिक पिछले दो हफ्तों में देश के 126 शहरों में प्याज का खुदरा भाव 1 रुपये से 21 रुपये प्रति किलो तक घटा है। जिन राज्यों में दाम नरम पड़े हैं, उनमें उत्तर प्रदेश और बिहार भी शामिल हैं। उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने 7 अक्टूबर की शाम प्याज की उपलब्धता और खरीफ फसल की स्थिति पर ब्योरा जारी किया।

मंत्रालय ने जिन बाकी राज्यों में खुदरा भाव घटने की बात कही है, उनमें तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल हैं। उसका कहना है कि गिरावट कुछ मंडियों या किसी एक इलाके तक सीमित नहीं है। दूर दूर के बाजारों में एक साथ दाम उतरना इस बात का संकेत माना गया है कि पूरे देश में आवक सुधरी है।

थोक मंडियों में यह असर पहले दिखा। महाराष्ट्र की प्रमुख मंडियों में प्याज का भारित औसत भाव 16 सितंबर को करीब 4,030 रुपये प्रति क्विंटल था, जो 3 अक्टूबर तक घटकर करीब 3,475 रुपये रह गया। यह लगभग 13 प्रतिशत की कमी है। किलो के हिसाब से देखें तो मंडी का औसत भाव करीब 40 रुपये से घटकर लगभग 35 रुपये पर आ गया। मोहल्ले की दुकान तक पहुंचते पहुंचते इसमें ढुलाई, भंडारण और दुकानदार का मुनाफा जुड़ता है, इसलिए खुदरा भाव इससे ऊपर रहता है।

दाम घटने की सबसे बड़ी वजह नई फसल है। कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और राजस्थान से खरीफ प्याज की ताजा आवक शुरू हो गई है। पिछले सीजन का भंडारित प्याज भी बाजार की मांग पूरी कर रहा है। मंत्रालय के मुताबिक आने वाले हफ्तों में इन राज्यों से आवक और बढ़ेगी, जिससे त्योहारों के दौरान बड़े उपभोक्ता बाजारों में प्याज की कमी नहीं रहनी चाहिए।

खेतों की तस्वीर भी ठीक बताई गई है। इस साल देशभर में खरीफ प्याज का रकबा पिछले साल से करीब 5 प्रतिशत ज्यादा आंका गया है, और पिछला साल खुद अच्छा रहा था। प्रमुख उत्पादक इलाकों में फसल की हालत अनुकूल है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुमान में आने वाले हफ्तों में खरीफ प्याज वाले मुख्य इलाकों में बहुत ज्यादा बारिश की आशंका नहीं जताई गई है, जिससे कटाई, सुखाने और ढुलाई में आसानी होगी और नमी से फसल खराब होने का खतरा घटेगा।

सरकार अपने बफर स्टॉक से भी प्याज बाजार में उतार रही है। अब तक 2 लाख क्विंटल से ज्यादा प्याज, यानी करीब 20 हजार टन, 8 कांदा एक्सप्रेस ट्रेनों और 467 ट्रकों के जरिए 123 शहरों तक पहुंचाया जा चुका है। मंत्रालय ने कहा है कि त्योहारों से पहले रेल के और रेक लगाने की योजना है, ताकि ज्यादा खपत वाले शहरों में बड़ी मात्रा में प्याज जल्दी पहुंच सके।

यह गिरावट ऐसे समय आई है जब महंगाई फिर चर्चा में है। रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने 7 अक्टूबर को रेपो दर 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दी। समिति के प्रस्ताव में कहा गया था कि खाने पीने की चीजों के दाम में बढ़ोतरी ज्यादा चीजों तक फैल गई है और चीनी व प्याज में तेज उछाल आया है। ऐसे में प्याज के मोर्चे पर नरमी घर के बजट के लिए मायने रखती है।

उत्तर प्रदेश के घरों के लिए असली इम्तिहान अगले चार हफ्तों में होगा। दिवाली इस बार 8 नवंबर को है और मंत्रालय ने अपनी जानकारी में बार बार आने वाले त्योहारी सीजन का जिक्र किया है। उसका आकलन है कि ताजा खरीफ आवक, भंडारित स्टॉक और बफर प्याज, तीनों रास्तों से आपूर्ति बनी रहेगी और दाम और नरम होंगे।

एक बात साफ कर दें। मंत्रालय की जानकारी में यूपी के अलग अलग शहरों के भाव नहीं दिए गए हैं, सिर्फ इतना बताया गया है कि राज्य उन जगहों में है जहां दाम घटे हैं। लखनऊ, वाराणसी या गोरखपुर में आज प्याज किस भाव बिक रहा है, यह स्थानीय मंडी और दुकान पर ही पता चलेगा।

सरकार ने कहा है कि वह आवक, स्टॉक और दामों पर लगातार नजर रख रही है और जहां जरूरत होगी वहां व्यवस्थित वितरण और पर्याप्त उपलब्धता के लिए कदम उठाएगी। आने वाले दिनों में देखने वाली बात यही होगी कि रेल के अतिरिक्त रेक कब और किन शहरों के लिए चलते हैं।