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    <title>हिंदी समाचार - Dalimss News</title>
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    <description>Dalimss News की ताजा हिंदी खबरें: वाराणसी, पूर्वांचल, गुरुग्राम और भारत.</description>
    <language>hi</language>
    <lastBuildDate>Fri, 02 Oct 2026 06:56:42 GMT</lastBuildDate>
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      <title>Dalimss News</title>
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    <item>
      <title>वाराणसी-रांची-कोलकाता कॉरिडोर का 35 प्रतिशत काम पूरा, सफर 18 घंटे से घटकर 5 घंटे होने की उम्मीद</title>
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      <pubDate>Fri, 02 Oct 2026 06:27:16 GMT</pubDate>
      <atom:updated>2026-10-02T06:27:16.235Z</atom:updated>
      <dc:creator><![CDATA[Saurav Yadav]]></dc:creator>
      <category>Varanasi, India</category>
      <description><![CDATA[नितिन गडकरी ने पटना में बताया कि करीब 600 किलोमीटर लंबे वाराणसी-रांची-कोलकाता कॉरिडोर का 35 प्रतिशत काम हो चुका है। लागत लगभग 32,000 करोड़ रुपये है।]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>वाराणसी-रांची-कोलकाता कॉरिडोर का करीब 35 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने 1 अक्टूबर को पटना में &apos;राइजिंग बिहार इन्वेस्टर समिट 2026&apos; के दौरान यह जानकारी दी। मंत्रालय की विज्ञप्ति के अनुसार लगभग 600 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर की लागत करीब 32,000 करोड़ रुपये है।
विज्ञप्ति में गडकरी के हवाले से कहा गया है कि परियोजना पूरी होने पर वाराणसी से कोलकाता तक का सफर करीब 18 घंटे से घटकर लगभग 5 घंटे का रह जाने की संभावना है। उन्होंने इसे बिहार को उत्तर प्रदेश, झारखंड और पश्चिम बंगाल से बेहतर तरीके से जोड़ने वाली परियोजना बताया।
समिट में बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, पथ निर्माण मंत्री ई. कुमार शैलेंद्र और उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह भी मौजूद थे। मुख्यमंत्री ने राज्य में निवेश, उद्योगों के विस्तार और रोजगार को सरकार की प्राथमिकता बताया।
गोरखपुर से सिलीगुड़ी तक
समिट में गडकरी ने गोरखपुर-सिलीगुड़ी हाई स्पीड कॉरिडोर का भी जिक्र किया। करीब 526 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर की लागत लगभग 72,000 करोड़ रुपये बताई गई है। इसमें से करीब 52,000 करोड़ रुपये का निवेश बिहार में होगा और लगभग 410 किलोमीटर हिस्सा बिहार से गुजरेगा। विज्ञप्ति के मुताबिक इसके ग्रीनफील्ड अलाइनमेंट को स्वीकृति मिल चुकी है और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया के लिए अधिसूचना जारी की जा चुकी है।
बिहार के आंकड़े
गडकरी ने बताया कि बिहार में हाईवे निर्माण के क्षेत्र में 3,88,100 करोड़ रुपये के काम किए जाने हैं। मौजूदा कार्यकाल के अंत तक कुल करीब 5 लाख करोड़ रुपये के काम पूरे करने का लक्ष्य है। करीब 33,000 करोड़ रुपये की लागत से 2,910 किलोमीटर लंबाई की परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि लगभग 65,100 करोड़ रुपये की 1,878 किलोमीटर की परियोजनाओं पर काम चल रहा है। आगामी परियोजनाओं का कुल प्रस्तावित निवेश करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये है।
उनके अनुसार 2014 में बिहार में राष्ट्रीय राजमार्गों की कुल लंबाई करीब 4,615 किलोमीटर थी, जो अब बढ़कर करीब 6,500 किलोमीटर हो गई है।
बाकी परियोजनाएं
धार्मिक और पर्यटन महत्व की परियोजनाओं में गडकरी ने राम-जानकी मार्ग का नाम लिया। लगभग 440 किलोमीटर लंबे इस मार्ग की लागत करीब 5,440 करोड़ रुपये है, इसका लगभग 27 प्रतिशत काम हो चुका है और इसे नवंबर 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य बताया गया। भगवान बुद्ध से जुड़े कॉरिडोर के तहत करीब 22,000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का लगभग 90 प्रतिशत काम पूरा होने की बात कही गई।
आगामी ग्रीनफील्ड परियोजनाओं में रक्सौल-हल्दिया कॉरिडोर है, जो करीब 550 किलोमीटर लंबा होगा और जिसकी अनुमानित लागत लगभग 45,200 करोड़ रुपये है। इसकी डीपीआर दिसंबर तक पूरी करने की बात कही गई। गडकरी के अनुसार इससे रक्सौल से हल्दिया की यात्रा का समय लगभग 20 घंटे से घटकर 8 घंटे रह सकता है। बक्सर-भागलपुर हाई स्पीड कॉरिडोर करीब 218 किलोमीटर लंबा है और उसकी लागत लगभग 10,000 करोड़ रुपये बताई गई। पटना रिंग रोड करीब 162 किलोमीटर की है, लागत लगभग 10,200 करोड़ रुपये, और गडकरी ने कहा कि इसके जरिए दरभंगा एयरपोर्ट को भी बेहतर संपर्क मिलेगा।
वाराणसी-रांची-कोलकाता कॉरिडोर के पूरा होने की तारीख और उत्तर प्रदेश वाले हिस्से का अलग ब्योरा विज्ञप्ति में नहीं है। ऊपर दिए सभी आंकड़े मंत्री ने समिट में रखे, जिन्हें मंत्रालय ने अपनी विज्ञप्ति में दर्ज किया है।</p>]]></content:encoded>
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    </item>
    <item>
      <title>दिव्यांगजन के छूट वाले फास्टैग के नियम बदले, आज से लागू; अब पांच या तीन साल में नवीनीकरण</title>
      <link>https://dalimss.news/articles/divyangjan-exempted-fastag-new-guidelines-2-october</link>
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      <pubDate>Fri, 02 Oct 2026 06:15:54 GMT</pubDate>
      <atom:updated>2026-10-02T06:15:54.847Z</atom:updated>
      <dc:creator><![CDATA[Saurav Yadav]]></dc:creator>
      <category>भारत</category>
      <description><![CDATA[सड़क परिवहन मंत्रालय ने दिव्यांगजनों के छूट वाले फास्टैग के नियम बदले हैं। अब दिव्यांगता के प्रतिशत के आधार पर वैधता तीन या पांच साल होगी।]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>दिव्यांगजनों के वाहनों के लिए जारी होने वाले छूट वाले फास्टैग की वैधता अब उनकी दिव्यांगता के प्रतिशत से तय होगी। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने इसके लिए संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जो आज, 2 अक्टूबर 2026 से प्रभावी हैं। अब तक ऐसे फास्टैग का नवीनीकरण हर साल कराना पड़ता था।
नए नियम के मुताबिक 70 से 100 प्रतिशत दिव्यांगता वाले व्यक्ति को जारी फास्टैग पांच साल के लिए वैध रहेगा। जिनकी दर्ज दिव्यांगता 40 प्रतिशत या उससे ऊपर लेकिन 70 प्रतिशत से कम है, उन्हें जारी फास्टैग तीन साल के लिए वैध होगा। मंत्रालय ने 1 अक्टूबर को जारी विज्ञप्ति में यह बताया।
किन वाहनों को मिलेगा छूट वाला फास्टैग
संशोधित ढांचे में छूट वाला फास्टैग दो तरह के वाहनों के लिए जारी होगा। पहले वे वाहन, जो शारीरिक रूप से दिव्यांग व्यक्तियों के इस्तेमाल के लिए खास तौर पर डिजाइन और तैयार किए गए हैं। दूसरे वे वाहन, जो स्वामित्व के प्रकार &apos;दिव्यांगजन&apos; के तहत पंजीकृत हैं।
फास्टैग कितने साल का होगा, यह वैध दिव्यांगता प्रमाणपत्र, विशिष्ट दिव्यांगता पहचान पत्र (यूडीआईडी) या किसी दूसरे लागू रिकॉर्ड में दर्ज दिव्यांगता के प्रतिशत से तय किया जाएगा। यानी जिस दस्तावेज में प्रतिशत लिखा है, वही अवधि का आधार बनेगा। उदाहरण के लिए, यूडीआईडी कार्ड में 75 प्रतिशत दिव्यांगता दर्ज होने पर फास्टैग पांच साल का होगा और 45 प्रतिशत दर्ज होने पर तीन साल का।
नवीनीकरण और कागजी कार्रवाई
मंत्रालय का कहना है कि नया ढांचा छूट वाले फास्टैग को जारी करने और उसके नवीनीकरण में एकरूपता लाने के लिए बनाया गया है। इससे बार-बार की जाने वाली कागजी कार्रवाई कम होगी। तय अवधि पूरी होने पर फास्टैग का नवीनीकरण कराया जा सकेगा, बशर्ते पात्रता बनी रहे और राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियम, 2008 के प्रावधानों का पालन हो।
विज्ञप्ति के अनुसार संशोधन का मकसद राष्ट्रीय राजमार्गों की पथकर व्यवस्था को पात्र दिव्यांगजन लाभार्थियों के लिए ज्यादा सुलभ, पारदर्शी और उपयोग में आसान बनाना है। मंत्रालय ने यह भी साफ किया है कि टोल छूट तय नियमों और पात्रता की शर्तों के मुताबिक ही दी जाती रहेगी।
विज्ञप्ति में क्या नहीं बताया गया
विज्ञप्ति में यह नहीं बताया गया है कि जिन लोगों के पास पहले से सालाना नवीनीकरण वाला छूट फास्टैग है, उनके मामले में नई अवधि कैसे और कब लागू होगी। यह भी नहीं बताया गया कि नया या नवीनीकृत फास्टैग किस बैंक या किस प्रक्रिया से मिलेगा। इन सवालों के जवाब के लिए फास्टैग जारी करने वाली संस्था से संपर्क करना होगा या मंत्रालय के आगे के निर्देशों का इंतजार करना होगा।
फिलहाल इतना साफ है कि 2 अक्टूबर 2026 से जारी होने वाले और नवीनीकृत होने वाले, दोनों तरह के छूट वाले फास्टैग इन्हीं दिशा-निर्देशों के दायरे में आएंगे।</p>]]></content:encoded>
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    </item>
    <item>
      <title>गांधी जयंती पर आज देशभर में विशेष ग्राम सभाएं, &apos;सबकी योजना, सबका विकास&apos; अभियान की शुरुआत</title>
      <link>https://dalimss.news/articles/special-gram-sabha-2-october-sabki-yojana-sabka-vikas</link>
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      <pubDate>Fri, 02 Oct 2026 06:04:44 GMT</pubDate>
      <atom:updated>2026-10-02T06:04:44.231Z</atom:updated>
      <dc:creator><![CDATA[Saurav Yadav]]></dc:creator>
      <category>भारत</category>
      <description><![CDATA[पंचायती राज मंत्रालय के अनुसार 2 अक्टूबर को देशभर की ग्राम पंचायतों में विशेष ग्राम सभाएं होंगी और जन योजना अभियान 2026-27 की शुरुआत होगी।]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>देश की ग्राम पंचायतों में आज, 2 अक्टूबर को विशेष ग्राम सभाएं बैठेंगी। इन्हीं बैठकों से जन योजना अभियान 2026-27 की शुरुआत होगी, जिसे &apos;सबकी योजना, सबका विकास&apos; नाम दिया गया है। इस अभियान के तहत हर ग्राम पंचायत वित्त वर्ष 2027-28 के लिए अपनी ग्राम पंचायत विकास योजना (जीपीडीपी) तैयार करेगी। पंचायती राज मंत्रालय ने 1 अक्टूबर को जारी विज्ञप्ति में यह जानकारी दी।
विज्ञप्ति के मुताबिक ग्राम सभा में गांव के लोग और चुने हुए प्रतिनिधि साथ बैठेंगे और सरकारी योजनाओं के लाभ व अमल की समीक्षा करेंगे। वे स्थानीय जरूरतों और कमियों की पहचान करेंगे और गांव के विकास की प्राथमिकताओं पर विचार करेंगे। मंत्रालय ने बताया कि यह पूरी कवायद भारत सरकार के कई मंत्रालयों और विभागों के सहयोग से हो रही है।
किन योजनाओं पर होगी बात
मंत्रालय की सूची में पंचायती राज के अपने कामों के अलावा छह और विभागों की योजनाएं हैं। पंचायती राज की ओर से वित्त आयोग के अनुदान, राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान के तहत क्षमता निर्माण, ई-ग्राम स्वराज और ऑडिट ऑनलाइन, पंचायतों की अपनी आमदनी बढ़ाने की पहल, स्वामित्व योजना और पंचायत उन्नति सूचकांक रखे जाएंगे।
ग्रामीण विकास विभाग विकसित भारत रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण), यानी वीबी-जी राम जी, पर चर्चा कराएगा। विज्ञप्ति में इस मिशन के तहत 125 दिन के मजदूरी रोजगार की वैधानिक गारंटी का जिक्र है। साथ में स्थानीय स्तर पर तय होने वाले कामों और आजीविका के लिए विकसित ग्राम पंचायत योजना भी एजेंडे में है।
पेयजल एवं स्वच्छता विभाग जल जीवन मिशन और स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) को सामने रखेगा, जिसमें ओडीएफ प्लस और ठोस व तरल कचरे का प्रबंधन आता है। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग की तरफ से एक राष्ट्र एक राशन कार्ड और प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना पर बात होगी। उपभोक्ता मामलों का विभाग राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन और ई-जागृति की जानकारी देगा। भूमि संसाधन विभाग भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण वाले कार्यक्रम (डीआईएलआरएमपी) को रखेगा, और जल संसाधन विभाग &apos;जल संचय जन भागीदारी&apos; तथा &apos;कैच द रेन&apos; के जरिए भूजल पुनर्भरण का मुद्दा उठाएगा।
योजना बनती कैसे है
जन योजना अभियान 2018 से राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में चल रहा है। मंत्रालय के अनुसार 2.55 लाख से ज्यादा ग्राम पंचायतें अपनी योजनाएं तैयार कर ई-ग्राम स्वराज पर अपलोड करती हैं। इस बार भी योजनाएं सहभागी और साक्ष्य आधारित तरीके से बनाई जानी हैं।
पंचायत उन्नति सूचकांक इसमें एक पैमाने का काम करता है। विज्ञप्ति के अनुसार इससे पंचायत को पता चलता है कि स्थानीय विकास के किन क्षेत्रों में उसने अच्छा किया है और कहां कमी रह गई है। इसी आधार पर ग्राम सभा प्राथमिकताएं तय करती है और आने वाले साल का संकल्प लेती है।
कानून, नशा और कचरा भी एजेंडे में
बैठकों में कुछ विषय सीधे योजनाओं से नहीं जुड़े हैं। विज्ञप्ति के अनुसार भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम के बारे में जागरूकता बढ़ाई जाएगी। डिजिटल बदलाव, सहकारी समितियों को मजबूत करने और महिलाओं व बच्चों की सुरक्षा और गरिमा से जुड़ी पहलों पर भी चर्चा होगी, जिनमें बाल विवाह मुक्त भारत और नशा मुक्त भारत अभियान का नाम लिया गया है।
स्वच्छता ही सेवा 2026 अभियान इसी के साथ समाप्त हो रहा है, इसलिए ग्राम सभाओं में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 पर भी बात होगी।
बैठक कब और कहां
विज्ञप्ति में अलग-अलग गांवों की बैठक का समय और स्थान नहीं दिया गया है। इसकी जानकारी संबंधित ग्राम पंचायत से ली जा सकती है। मंत्रालय ने नागरिकों से 2 अक्टूबर की विशेष ग्राम सभाओं में हिस्सा लेने और ऐसी पंचायत विकास योजनाएं बनवाने में योगदान देने की अपील की है, जो स्थानीय जरूरतों को दर्शाती हों।</p>]]></content:encoded>
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